प्रचंड बहुमत प्रचंड हमला, संसद बना श्रम क़ानूनों का कब्रिस्तान-दूसरी किस्त

(मोदी सरकार 44 श्रम क़ानूनों को ख़त्म कर उनकी जगह चार श्रम संहिताएं या लेबर कोड लाने जा रही है। ये हैं मजदूरी संहिता, औद्योगिक सुरक्षा और कल्याण संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और  औद्योगिक संबंध संहिता। इनमें से दो लेबर कोड्स को संसद में पेश भी किया जा चुका है। इसके ख़िलाफ़ ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रीय स्तर पर विरोध करने का फैसला किया है और दो अगस्त को व्यापक धरना प्रदर्शन आयोजित है। संघर्षरत मेहनतकश के संपादक मुकुल नए श्रम क़ानूनों पर लेखों की एक शृंखला लिख रहे हैं, जिसे हम साभार प्रकाशित कर रहे हैं। पढ़िए दूसरी किस्त। सं. )

By मुकुल

ट्रेड यूनियनों और मज़दूरों के भारी विरोध के बीच मोदी-2 सरकार ने वेज कोड बिल और कामर्शियल सेफ़्टी बिल लोकसभा से पारित करा लिया है।

वेज कोड या मज़दूरी संहिता विधेयक पहले 10 अगस्त, 2017 को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे संसद की स्थायी समिति के पास भेजा गया था।

समिति की रिपोर्ट 18 दिसंबर, 2018 को प्रस्तुत हुई थी लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण यह स्थगित रहा। अब प्रचंड बहुमत के बाद मज़दूरी विधेयक, 2019 संहिता (वेज कोड) नाम से विधेयक लाया गया है।

इससे मौजूदा 4 श्रम क़ानून – न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, मज़दूरी भुगतान  अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम और समान मुआवज़ा अधिनियम समाप्त हो जाएंगे।

वेतन संहिता विधेयक में मज़दूरी तय करने के उस फार्मूले को पूरी तरह से बदल दिया है, जिसे 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन में तय किया गया था।

केन्द्रीय श्रम राज्य मंत्री ने 10 जुलाई को 4,628 रुपए प्रति माह (178 रुपये दैनिक) राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन की घोषणा की है।

जबकि सातवें वेतन आयोग ने 1 जनवरी, 2016 से 18000 रुपए प्रतिमाह की अनुशंसा की थी, जो वर्तमान में 22000 रुपये मासिक हो चुकी है।

गौरतलब है कि जुलाई, 2018 में सरकारी पैनल की एक्सपर्ट कमेटी ने महंगाई दर के आधार पर देश में न्यूनतम दैनिक मज़दूरी 375 रुपये करने का सुझाव दिया था।

लेकिन सरकार जो घोषित किया है इससे वेज कोड की धोखाधड़ी साफ़ है।

नए क़ानून में क्या है?

1-इससे कामगार की क्रय शक्ति बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा। यानी मालिकों को सीधे लाभ।

2-तर्क दिया गया है कि विभिन्न श्रम कानूनों में वेतन की 12 परिभाषाएं हैं, जिन्हें लागू करने में कठिनाइयों व मुकदमेबाजी को बढ़ावा मिलता है। इसको सरल बनाया गया है, जिससे मुकदमेबाजी कम हो और एक नियोक्ता के लिए इसके अनुपालन में सरलता हो। यानी न्यूनतम वेतन के लिए क़ानूनी संघर्ष का रास्ता भी बन्द होगा।

3- विधेयक में स्पष्ट लिखा है कि इससे प्रतिष्ठान लाभान्वित होंगे, क्योंकि रजिस्टरों की संख्या, रिटर्न और फॉर्म आदि केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप से भरे जा सकेंगे। यानी यह झंझट भी ख़त्म!

4- पहले न्यूनतम वेतन निर्धारित करने के लिए त्रिपक्षीय प्रणाली थी जिसमें विभिन्न क्षेत्र के मज़दूर प्रतिनिधि, नियोक्ता और सरकार के प्रतिनिधि मिलकर सेण्ट्रल/स्टेट एडवाइज़री बोर्ड में न्यूनतम वेतन निर्धारित करते थे। पर अब मज़दूरों का प्रतिनिधित्व कमज़ोर कर दिया गया है जिससे मज़दूरों की भागीदारी लगभग ख़त्म हो जायेगी।

5-रोजगार के विभिन्न प्रकारों को अलग करके न्यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए एक ही मानदंड बनाया गया है। जो मुख्य रूप से स्थान और कौशल पर आधारित होगा। यानी अलग-अलग प्रकृति और श्रेणियों जैसे अकुशल, अर्धकुशल, कुशल, अतिकुशल खत्म!

6- जीवन सरल बनाने की लफ़्फ़ाजी के साथ कोड में साफ लिखा है कि आराम से व्यापार करने को बढ़ावा देने के लिए वेज कोड लागू किया जा रहा है।

वेज कोड या मज़दूरी संहिता ख़तरनाक क्यों है?

1-वेतन-आयोग या वेतन-पुनरीक्षण आदि खत्म होंगे। एक ‘सलाहकार बोर्ड’ बनेगा जो वेतन तय करेगा।

2-पारिश्रमिक घंटे, दिन या महीने के हिसाब से तय होगा जो, पूरे समय काम के लिए या टुकड़े के काम के लिए मज़दूरी की एक न्यूनतम दर के हिसाब से मिलेगा।

3-टाइम वर्क व पीस रेट पर न्यूनतम मजदूरी तय करने की भी होगी व्यवस्था। मनमाने काम के घंटे तय करने की खुली छूट।

4-एक आम दिन में कुल काम के निर्धारित घण्टे के अतिरिक्त किसी आपातकालीन या पूरक काम, अनिरन्तर रोजगार, तकनीकी कारणों से ड्यूटी खत्म होने से पहले करने वाले काम, प्रकृति की अनियमितता पर निर्भर काम आदि के बहाने ओवर टाइम भुगतान की बाध्यता नहीं होगी।

5-महिलाओं के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में पुरुषों के बराबर वेतन मिलने के लिए कोई तय नियम नहीं है।

6-न्यूनतम वेतन, बोनस, समान वेतन आदि के दावे दाखिल करने को एक समान बनाया गया है। यानी सब धान एक पसेरी!

7-नई कंपनियो के लिए बोनस न देने की 5 साल की सीमा भी खत्म होगी।

8-बोनस या वेतन में धोखाधड़ी पर भी मालिक की गिरफ्तारी का प्रावधन खत्म, क्रिमिनल की जगह सिविल वाद बनेगा।

9-असंतोषजनक काम के बहाने मालिक को वेतन काटने की छूट रहेगी।

10-किसी को भी केवल 2 दिन के नोटिस पर काम से निकाला जा सकेगा।

11- 15 साल तक के बालश्रमिकों को काम पर रखने की छूट होगी।

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