बंगालः कल्याणी सॉल्वेक्स राइस मिल में टूल डाउन के बाद हड़ताल पर गए सभी मज़दूर

पश्चिम बंगाल में दक्षिण दिनाजपुर के कल्याणी सॉल्वेक्स प्राइवेट लिमिटेड राइस मिल में वेतन समझौता, नियुक्ति पत्र, ईएसआई, पीएफ़ सहित कई मांगों पर सुनवाई न होने के कारण मज़दूर दो जुलाई से हड़ताल पर चले गए हैं।

कोलकाता से शाईन ने वर्कर्स यूनिटी को फ़ोन पर बताया कि कल्याणी सॉल्वेक्स में पिछले तीन वर्षों से वेतन समझौते की माँग उठ रही थी, लेकिन मैनेजमेंट की ओर से किसी समाधान मिलने की बजाय मज़दूरों को उत्पीड़न और दमन का सामना करना पड़ रहा था।

मज़दूरों ने शिकायत की है कि उनकी मांगों के संबंध में मालिकों के साथ बार-बार बैठक करने के बावजूद, मालिक मज़दूरी वृद्धि के ख़िलाफ़ अड़े हुए हैं।

इसलिए वर्करों को 2 जुलाई से टूल डाउन करने के लिए मजबूर किया गया है और 48 घंटे के टूल डाउन के बाद यूनियन को हड़ताल पर जाना पड़ा क्योंकि मालिक श्रमिकों के साथ किसी भी समझौते पर नहीं आ रहे हैं।

मज़दूरों का आरोप है कि न केवल वेतन वृद्धि के बारे में, बल्कि प्रबंधन हर जगह अनियमितता कर रहा है।

साप्ताहिक अवकाश तक नहीं

गौरतलब है कि मालिकों ने 2012 और 2015 में श्रमिकों के साथ दो अनुबंध किए थे, लेकिन प्रबंधन ने किसी भी मज़दूर को कोई नियुक्ति पत्र नहीं दिया। मिल में क़रीब 800 वर्कर काम करते हैं।

श्रमिकों के पास कोई पीएफ़, ईएसआई, ग्रैच्युटी, साप्ताहिक अवकाश या ओवरटाइम नहीं है, जिसके लिए वे कानूनी रूप से हक़दार हैं।

इन सभी मांगों को लेकर कल्याणी सॉल्वेक्स श्रमिक यूनियन हड़ताल जारी रखे हुए है। मज़दूरों ने हड़ताल जारी रखने के साथ ही समस्या के समाधान के लिए तत्काल हस्तक्षेप के लिए दक्षिण दिनाजपुर श्रम आयुक्त को एक पत्र भी भेजा है।

मज़दूरों के अनुसार, श्रम आयुक्त को आंदोलन के दबाव से अपने कार्यालय में एक त्रिपक्षीय बैठक बुलाना तो पड़ा, लेकिन ‘श्रमिकों की ओर से बातचीत करने के लिए’ प्रबंधन द्वारा नियुक्त कथित तौर पर टीएमसी के एक गुंडे को बुलाया गया।

kalyani sovex workers union

श्रमिकों ने इसका विरोध किया और मांग की कि कल्याणी सॉल्वेक्स श्रमिक यूनियन से श्रमिकों के वास्तविक प्रतिनिधियों, प्रबंधन और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हो।

दक्षिण दिनाजपुर जिले में 2010 में सभी चावल मिलों में इस तरह की हड़तालें हुईं और कल्याणी सॉल्वैक्स प्राइवेट लिमिटेड के मज़दूरों ने 9 साल बाद फिर से संघर्ष का राह चुना है।

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