लोकसभा में पेश हुआ मज़दूर विरोधी बिल, हड़ताल होगी मुश्किल निकालना होगा आसान

केंद्र सरकार ने बीते गुरुवार को इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल को लोकसभा में पेश किया।

इसमें औद्योगिक संस्थानों में हड़ताल करने को कठिन बनाने और बर्खास्तगी को सरल करने का प्रवधान है।

विपक्ष द्रारा विधेयक को संसदीय समिति के हवाले किए जाने की मांग के बीच श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने विधेयक पेश किया और कहा, इसमें मज़दूरों के हितों का पूरा ख्याल रखा गया है।

विधेयक में मज़दूरों की एक नई श्रेणी बनाई गई है- फिक्स्ड टर्म एंपमलॉयमेंट, यानी एक नियत अवधि के लिए रोजगार।

इस अवधि के समाप्त होने पर कामगार का रोजगार अपने ऐप खत्म हो जाएगा।

इसके जरिए औद्योगिक संस्थान ठेकेदार की मदद लिए बगैर अब खुद ठेके पर मज़दूरों को रोजगार दे सकेंगे।

इस श्रेणी के कामगारों को तनख्वाह और सुविधाएं नियमित कर्मचारियों जैसी ही मिलेंगी।

कैबिनेट ने इस बिल को 20 नवंबर को मंजूरी दे दी थी।

बिल के मुख्य प्रावधान

नौकरी जाने पर संस्थान में किए गए हर वर्ष काम के लिए 15 दिनों की तनख्वाह का ही मुआवजा मिलेगा।

जबकि इससे पहले 45 दिन का प्रावधन था, निकाले जाने वाले मज़दूरों को पुराने संस्थान के खर्च पर नए कौशल आर्जित करने का मौका मिलेगा।

श्रमिक संघ को मान्यता के लिए 75 प्रतिशत कामगारों का समर्थन जरूरी होगा, जबकि इससे पहले ये सीमा 66 प्रतिशत थी।

इस बिल के अंतर्गत हड़ताल को सामूहिक आकस्मिक हड़ताल माना जाएगा, जिसका नोटिस 14 दिन पहले देना होगा।

गौरतलब है कि इस बिल के कानून बनने पर ट्रेड यूनियन एक्ट 1926, इंडस्ट्रियल डिस्पयूट्स एक्ट 1947 अपने आप खत्म हो जाएंगें।

जबकि सरकार का कहना है कि इस बिल का उद्देश्य भारत में काम करने की सुगमता यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैकिंग बेहतर करना है।

श्रम सुधार का हिस्सा

श्रम सुधारों को तेज करने के लिए श्रम मंत्रालय ने 44 श्रम कानूनों को चार कोर्ट में बांटने का जिम्मा उठाया था – वेतन औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य, सुरक्षा और काम करने की स्थितियां। इनमें से वेतन संबंधी श्रम कोड को संसद ने अगस्त में ही पारित कर दिया था जबकि स्वास्थ्य सुरक्षा और काम करने की स्थितियां संबंधी विधेयक श्रम संबंधी संसदीय समिति के हवाले है।

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विपक्ष ने किया विरोध

आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, टीएमसी के सौगत रॉय और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने बिल पेश किये जाने का विरोध करते हुए इसे श्रम मामलों की संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की।

प्रेमचंद्रन ने कहा, इसमें राज्यों से जरूरी परामर्श नहीं किया गया है। वहीं सौगत रॉय ने कहा, यह श्रमिक विरोधी बिल है, इसके लिए किसी मजदूर संगठन ने कभी मांग नहीं की। सरकार इस बिल को उद्योग संगठन की मांग पर लेकर आई है।

इस पर श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा, इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जो श्रमिक विरोधी हो। यह विधेयक सरकार के चार कानूनों में मजदूरों से संबंधित 44 विधानों को समाहित करके श्रम कानूनों में सुधार की पहल का हिस्सा है।

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One thought on “लोकसभा में पेश हुआ मज़दूर विरोधी बिल, हड़ताल होगी मुश्किल निकालना होगा आसान

  • December 4, 2019 at 5:48 am
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