post बहस Archives - Workers Unity

क्या रेलवे के निजीकरण से पहले जानलेवा राष्ट्रवादी साजिशों का दौर चला

(by आशीष सक्सेना,वरिष्ठ पत्रकार बरेली) निगमीकरण के बहाने निजीकरण की पटरी पर दौड़ाने से पहले रेलवे में भी ‘राष्ट्रवादी साजिशों’

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बजट 2019 में जनता को राहत देने की बात तो दूर, आर्थिक हालात की फ़िक्र तक नहीं दिखी

By गौतम मोदी गए आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने देशवासियों से कोई ठोस भौतिक वादे किये ही नहीं

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बजट काट कर, किसानों को हल बैल की ओर लौटने की सलाहः बजट 2019

By मुकेश असीम बजट में किसानों को दुगनी आय का महामंत्र दिया गया है। बताया गया है कि ज़ीरो बजट प्राकृतिक

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मोदी सरकार के पहले बजट में मजदूरों के लिए क्या है?

शुक्रवार को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश हुआ। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के बाद

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रेलवे का राष्ट्रीयकरण-निजीकरण एक ही नीति के दो चेहरे, ब्रिटेन का उदाहरण सामने है

By मुकेश असीम कुछ ‘विशेषज्ञ’ सलाह दे रहे हैं कि अब तो संसद में जोरदार बहुमत है, अब मोदी जी

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ईएसआई-पीएफ़: मज़दूरों के पैसे से ही मज़दूरों को खैरात देने की तैयारी

सरकार पिछले पांच साल से मज़दूरों की गाढ़ी कमाई के खजाने में सेंध लगाने की हर चंद कोशिश कर रही

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मज़दूर की मेहनत की लूट में सरकार और पूजीपति दोनों शामिल

इंडिया स्टाफिंग फेडरेशन के अनुसार फ्लेक्सी-स्टाफिंग (ठेकेदारी मज़दूर ) 2 018 में बढ़कर 3.3 करोड़  हो गई है  जो 2015

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भारत में सबसे ज्यादा बाल मज़दूर और उनमे सबसे ज्यादा sc/st वर्ग के बच्चे

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया सबसे अधिक बाल मज़दूर भारत में ही है और उसमे

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अँग्रेज बुनकरों की जिन्दगी की एक झलक किताब “कंडिशन ऑफ़ वर्किंग क्लास इन इंग्लैंड” से एक अंश

एंगेल्स ने पूँजीवाद के यौवन काल में इंग्लैण्ड के मजदूरों की दुर्दशा पर एक किताब लिखी थी 1844 में आई  ‘कंडिशन

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मज़बूत सरकार या मज़बूर सरकार, मज़दूरों को क्या चाहिए?

जब भी चुनाव होता है, मज़दूर वर्ग के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न खड़ा होता है कि वो आखिर करें

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