डेडलाइन पूरा करने के लिए फ़ैक्ट्री में लगाए 1500 स्कूली बच्चे

दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले चीन में फैक्ट्री में स्कूली बच्चों से मज़दूरी कराने का सनसनीखेज़ मामला प्रकाश में आया है।

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अख़बार गार्डियन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अमेजॉन की एलेक्सा इलेक्ट्रानिक डिवाइस बनाने के डेडलाइन को पूरा करने के लिए डेढ़ हज़ार स्कूली बच्चों को लगा दिया गया।

दुनिया की अग्रणी इलेट्रॉनिक सामानों की निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन ने माना है कि उसने चीन में ग़ैरकानूनी तरीके से अपनी फैक्ट्री में हज़ारों स्कूली बच्चों से काम करा रही थी।

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इस फैक्ट्री में अमेजॉन की एलेक्सा गैजेट बनाया जाता है।

ब्रिटेन के गार्डियन अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, 16 से 18 साल की उम्र के डेढ़ हज़ार छात्रों को डेडलाइन पर काम पूरा करने के लिए लगाया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार हेंगयांग फ़ैक्ट्री में स्कूली बच्चों को इंटर्नशिप के नाम पर रखा गया और उनसे परमानेंट नेचर वाले काम कराए गए।

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जब इस बात का खुलासा हुआ तो फॉक्सकॉन ने ग़लती मानने की बजाय कहा कि बच्चों को इससे बहुत अहम अनुभव मिला है।

लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक अमेजॉन ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

एलेक्सा एक ऐसी डिवाइस है जो घरों में लोग अपने बाकी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

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चीन में बाल श्रम के मामले पहले भी आते रहे हैं लेकिन इतने बड़े पैमाने पर स्कूली बच्चों को फैक्ट्री में लगाने की घटना अभूतपूर्व है।

जबसे दुनिया में मंदी का असर गहराता गया है पूरी दुनिया में श्रम के शोषण के नए नए कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे हैं।

अभी भारत में भी मोदी सरकार ने 44 श्रम कानूनों को ख़त्म कर चार श्रम कोड लागू करने जा रही है जिसमें बाल श्रम को कानूनी बना दिया गया है।

मंदी और अधिक से अधिक मुनाफ़ा कमाने की हवस ने पूरी दुनिया के पूंजीपतियों को मज़दूरों और आम जनता का अधिकाधिक शोषण करने पर अमादा कर दिया है।

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