रेलवे पर इंदिरा गांधी से भी बड़े हमले की तैयारी, 3 लाख कर्मचारियों की होगी छंटनी

निजीकरण को हरी झंडी देने के बाद अब भारतीय रेलवे से तीन लाख कर्मचारियों को ज़बरदस्ती रिटायर करने का सरकार ने मन बना लिया है।

अगर ऐसा होता है तो इंदिरा गांधी के ज़माने में हुई रेलवे ऐतिहासिक हड़ताल में जिस तरह लाखों कर्मचारियों को मनमाना तरीक़े से टर्मिनेट, सस्पेंड किया गया था उसका अब नया रिकॉर्ड बनने जा रहा है।

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, भारतीय रेलवे तीन लाख कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। रेलवे ने तमाम जोनल ऑफिस से ऐसे कर्मचारियों की लिस्ट तैयार करने को कहा है।

रेल मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से आई ख़बर के मुताबिक, निर्देश में ऐसे ऐसे लोगों की लिस्ट बनाने को कहा गया है जो 55 साल की उम्र पार कर चुके हैं या 2020 की पहली तिमाही तक रेलवे में उनकी नौकरी के 30 साल होे चुके हैं।

रेलवे बोर्ड ने पत्र में कहा है कि वे अपने स्टाफ का एक सर्विस रिकॉर्ड तैयार करें, जिसके साथ उनका प्रोफार्मा संलग्न किया जाए।

9 अगस्त की समय सीमा

पत्र में कहा गया है कि इन दोनों ही क्राइटेरिया में आने वाले लोगों की एक लिस्ट तैयार की जाए। पत्र में 2020 की पहली तिमाही का मतलब पत्र में साफ करते हुए इसे जनवरी से मार्च, 2020 बताया गया है।
रेलवे बोर्ड इतनी बड़बड़ी में है कि उसने लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के चंद दिन बाद ही रेलवे कारखानों के निगमीकरण का आदेश जारी कर दिया।

उसके बाद देश की पहली निजी क्षेत्र वाली ट्रेन संचालित करने पर मुहर लगाई और साथ साथ कानपुर और इलाहाबाद रेलवे स्टेशनों को निजी क्षेत्र को बेच दिया।

अब ताज़ा पत्र रेलवे ने 27 जुलाई को जारी किया है जिसमें आदेश को पूरा करने की अंतिम तारीख 9 अगस्त तय की है। यानी नौ अगस्त तक उन तीन लाख कर्मचारियों की शिनाख़्त का शुरू हो जाएगा जिन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाना है।

बहुत ताज्जुब की बात है कि सरकारी अधिकारी इसे रूटीन कार्रवाई बता रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि समय समय पर ऐसी कार्रवाईयां होती हैं ताकि ढीला काम करने वालों को निकाला जा सके।

लेकिन उनके पास इस बात का जवाब नहीं है कि एक साथ तीन लाख कर्मचारियों की छु्टटी करने का अभियान क्या कभी पहले कराया गया था।

मोदी सरकार ने स्वीकारा

गौरतलब है कि लोकसभा में हाल ही में सरकार की ओर से ये जानकारी दी गई कि अलग-अलग सरकारी विभागों में काम करने वाले ग्रुप-A और ग्रुप-B के 1.19 लाख से भी ज्यादा अफसरों की परफॉर्मेंस की जांच की गई थी। ऐसा समय से पहले रिटायरमेंट वाले नियम के तहत किया गया था।

रेलवे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक फिलहाल रेलवे में 13 लाख कर्मचारी हैं और मंत्रालय चाहता है कि इस संख्या को घटाकर 2020 तक 10 लाख तक लाया जा सके।

इधर सवाल उठने लगे हैं कि भारतीय रेलवे पर इतना तेज़ी से हमला होने के बावजूद रेलवे की ट्रेड यूनियनें मैदान में क्यों नहीं संगठित रूप से दिखाई दे रही हैं।

हालात ये है कि रेलवे कारखाने के कर्मचारी सड़क पर उतर रहे हैं लेकिन बाकी विभागों के रेलवे कार्मिक यूनियनें आगामी चुनाव में जुटी हुई हैं।

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