होंडा आंदोलन में मज़दूरों के ख़िलाफ़ एक चिट्ठी कराई जा रही है वायरल

होंडा मानेसर प्लांट में कैजुअल मज़दूरों के आंदोलन को एक महीने पूरे हो गए हैं।

इस बीच हाथ से लिखी हुई होंडा कंपनी को समर्थन देने वाली एक चिट्ठी सोशल मीडिया में काफ़ी वायरल हो रही है जिस पर स्थानीय गांवों के कुछ पूर्व और मौजूदा सरपंचों के हस्ताक्षर हैं।

दावा किया गया है कि मानेसर इलाका संघर्ष समिति की ओर से एक बैठक आयोजित की गई जिसमें तय किया गया कि होंडा कंपनी में प्रोडक्शन चलना चाहिए।

इसमें लिखा गया है कि अगर होंडा कंपनी के प्रोडक्शन में किसी भी तरह की अड़चन आती है तो हमारा इलाका कंपनी को सुचारू रूप से चलाने में कंपनी का साथ देगा।

इसमें विजयपाल सरपंच, ग्राम पंचायत नाहरपुर कासन, सिकंदरपुर बढ़ा के सरपंच, संजम दीप सरपंच, हरजस सरपंच, ग्राम पंचाय रामपुरा, प्रदिप यादव सरपंच, ग्राम पंचायत नौरंगपुर, सविता सरपंच ग्राम पंचायत बास हरिया, प्रवीन कुमार सरपंच ग्राम पंचायत ढाणा के मोहर और हस्ताक्षर हैं।

honda strike viral letter

मारुति आंदोलन में भी हुई थी ऐसी कोशिश

एक कैजुअल मज़दूर ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि कंपनी के इशारे पर इस तरह चिट्ठी को वायरल किया जा रहा है और ये वही लोग हैं जिन्होंने मारुति आंदोलन में भी मज़दूरों के ख़िलाफ़ इसी तरह का दुष्प्रचार किया था।

मज़दूरों का कहना है कि इलाका संघर्ष समिति में इस इलाक़े के दबंग और दलाल किस्म के लोग भी शामिल हैं जिनका हित कंपनी से जुड़ा हुआ है, और कुछ लोग कंपनी में ट्रांसपोर्टर का काम करते हैं।

एक अन्य कैजुअल मज़दूर ने नाम न ज़ाहिर होने की शर्त पर बताया कि मज़दूर आंदोलन को तोड़ने के लिए कंपनी ने कुछ पैसे देकर ये चिट्ठी जारी करवाई है।

उल्लेखनीय है कि पांच नवंबर से धरने पर बैठे कैजुअल मज़दूरों के प्लांट से बाहर निकलने के बाद अब मैनेजमेंट वार्ता में भी नहीं आ रहा है।

साथ ही दो दिसम्बर को कंपनी के लेबर कांट्रैक्टरों ने एक जैसी नोटिस जारी कर 15,000 रुपये प्रति वर्ष सेवा के हिसाब से मुआवजा देने का प्रस्ताव किया था जिसे मज़दूरों ने ठुकरा दिया।

मिल रहा व्यापक समर्थन

इन मज़दूरों को इलाके की व्यापक यूनियनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों से मिल रहे समर्थन के कारण कंपनी और ठेकेदार बैकफुट पर हैं।

मज़दूरों का कहना है कि यही कारण है कि कंपनी ने पहले तो गैरकानूनी तरीके से मज़दूरों को निकाला और अब ग़लत हथकंडे अपना कर उन्हें डराने धमकाने का रुख अपना रही है।

मज़दूरों का कहना है कि जबतक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, धरना और संघर्ष जारी रहेगा।

पिछले दिनों इन मज़दूरों ने मानेसर से गुड़गांव डीसी कार्यालय तक दो रैलियां कीं और ज्ञापन दिया जबकि तीन दिसम्बर को मानव शृंखला बनाकर कंपनी के ग़ैरक़ानूनी कार्यवाहियों को उजागर किया।

छह दिसम्बर को मानेसर में ही होंडा प्लांट के बाहर एक विशाल जनसभा आयोजित की जा रही है जिसमें राष्ट्रीय स्तर की ट्रेड यूनियनें शामिल हो रही हैं।

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