दिल्ली में न्यूनतम मज़दूरी में 37% वृद्धि पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

दिल्ली सरकार द्वारा दो साल पहले न्यूनतम मज़दूरी में 37 प्रतिशत का इजाफ़ा करने पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है।

इस फ़ैसले से परमानेंट, फ़िक्स टर्म, ठेका, कैजुअल और दिहाड़ी के मज़दूरों को फ़ायदा होगा।

कंपनी मालिकों द्वारा उठाई गई सभी आपत्तियों को सर्वोच्च न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया और कहा कि सोमवार से ये वेतन वृद्धि अंतिम फ़ैसला है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को न्यूनतम वेतन सलाहकार कमेटी द्वारा जनवरी 2019 में तय किए गए न्यूनतम वेतन की नोटिफ़िकेशन के साथ आगे बढ़ने को कहा है।

इस फैसले ने यह भी साफ़ कर दिया कि जब तक नए न्यूनतम वेतन की नोटिफ़िकेशन जारी नहीं की जाती है, तब तक 3 मार्च 2017 का नोटिफ़िकेशन मान्य रहेगा।

3 मार्च 2017 को एक नोटिफ़िकेशन के जरिए दिल्ली सरकार ने राज्य में न्यूनतम वेतन में 37 फीसदी की बढ़ोतरी की थी।

दो साल से कोर्ट में लटका था मामला

पहले दिल्ली के मालिकों की एसोसिएशनें इस नोटिफ़िकेशन के ख़िलाफ़ दिल्ली हाईकोर्ट में चली गई थीं और वहां से उनके हक़ में फ़ैसला आया था।

मालिकों की एसोसिएशनों ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी से उनके सामने बिज़नेस चलाने में दिक्कतें आएंगी और वो इस परेशानी को झेल नहीं पाएंगे। हाईकोर्ट ने उनकी इस दलील को मान लिया था।

इसके बाद दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले को चुनौती दी। 31 अक्तूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान 3 मार्च 2017 की नोटिफ़िकेशन को मान्य ठहराया था।

इसके साथ ही दिल्ली सरकार को न्यूनतम वेतन सलाहकार कमेटी का गठन नए सिरे करने का निर्देष भी दिया, जिसमें मालिकों की एसोसिएशनों को उचित भागीदारी मिले।

इसी के अनुसार दिल्ली सरकार ने नवंबर 2018 में न्यनूतम वेतन सलाहकार कमेटी का गठन किया और न्यूनतम वेतन निर्धारित किए।

ट्रेड यूनियनों ने किया स्वागत

इसके अनुसार, अकुशल श्रमिक के लिए प्रस्तावित न्यूनतम वेतन 14,842 रुपये मासिक है।

यही बाद में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे कि आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्वीकार कर लिया और दिल्ली सरकारी को इस बाबत नोटिफ़िकेशन जारी करने का दिशा निर्देश भी दिया।

इसमें डीए का हिस्सा जोड़ने के बाद ही न्यूनतम वेतन का नोटिफ़िकेशन जारी किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने मालिकों द्वारा उठाई गई सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया।

सीटू, एटक समेत कई यूनियनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया है।

हालांकि कुछ ट्रेड यूनियनों की मांग है कि न्यूनतम वेतन को 25,000 रुपये मासिक किया जाए।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *