आते ही मोदी सरकार ने रेलवे की 26,000 नौकरियां ख़त्म करने का दिया टार्गेट

शपथ ग्रहण के दिन ही मोदी सरकार ने उत्तरी रेलवे की 26,000 नौकरियां समाप्त करने का फरमान जारी कर दिया है।

30 मई को एक तरफ़ राष्ट्रपति भवन में विशाल भीड़ के सामने प्रधानमंत्री और उनके 57 मंत्रिमंडल सदस्य जब शपथ ग्रहण कर रहे थे, उसी समय उत्तरी रेलवे के डिवीज़न रेलवे मैनेजर (लखनऊ) ने एक अधिसूचना जारी की।

इस अधिसूचना के तहत उन्होंने उत्तरी रेलवे के कुल 13 विभागों में 26,260 पदों के समाप्त करने की घोषणा की।

पिछले साल ही मोदी ने अपने अंतिम कार्यकाल के दौरान इन विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम करके एक प्रतिशत तक लाने की बात कही थी यानी 26,260 की जगह 264 पद ही बचेंगे।

30 मई को जारी इस अधिसूचना पत्र को लखनऊ डिविज़न के सभी ब्रांच आफ़िसों को भेजा गया है।

रेलवे ने पदों को समाप्त करने को एक्शन प्लान का नाम दिया है और कहा है कि इस टार्गेट को 2019-20 के वित्तीय वर्ष में ही पूरा किया जाना है।

2601 पद की जगह केवल 26 पद रह जाएंगे

इसके तहत, अकाउंट्स में 191 पद, इंजीनियरिंग में 7338 पद, मकैनिकल (ओ एफ़) में 2783 पद, मकैनिकल (सी डब्ल्यू) में 1938पद, मकैनिकल (डीएसएल) में 1014 पद, एसएंडटी में 1573 पद, इलेक्ट्रिकल (G) 1541 पद, इलेक्ट्रिकल (टीआरडी एंड टीआरएस) 550 पद, मेडिकल में 875 पद, स्टोर में 19 पद, सिक्यूरिटी में 1292 पद और कामर्शियल में 2601 पद ख़त्म होंगे।

यानी इन विभागों में ग्रुप सी में 18,602 और ग्रुप डी में 7,658 पद समाप्त होने हैं।

ये पद उन विभागों में ग्रुप डी और सी के अंतर्गत आते हैं। इन्हें ख़त्म कर सिर्फ़ 264 पद ही बचे रहेंगे। रेलवे ट्रेड यूनियनों ने पदों को ख़त्म करने का विरोध किया है।

बरेली की ट्रेड यूनियन पीआरकेयू के महामंत्री राकेश मिश्रा ने कहा कि रेलवे में चल रहे प्राइवेटाइजेशन की वजह से ये नौकरियां ख़त्म हो रही हैं।

वर्कर्स यूनिटी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यूनियनें इसका लगातार विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार सुनने को राज़ी नहीं है।

उन्होंने कहा कि ये पद इसलिए समाप्त किए जा रहे हैं क्योंकि बहुत सारे विभागों में रेलवे ने कामों को आउटसोर्स कर दिया है जिससे कर्मचारियों के पास कोई काम नहीं बचा है।

railway letter

आधी रेलवे बिक चुकी है

वो कहते हैं कि आधे से अधिक रेलवे का निजीकरण ऑलरेडी किया जा चुका है और अब केवल उसका असर दिख रहा है।

गौरतलब है कि जब 2014 में मोदी सत्ता में काबिज हुए थे उन्होंने सार्वजनिक सभा में बनारस में कहा था कि रेलवे को बेचने से पहले वो मर जाना पसंद करेंगे।

लेकिन मोदी ने चुपचाप अंदर ही अंदर रेलवे के बहुत से विभागों का निजी कंपनियों के हवाले कर दिया है।

यहां तक कि कुछ ट्रेनों के परिचालन को भी निजी हाथों में देने पर मोदी सरकार विचार कर रही है।

इसी साल जनवरी में रेलवे बोर्ड के सदस्य यातायात गिरीश पिल्लई ने परिवहन अनुसंधान एवं प्रबंधन केंद्र के एक कार्यक्रम में इस बात के संकेत दिए थे।

क्या हुआ मोदी का वादा

उन्होंने कहा था, “दुनिया भर में ट्रेनों के परिचालन में कई बदलाव हुए हैं और मेरा मानना है कि यह ऐसा समय है कि भारत को यात्री ट्रेनों के परिचालन में निजी ऑपरेटरों को अनुमति देने के विकल्प पर चर्चा करनी चाहिए।

जनवरी 2019 में ही एक और ख़बर आई थी कि रेलवे अब पार्सल को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है।

जिस तेजी से रेलवे का निजीकण किया जा रहा है, उससे लगने लगा है कि मोदी सरकार के अगले पांच साल के कार्यकाल में पूरी रेलवे निजी हाथों में चली जाएगी और सिर्फ अफ़सर रह जाएंगे।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

3 thoughts on “आते ही मोदी सरकार ने रेलवे की 26,000 नौकरियां ख़त्म करने का दिया टार्गेट

  • June 2, 2019 at 8:49 am
    Permalink

    As per the quoted letter, it is not 2600 rather 26058 posts ( 18400 of Group-C and 7658 of Group-D)

    Reply
    • June 2, 2019 at 6:05 pm
      Permalink

      ग़लती को सुधार लिया गया है….आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

      Reply
      • October 16, 2019 at 6:22 am
        Permalink

        चलो आपको तो इतना पता है जनता तो अनपढ़ है और कोई खबर हो तो शेर जरुर करना ओके

        Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *