post बहस Archives - Workers Unity

भगत सिंह मज़दूर वर्ग से क्यों बड़ी उम्मीद रखते थे?

(भगत सिंह के 88वें शहादत को लेकर गुड़गांव में  हुई एक गोष्ठी में प्रोफ़ेसर सरोज गिरी ने  भाषण दिया था।

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कश्मीरी मज़दूरों पर हमले और युद्ध उन्माद के ख़िलाफ़ ट्रेड यूनियनों ने फूंका बिगुल

देश भर में कश्मीरी मज़दूरों की पिटाई की घटनाओं के ख़िलाफ़ ट्रेड यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया है। देश भर

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मज़दूर वर्ग क्यों नहीं बन पाता इस देश का प्रमुख मुद्दा?

आज के दौर में मजदूर वर्ग की पहचान खतरे में है, मजदूरों की इसी बदतर स्थिति के बारे में प्रो.

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सैलरी गैपः मज़दूर 1 हज़ार साल काम करे तो भी वो सीईओ की एक साल की कमाई की बराबरी नहीं कर सकता

 By अरविंद नायर हिंदुस्तान यूनिलीवर के सीईओ की सैलरी 19 करोड़ 37 लाख रुपये सालाना है। जबकी इसी कंपनी के सबसे

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आज़ाद भारत में कम्पनी राज की खुली छूट है और शोषणकारी पूंजी के आगे सत्ता बेबस और नतमस्तक

By-नित्यानंद गायेन अच्छे दिनों के जुमलों के साथ मोदी सरकार के पांच साल किसान-मजदूर, छात्र-युवाओं के आन्दोलन के वर्ष साबित

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कंपनी राज में पहले वज़ीर बिकता है फिर वह मुल्क बेचता है…

By-नित्यानंद गायेन भारत की पराधीनता की कहानी का आरम्भ ‘ईस्ट इंडिया कम्पनी’ के आगमन के साथ ही शुरू हो गया

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अंतरिम बजट 2019: मज़दूरों किसानों के लिए क्या ये मोदी का अंतिम ‘जुमला’ साबित होगा?

BY नित्यानंद गायेन एक फ़रवरी को संसद में मोदी सरकार ने 2019 का अंतरिम बजट पेश किया। यह बजट देश

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मोदी सरकार के इस बहुप्रचारित बजट से मज़दूरों और किसानों को क्या नहीं मिला?

By मुकेश असीम आखिर इस बजट में अति शोषण के दौर से गुजर रहे मज़दूरों और किसानों को क्या मिला?

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Exclusive…वो ट्रेड यूनियनें, जिन्होंने देशव्यापी हड़ताल को नाकाम करने में पूरी जान लगा दी

By आशीष सक्सेना केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय देशव्यापी आम हड़ताल समाप्त हो गई। कहीं भरपूर तो कहीं कमजोर

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मेघालय की घटना एक चेतावनी है, देश को चमकाने के लिए हर साल 48 हज़ार मज़दूर होते हैं शहीद

बीते 18 दिनों से मेघालय की एक कोयला खदान में पानी भरने से 15 मज़दूर फंसे हुए हैं। धीमे राहत

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