चेन्नई ऑटो सेक्टर में 5000 मज़दूरों की छंटनी, मंदी का असर गहराया

ऑटो सेक्टर में भारी मंदी के बीच दक्षिण भारत के ऑटो सेक्टर में काम करने वाले मज़दूरों को भी छंटनी का शिकार होना पड़ा है।

एक अनुमान के मुताबिक चेन्नई के ऑटो इंडस्ट्री हब में 5000 ठेका मज़दूरों और ट्रेनी मज़दूरों की छंटनी कर दी गई है।

चेन्नई के ऑटो सेक्टर सालाना 13 लाख कारें और 36 लाख कामर्शियल गाड़ियां बानने की क्षमता रखता है।

लेकिन अब यहां ऑटो मेकर कंपनियां अपने प्रोडक्शन को काफ़ी कम कर दिया है और कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि मंदी की मार से ठीक पहले तमिलनाडु की सरकार ने ऑटो सेक्टर को ज़रूरी सार्वजनिक सेवाओं की श्रेणी में लाकर हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि अदालत से सरकार के इस आदेश पर स्टे आ गया है।

2.3 लाख नौकरियां गईं

लेकिन ट्रेड यूनियनों का कहना है कि कार्पोरेट कंपनियों को पता था कि मंदी के बाद भारी छंटनी होगी और इसलिए छंटनी तालाबंदी के खिलाफ़ बड़े पैमाने पर हड़ताल प्रदर्शन हो सकते हैं।

इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स (सियाम) का कहना है कि पूरे भारत में 286 डीलरों ने अपने शो रूम बंद कर दिए हैं और तक़रीबन 2.3 लाख लोगों की नौकरी जा चुकी है।

सियाम के डिप्टी डायरेक्टर जनरल सुगत सेन का कहना है कि ऑटोमोबाइल की बड़ी कंपनियां भारी संकट से दौर से गुजर रही हैं।

अशोक लेलैंड, टीवीस मोटर्स, हुंडई समेत सभी बड़ी कंपनियां अपनी क्षमता से कम उत्पादन कर रही हैं।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, तमिलनाडु में सीटू के अध्यक्ष ए सुंदरराजन ने कहा कि कंपनियों ने ट्रेनी और ठेका मज़दूरों को निकाल बाहर किया है।

कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियां सप्ताह में पांच दिन और एक शिफ़्ट में काम कर रही हैं क्योंकि ऑर्डर नहीं आ रहे हैं।

उनका कहना है कि अगर अर्थव्यवस्था और मंदी की ओर गई तो हालात और ख़राब होंगे।

सरकार से जीएसटी कम करने की अपील

अख़बार ने हुंडई के वाइस प्रेसिडेंट बीसी दत्ता के हवाले से कहा है कि अभी तक कंपनी में कोई छंटनी नहीं हुई है लेकिन हालात नहीं सुधरे तो छंटनी पर कंपनी विचार करेगी।

हालात सुधारने के लिए कार निर्माता कंपनियों ने राज्य सरकार से जीएसटी को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की मांग की है।

इस संबंध में इन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की है।

उल्लेखनीय है कि चेन्नई के पास ओरगाडम में एक औद्योगिक हब बनाया गया है जहां दुनिया भर की अग्रणी ऑटो कंपनियों ने अपने प्लांट लगाए हैं।

यहां फ़ोर्ड, डेमलर, निसान, यामहा, रॉयल एऩील्ड, रेनॉल्ट, हुंडई, बीएमडबल्यू और अन्य कंपनियों के प्लांट यहां हैं।

चेन्नई पोर्ट के चेयरमैन रवींद्रन के हवाले से अख़बार ने बाताया है कि पिछले साल के मुकाबले कारों के निर्यात में इजाफ़ा हुआ है।

उनके अनुसार, पिछले साल 39600 गाड़ियों का निर्यात किया गया, जबकि इस साल 57.500 कारों का निर्यात किया है।

इस महीने जारी बयान में टीएस मोटर कंपनी ने कहा है कि उसकी बिक्री घटी है। पिछले साल उसने 3,21, 179 यूनिट की बिक्री की थी जो घटकर इस साल 2,79, 465 यूनिट रह गई।

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