एक और कंपनी पर मालिक की टेढ़ी नज़र, बेल सोनिका से निकाले 350 ठेका मज़दूर/ Manesar

गुरुग्राम के मानेसर में बेल सोनिका कंपनी ने अपने 350 से अधिक ठेका मजदूरों को बाहर निकाल दिया है।

मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन ने काम की कमी बता कर ठेके के मजदूरों को बाहर निकाला  है जबकि स्थिति इसके बिल्कुल विपरित है।

यहां तक की स्थाई मजदूरों का हाल भी कुछ अच्छा नहीं है उन्हें भी ये बता के डराया जा रहा है कि ये कंपनी जल्दी बंद होने वाली है।

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कंपनी ने भारी मात्रा में ठेका मजदूरों को दिखाया बाहर का रास्ता

आपको बता दें कि ये बेल सोनिका कंपनी कार निर्माता मारूति के ऑटो पार्ट्स बनाने का काम करती है।

जब मजदूरों ने वहा जाकर काम का जायजा लेने की कोशिश की तो ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे ये पता लगाया जा सके की ये कंपनी खत्म होने की कगार पर हो।

बेल सोनिका मजदूर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी का कहना है कि मारुती कंपनी के मॉडल में कुछ बदलाव चल रहे है।

इस कारण 15-20 दिनों के लिए काम में कमी हो सकती है लेकिन इस का बहाना बना कर कंपनी ने भारी मात्रा में ठेके के मजदूरों को बाहर निकाला है।

कंपनी काम न होने का बहाना बना कर ठेके के मजदूरों को बाहर कर रही है और कुछ एजंसियों से साठ-गाठ कर एफटीई और निम परियोजना के तहत नए मजदूरों की भर्ती कर रही है।

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workers unity
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हर कंपनी मजदूरों के साथ अपना रही है यही रवैया

बेल सोनिका कंपनी मजदूर यूनियन के प्रेसिडेंट, अतुल कुमार ने बताया की केवल इसी कंपनी का ये हाल नहीं है बल्कि पूरे गुड़गांव में इसी तरह के हालात है।

पिछले 1 साल में लगभग 10 से 11 कंपनियां बंद की जा चुकी है, खासकर उन्ही कंपनियों को टारगेट किया जा रहा है जिनमें यूनियन है और जो सक्रिय रहती है।

उनका कहना है कि कंपनी मैंनेजमेंट मजदूरों के खिलाफ प्लानिंग कर के, काम न होने का बहाना कर धीरे-धीरे सभी कंपनियां ऐसा ही कर रही है।

नई योजनाओं के चलते मजदूरों का स्थाई होना मुश्किल

बेल सोनिका कंपनी मजदूर यूनियन के प्रतिनिधि, राजेश का कहना है कि सरकार द्वारा लाई गई, नई-नई परियोजनाओं की वजह से अब मजदूरों को स्थाई होने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

अपको बता दें की गुडगांव औघोगिक इलाके में 2 साल में 12 कंपनियां बंद हुई है।

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हाल ही में मानेसर की एक और ऑटो कंपोनेंट मेकर कंपनी एंड्योरेंस से क़रीब 150 परमानेंट मज़दूरों को निकाल दिया गया। कंपनी में लॉकआउट घोषित कर दिया गया था। फ़ोटोः वर्कर्स यूनिटी

यहां मजदूरों ने संघर्ष के बाद किया था यूनियन का गठन

मजदूरों ने 2014 में मिलकर यूनियन का निर्माण किया था, जिसे शुरुआत में ही बाहर कर दिया गया था।

बाद में मजदूरों ने काफी संघर्ष किया, जिसके बाद कंपनी को यूनियन को मान्यता देनी पड़ी लेकिन धीरे-धीरे मैंनेजमेंट का रवैया मजदूरों के साथ बद से बदतर होने लगा।

मैंनेजमेंट पूरी तरह से यूनियन की अनदेखी कर अपने फैसलें जबरदस्ती मजदूरों पर थोपने का काम कर रही है।

कंपनी पर यूनियन खत्म करने की साजिश रचने का आरोप

मजदूरों का कहना है कि मैंनेजमेट का इस तरह का रवैया देखकर उन्हें यही लगता है कि जैसा मारुति कंपनी में मजदूरों के साथ हुआ, वैसा ही रवैया वो यहां अपना कर कंपनी यूनियन से छुटकारा पाने का रास्ता बना रही है।

मजदूरों की कंपनी से यही मांग है कि मैंनेजमेंट अपने रवैये में सुधार करें, अगर वो ऐसा नहीं करती तो उन्हें मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना होगा।

मजदूरों का कहना है कि अगर उनकी मांगो को नहीं माना गया तो वे 10 मार्च को सभी यूनियनों के साथ मैंनेजमेंट के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।

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