रेलवे में निजीकरण के खिलाफ ‘पत्थर आंदोलन’

By आशीष सक्सेना

रेल कर्मचारियों में निगमीकरण के जरिए निजीकरण के इरादे से हलचल है। इसका विरोध भी सभी यूनियनें कर रही हैं।

महीनेभर बाद रेलवे में यूनियनों की मान्यता का चुनाव भी है, इसलिए रेल कर्मचारी यूनियनों के नेता चुनाव प्रचार में भी पसीना बहा रहे हैं।

बल्कि निगमीकरण या निजीकरण के मुद्दे से ज्यादा उनका ध्यान चुनाव में फतेह हासिल करना है। इस बीच इज्जतनगर मंडल से एक मैसेज देशभर में वायरल हो गया है, जिसके बाद चुनाव प्रचार में मस्त यूनियनों के नेताओं को असमंजस में डाल दिया है।

इस मैसेज की शुरुआत कहां से हुई, स्पष्ट नहीं है, हालांकि इसको पूर्वोत्तर रेलवे कार्मिक यूनियन की फेसबुक वॉल समेत कई सोशल मीडिया ग्रुप में देखा गया है।

वायरल मैसेज में ‘नमक आंदोलन’ की झलक

जिस तरह आजादी के आंदोलन में महात्मा गांधी के नमक आंदोलन और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से लोग बिना बैनर के जुड़ते चले गए, उसी की झलक वायरल मैसेज में दिख रही है।

मैसेज में कहा गया है, ‘‘हर कर्मचारी रेलवे के ट्रैक का एक पत्थर है, खामोशी से पड़ा। ये एक-एक पत्थर कितनी ताकत रखते हैं, इसका एहसास करने की जरूरत है। यही पत्थर मिलकर रेलवे लाइन को संभाले रहते हैं। तभी ट्रेनें पूरे देश के एक छोर से दूसरे छोर तक रंग, रूप, वेष, भाषा का भेदभाव किए बगैर सबको एकता के धागे में बांधे रखती हैं।”

“ये सिलसिला डेढ़ साल से ज्यादा समय से जारी है। कितनी सरकारें बदलीं, ट्रेनों के नाम बदले, लेकिन पत्थरों का काम जो था, वही है…रेल को संभाले रहना, देश को एकता में बांधे रखने को अंत तक जोर लगाना। आज इन पत्थरों को उठ खड़े होना होगा, क्योंकि निजीकरण के जरिए एकता अखंडता के खिलाफ साजिश हो रही है।”

रेल मंत्रालय भेजेंगे रेलवे ट्रैक के पत्थर

मैसेज में कहा गया है, ‘‘क्या ऐसा हो सकता है कि हर रेल कर्मचारी अपना प्रतिनिधित्व रेलवे ट्रैक से एक पत्थर उठाकर करे? अपने परिवार के सदस्य से कहे कि एक पत्थर ले आए ट्रैक से। अपने परिवार के हिस्से के पत्थर हम सेक्शन स्तर पर जमा करें, हर सेक्शन से मंडल तक जाएं, बोरियों-कट्टों में। मंडल से जोन स्तर पर और वहां से रेल मंत्रालय तक हम ये पत्थर भेज दें, पार्सल करके। ये बताने के लिए कि तुम्हारी अक्ल पर पत्थर पड़ गए हैं, निजीकरण वापस लो, हमारी जिंदगी पर पथराव मत करो।’’

‘‘सिर्फ एक पत्थर’ को आंदोलन बना डालो, चाहे जिस भी यूनियन में हो। अपने नेताओं से कहें कि ये पत्थर इक_े रेल मंत्रालय को भेजें। सभी यूनियनें इस मुहिम को जनांदोलन की शक्ल दें। आम लोग, जो आपके दुख के साथ हैं, उनसे भी इसमें शामिल होने की अपील करें। जितने पत्थर उतनी ताकत। साहस हो तो एक पत्थर लेकर फेसबुक और वाट्एएप फोटो अपलोड करें…।”

रेल यूनियनों को उलाहना

मैसेज में चुनाव प्रचार कर रही यूनियनों को उलाहना के साथ कर्मचारियों से अपील की गई है। कहा है, ‘‘13 लाख कर्मचारी हैं रेलवे में, उनके परिवार समेत संख्या जोडि़ए, अपने मित्र और रिश्तेदारों को जोडि़ए…लाखों सदस्यता की डींग हांकने वाली यूनियनों से बोलिए कि अपनी सदस्यता के बराबर तो पत्थर रेल मंत्रालय को ज्ञापन के साथ भेजें। ज्ञापन में सिर्फ एक मांग- निगमीकरण निजीकरण का फैसला वापस लो…। क्या हम सब तैयार हैं? इस सूचना को जहां तक हो, वहां तक फैलाइए, शेयर मत कीजिए, कॉपी करिए, बिना नाम, ये सबका अभियान हो…।’’-

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