अदानी के खदान के विरोध में हज़ारों आदिवासियों का धरना शुरू

By पुरुषोत्तम ठाकुर

(यह रिपोर्ट डाउनटूअर्थ समाचार वेबसाइट में पुरुषोत्तम ठाकुर ने लिखी है जिसे  साभार अद्यतन यहां प्रकाशित किया जा रहा है।)

छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के दंतेवाडा जिला लौह अयस्क का भण्डार हैI इनमें से एक नंदराज पहाड़ पर स्थित एनएमडीसी की डिपाजिट -13 नंबर खदान अदानी को दिए जाने के खिलाफ आदिवासियों ने मोर्चा खोल दिया है।

शुक्रवार को हजारों की तादाद में आदिवासी दंतेवाड़ा के दूरदराज के इलाकों से पिछले एक दो दिन से पैदल मार्च करते हुए किरंदुल में एनएमडीसी दफ्तर पहुंचे और यहां धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं।

इन प्रदर्शनकारियों में महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। यह ग्रामीण आदिवासी अपने साथ अनाज लेकर चले थे और रास्ते में खाना बनाते और खाते हुए पहुंचे हैं।

13 नंबर पहाड़ी में खदान

प्रदर्शन में शामिल और इसका अगुवाई करनेवालों में से एक कुआकोंडा विकासखंड के जनपद सदस्य राजू भास्कर भी हैं।

उन्होंने एक समाचार वेबसाइट ड़ाउन टू अर्थ से कहा, “यहाँ तीन जिले के सरपंच, जनपद सदस्य, जिला सदस्य और हजारों ग्रामीण यहाँ  सब मिलकर बैलाडीला- किरंदुल में आये हैं, क्योंकि हमारे क्षेत्र में बिना हमारे से बात हुए ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है और हमारी पहाड़ियों को छिना जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “नंदाराज पहाड़ी और पिटौड़मेटा हमारे 84 गाँव का देवी स्थल है। फर्जी ग्राम सभा का आयोजन दिखा कर यहां की 13 नंबर पहाड़ी में खदान खोलने का ठेका अदानी ग्रुप को दे दिया गया है। हम यहाँ किसी को खदान खोलने नहीं देंगे और इसके खिलाफ लड़ेंगे।”

धोखे से छीनी आदिवासियों की ज़मीन

सामाजिक कार्यकर्त्ता और आम आदमी पार्टी के नेता बल्लू भवानी ने सरकार के इस कदम को संविधान के खिलाफ करार दिया है।

उन्होंने कहा, “फर्जी ग्राम सभा के जरिये जनता को धोखे में रखा गया है। यहाँ सिर्फ 106 लोगों ने दस्तखत किए हैं और उसमें भी ज्यादातर दस्तखत फर्जी हैं। इसमें सरपंच के भी दस्तखत फर्जी हैं। यह शासन-प्रशासन की साजिश है।”

“जमीन हमारी जा रही है और ग्राम सभा दंतेवाडा में की जा रही है? हमारे पूरे बस्तर संभाग में ऐसा ही होता है। जब जमीन मेरी जा रही है तो सरकार को मुझसे पूछना चाहिए।”

गौरतलब है कि बैलाडीला डिपोजिटी-13 में 315.813 हेक्टेयर रकबे में लौह अयस्क खनन के लिए वन विभाग ने वर्ष 2015 में पर्यावरण संबंधी अनापत्ति दी थी।

जिस पर एनएमडीसी और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से उत्खनन करना था।

बीते दिसम्बर में मिला पट्टा

इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार के बीच हुए करार के तहत संयुक्त उपक्रम एनसीएल बनाया गया था, लेकिन इसे निजी कंपनी अदानी को 25 साल के लिए लीज हस्तांतरित कर दी गई।

इस रकबे में 35 करोड़ टन लौह अयस्क मौजूद होने की बात कही जा रही है।

सरकार और कंपनी पर यह भी आरोप है कि अदानी ग्रुप ने सितम्बर 2018 को बैलाडीला आयरन और माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई और दिसम्बर 2018 को केंद्र सरकार ने इस कंपनी को लीज दे दी।

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