गुजरात साणंद में फ़ोर्ड इंडिया के वर्करों का प्रदर्शन 30वें दिन पहुंचा

गुजरात के साणंद में फ़ोर्ड इंडिया कंपनी के श्रमिकों को विरोध प्रदर्शन करते हुए एक महीने होने जा रहे हैं।

इंडस्ट्रियल यूनियन डॉट आर्ग के अनुसार, वर्कर ने 30वें दिन भी कंपनी द्वारा दिए जाने वाले लंच का बहिष्कार करना जारी रखा।

मैनेजमेंट ने वेतन वृद्धि के समझौता करने से इनकार कर दिया है और वर्कर इसी बात को लेकर आक्रोश में हैं।

साणंद फ़ोर्ड इंडिया वर्कर्स यूनियन कर्नावती कामदार एकता संघ 2018-2010 के लिए वेतन समझौते का मांग पत्र दिया है।

वर्तमान में वर्करों को क़रीब 17,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है जोकि इस सेक्टर के लिहाज से बहुत कम है।

वर्कर काम के हिसाब से वेतन दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

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साणंद कार प्लांट में पिछले एक महीने से वेतन समझौते को लेकर मैनेजमेंट के मनमाने रवैये के ख़िलाफ़ हो रहा है प्रदर्शन। फ़ोटो साभारः वालजी भारवाड़
मैनेजमेंट वर्करों का कर रहा है उत्पीड़न

प्लांट में यूनियन के 864 सदस्यों के पास 9 साल से भी अधिक समय का अनुभव है।

वेबसाइट के अनुसार, लंबे समय तक समझौता वार्ता चलाने के बाद मैनेजमेंट 9800 से 10,000 रुपये का ऑफ़र दिया है जो कि तीन सालों के दौरान दिया जाना है।

यूनियन के अध्यक्ष मालदेवसिंह जडेजा ने बताया, “हम बहुत मुश्किल हालात में हैं क्योंकि मैनेजमेंट ने वेतन बढ़ाने से मना कर दिया है। हम देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे कम वेतन पाने वाले वर्कर हैं।”

उन्होंने कहा, “हम अपने परिवारों का ठीक से भरण पोषण भी नहीं कर पा रहे हैं। झूठे आरोप लगाकर मैनेजमेंट अनुशासनात्मक कार्रवाई कर हम पर दबाव बना रहा है।”

उन्होंने बताया, “मैनेजमेंट दबाव डाल रहा है कि बीमार होने पर भी फैक्ट्री आएं ताकि कंपनी के डॉक्टर चेक कर सकें।”

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ford india sanand plant @ RushLane
दुनिया की अग्रणी कार निर्माता कंपनी देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे कम वेतन देने वाली कंपनी है। फ़ोटो साभारः रशलेन
ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे कम वेतन

उन्होंने कहा कि हम अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे हैं और कंपनी की ओर से दिए जाने वाले खाने का बहिष्कार जारी रखेंगे।

इंडस्ट्रियल ऑटोमोटिव डायरेक्टर जॉर्ज ल्यूटर्ट ने कहा, “दुनिया की अग्रणी ऑटो निर्माता कंपनी जो मामूली वेतन दे रही है, वो अस्वीकार्य है।”

उन्होंने कहा, “फ़ोर्ड मैनेजमेंट को किसी भी तरह की दबाव डालने वाले तरीके से बचना चाहिए और वर्करों की मांगों को दबाने की जगह उनके हल के लिए बातचीत का रास्ता अख़्तियार करना चाहिए।”

साणंद के फ़ोर्ड इंडिया प्लांट में काम करने वाले वर्कर भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में सबसे कम वेतन पाने वाले वर्कर हैं।

इतना ही काम करने और शैक्षिक योग्यता वाले वर्करों को अन्य फैक्ट्रियों में अधिक वेतन मिलता है।

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कंपनी ने 2015 में नया मॉडल एस्पायर लॉंच किया, इस मौके पर तत्कालीन गुजरात सीएम आनंदीबेन पटेल भी मौजूद थीं। फ़ोटो साभारः स्मार्टड्राईव
किस फैक्ट्री में कितना वेतन

साणंद के टाटा मोटर्स कारखाने में सैलरी 26,421 रुपये प्रति माह है।

चैन्नई के फ़ोर्ड इंडिया कारखाने में वेतन 40,000 रुपये प्रति माह।

पुणे के जनरल मोटर्स में 41,506 रुपये तनख्वाह मिलती है।

चैन्नई में डेमलर इंडिया प्लांट में 42,000 रुपये प्रति माह।

हरियाणा के मानेसर में स्थित मारुति सुजुकी कार प्लांट में 50,000 रुपये वेतन मिलता है।

जबकि चैन्नई के पास हुंडई मोटर्स इंडिया के प्लांट में 50,000 रुपये वेतन है।

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