बांग्लादेश में आग से 10 हज़ार मज़दूर हुए बेघर, 1200 झुग्गियां जल कर ख़ाक

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक झुग्गी-बस्ती इलाक़े में लगी भीषण आग की वजह से 10 हज़ार लोग बेघर हो गए हैं।

बीबीसी की ख़बर के अनुसार, शुक्रवार रात लगी आग में चालानटीका झुग्गी-बस्ती में 1200 झुग्गियां बर्बाद हो गईं।

अधिकतर घरों की छत प्लास्टिक की थी जिसकी वजह से आग और ज़्यादा फैली। इस आग से कम से कम 10,000 लोग बेघर हो गए। हालांकि पहले कहा जा रहा था कि प्रभावितों की संख्या 50,000 है।

इस हादसे में कई लोग घायल हुए हैं लेकिन किसी के मारे जाने की ख़बर नहीं है। हज़ारों लोगों को स्कूलों में जगह दी गई है।

यहां अधिकतर मज़दूर रहते हैं जो इद उल अज़हा के त्यौहार की वजह से अपने पैतृक इलाक़ों में गए हुए थे।

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बांग्लादेश में आग के बाद खाक हो चुकीं झुग्गियों से काम की चीज़ निकालते लोग। फ़ोटो साभारः एएफ़पी

बीबीसी ने समाचार एजेंसी रायटर्स के हवाले बताया है कि आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा है कि कुल 1200 झुग्गियां क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें 750 झुग्गियां पूरी तरह जल कर ख़ाक हो गईं।

अधिकतर लोगों के सर पर अब छत नहीं है. वो खुले में रात गुज़ारने को मजबूर हैं।

इसी साल फ़रवरी में ढाका के एक ऐतिहासिक इलाक़े में लगी आग में कम-से-कम 80 लोग मारे गए थे और वहीं चिट्टगांव शहर में लगी आग में 9 लोग मारे गए थे।

बांग्लादेश में पिछले कुछ सालों में भयंकर औद्योगिक दुर्घटनाएं हुई हैं। जब ऐसे बड़े हादसे सामने आते हैं तो मज़दूर वर्ग के शोषण और उत्पीड़न की नई कहानी हमें पता चलती है।

ताज़ा हादसा मज़दूरों की रिहाईश की व्यवस्था को नज़रअंदाज़ करने का एक जानबूझ कर किया गया आपराधिक कृत्य जैसा है और श्रम कानूनों को ताक पर रखकर श्रमिकों को नारकीय स्थिति में रख कर मुनाफ़ा निचोड़ने वाला है।

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