2267 करोड़ के पीएफ़ घोटाले के ख़िलाफ़ लखनऊ जाम

पीएफ घोटाले से आक्रोशित हज़ारों बिजली कर्मचारियों ने गुरुवार को लखनऊ में प्रदर्शन मार्च निकालकर सड़कें जाम कर दीं।

यूपी पॉवर कारपोरेशन में हुए पीएफ़ घोटाले को लेकर बिजली विभाग के अलग अलग संगठनों ने उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषरद के बैनर तले यूपीपीसीएल कार्यालय और बिजली गेस्ट हाउस पर जबरदस्त प्रदर्शन किया।

कर्मचारियों ने राज्य की बीजेपी सरकार से घोटाले की जांच करने और पीएफ़ भुगतान संबंधी अधिसूचना जारी करने की मांग की।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे।

घोटाले के मुख्य संदिग्ध पूर्व चेयरमैन आलोक कुमार की गिरफ्तारी और
ऊर्जा मंत्री पंडित श्रीकांत शर्मा के इस्तीफे की मांग पर कर्मचारी अड़े हुए हैं।

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योगी सरकार ले ज़िम्मेदारी

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने प्रमुख सचिव एवं पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन अरविंद कुमार ने भुगतान की जिम्मेदारी लेते हुए अधिसूचना जारी करने पर राजी नहीं हुए।

हजारों कर्मचारियों के प्रदर्शन के चलते विधानसभा के पास स्थित शक्ति भवन को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

बताया जाता है कि हाल के दिनों में कर्मचारियों के द्वारा ये सबसे बड़ा प्रदर्शन था।

शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई विधानसभा से होकर जाने वाली सभी सड़कें जाम हो गईं और गाड़ियों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों लग गया।

कर्मचारियों की मांगें

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कर्मचारियों की मांगों का एक ज्ञापन जारी किया जिसमें निम्नलिखित बातें कही गई हैं-

1-उप्र पावर सेक्टर इम्प्लाइज ट्रस्ट एवं उप्र पॉवर कॉरपोरेशन अंशदायी भविष्य निधि ट्रस्ट की जीपीएफ व सीपीएफ की धनराशि के भुगतान का उत्तरदायित्व लेकर उप्र सरकार गजट नोटिफिकेशन जारी करे।

2-घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व चेयरमैन, जो ट्रस्ट के भी चेयरमैन थे, को सेवा से बर्खास्त कर तत्काल गिरफ्तार किया जाये।

3- सरकार द्वारा जारी दो नवम्बर 2019 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बिजली कार्मिकों के सामान्य भविष्य निधि की 2631.20 करोड़ रुपये की धनराशि दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में निवेशित की गयी है, जिसमें से 1185.50 करोड़ रुपये ट्रस्ट कार्यालय को प्राप्त हो चुके हैं जबकि 1445.70 करोड़ रूपये की प्राप्ति अभी भी लंबित है।

4-कार्मिकों के अंशदायी भविष्य निधि की 1491.50 करोड़ रुपये की धनराशि दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में निवेशित की गयी है जिसमें 669.30 करोड़ रुपये ट्रस्ट कार्यालय को प्राप्त हो चुके हैं और 822.20 करोड़ रूपये प्राप्त होना अभी भी लम्बित है।

नियमों को ताक पर रख कर लुटा दिया पीएफ़

5-इस प्रकार 2267.90 करोड़ रुपये (मूलधन) दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से प्राप्त किया जाना लम्बित है।

5. उप्र पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा दो नवम्बर 2019 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार एक गुमनाम शिकायत 10 जुलाई 2019 को मिलने पर उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा 12 जुलाई 2019 को जांच समिति गठित की गयी जिसकी आख्या 29 अगस्त को प्राप्त हुई।

5-समिति ने प़़ड़ताल में पाया कि ‘‘ट्रस्टों द्वारा उन पर लागू गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया जा रहा है और ट्रस्ट फण्ड के निवेश का भी उल्लंघन किया जा रहा है। ट्रस्ट की निधि के 99 प्रतिशत राशि केवल 3 हाउसिंग फाइनेन्स कम्पनियों में निवेशित थे, जिसमें से 65 प्रतिशत से अधिक दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में थे।

6. भारत सरकार के 2 मार्च 2015 के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के विपरीत समग्र विनियोजन के 50 प्रतिशत से अधिक की धनराशि को दीवान हाउसिंग फाइनेन्स लिमिटेड नामक निजी संस्था के सावधि जमा में विनियोजित किया जाना पूर्णतः नियम विरूद्ध था।

कर्मचारियों का पैसा बिल्डर को दे दिया

उल्लेखनीय है कि 99 प्रतिशत से अधिक धनराशि जिन तीनों हाउसिंग कम्पनियों में निवेशित की गयी हैं वे सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की श्रेणी में नहीं आती हैं और पूरी तरह असुरक्षित हैं।

संघर्ष समिति ने कहा है कि उप्र स्टेट पॉवर सेक्टर इम्प्लाइज ट्रस्ट एवं उप्र पावर कारपोरेशन अंशदायी भविष्य निधि ट्रस्ट की जीपीएफ व सीपीएफ की धनराशि के भुगतान का उत्तरदायित्व लेकर उप्र सरकार एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर विद्युत कर्मचारियों के प्राविडेन्ट फण्ड का भुगतान सुनिश्चित करे।

एक श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की गई है कि बिजली कर्मचारियों की जीपीएफ व सीपीएफ की कितनी-कितनी धनराशि का किस-किस संस्था में कितनी-कितनी अवधि के लिए किस-किस स्कीम में निवेश किया गया है। श्वेत पत्र से कर्मचारियों की पीएफ धनराशि की सही तस्वीर सामने आ सकेगी।

संघर्ष समिति ने कहा है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो 18 व 19 नवम्बर 2019 को 48 घंटे का कार्य बहिष्कार करने हेतु बाध्य होगें।

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