डॉक्टर के नाम एक मज़दूर की चिट्ठी: बर्तोल्ल ब्रेख़्त

(ये कविता जर्मनी के प्रसिद्ध कवि, नाटककार और नाट्य निर्देशक बर्तोल्त ब्रेख्त  की है। आज के हालात पर इस मौजूं कविता को हम कविता कोश से साभार यहां प्रकाशित कर रहे हैं। अनुवादक का नाम ज्ञात नहीं है। इस कविता के साथ इस्तेमाल किए गए सारे कैरिकेचर प्रतिभावान युवा चित्रकार ध्रुपदी नूर के हैं। ये सारी तस्वीरें प्रतीकात्मक तौर पर इस्तेमाल की गई हैं। हो सकता है कि किसी तस्वीर का विशेष संदर्भ हो, लेकिन उसे यहां मज़दूर वर्ग की व्यापकता के संदर्भ में लिया जाना चाहिए। सं.) 

हमें मालूम है अपनी बीमारी का कारण
वह एक छोटा-सा शब्द है
जिसे सब जानते हैं
पर कहता कोई नहीं।

जब बीमार पड़ते हैं
तो बताया जाता है
सिर्फ़ तुम्हीं (डॉक्टर) हमें बचा सकते हो।
जनता के पैसे से बने
बड़े-बड़े मेडिकल कॉलेजों में
खूब सारा पैसा खर्च करके
दस दस साल तक
डॉक्टरी की पढ़ाई की है तुमने
तब तो तुम
हमें ज़रूर अच्छा कर सकोगे।

painting worker @painting worker @ Dhrupadi Noor
चित्रांकनः ध्रुपदी नूर
क्या सच तुम हमें ठीक
कर सकते हो?
तुम्हारे पास आते हैं जब
बदन पर बचे, चिथड़े खींचकर
कान लगाकर सुनते हो तुम
हमारे नंगे जिस्मों की आवाज़
खोजते हो कारण शरीर के भीतर।पर अगर
एक नज़र शरीर के चिथड़ों पर डालो
तो वे शायद तुम्हें ज़्यादा बता सकेंगे
क्यों घिस-पिट जाते हैं
हमारे शरीर और कपड़े
बस एक ही कारण है दोनों का
वह एक छोटा-सा शब्द है
जिसे सब जानते हैं
पर कहता कोई नहीं।
painting worker @painting worker @ Dhrupadi Noor
चित्रांकनः ध्रुपदी नूर
तुम कहते हो कन्धे का दर्द टीसता है
नमी और सीलन की वजह से
डॉक्टर
तुम्हीं बताओ यह सीलन कहाँ से आई?बहुत ज़्यादा काम
और बहुत कम भोजन ने
दुबला कर दिया है हमें
नुस्खे पर लिखते हो
”और वज़न बढ़ाओ”
यह तो वैसा ही है
दलदली घास से कहो
कि वो थोड़ी सूख जाए।
painting worker @painting worker @ Dhrupadi Noor
चित्रांकनः ध्रुपदी नूर

डॉक्टर
तुम्हारे पास कितना वक़्त है
हम जैसों के लिए?
क्या हमें मालूम नहीं
तुम्हारे घर के एक कालीन की क़ीमत
पाँच हज़ार मरीज़ों से मिली फ़ीस के
बराबर है।

painting worker @painting worker @ Dhrupadi Noor
चित्रांकनः ध्रुपदी नूर
बेशक तुम कहोगे
इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं
हमारे घर की दीवार पर
छायी सीलन भी
यही कहानी दोहराती है।हमें मालूम है अपनी बीमारी का कारण
वह एक छोटा-सा शब्द है
जिसे सब जानते हैं
पर कहता कोई नहीं
वह है ”ग़रीबी”।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

3 thoughts on “डॉक्टर के नाम एक मज़दूर की चिट्ठी: बर्तोल्ल ब्रेख़्त

  • June 17, 2019 at 10:14 am
    Permalink

    ऐसा बिल्कुल नहीं है . मेरे पति भी एक चिकित्सक हैं और मैं जानती हूँ कि मरीज़ों के प्रति उनका devotion क्या है और कितना है . उनका फिक्राना अंदाज़ . उनको अपनी बीमार पत्नी की जितनी चिंता नहीं रहती उतनी मरीज़ों की रहती है . कई-कई बार मरीज़ बहुत गंभीर रहता है तो ये रातभर नहीं सोते . रही पैसे की बात तो मैं अपने पति को देखती हूँ कई बार वो गरीब आदमी से उसकी फ़ीस भी नहीं लेते उनकी माली हालत को देखते हुए इसके अतिरिक्त मैं और भी प्रतिष्ठित डाक्टरों को जानती हूँ जिनके लिये उनका मरीज़ का ठीक होना ज़्यादा मायने रखता है पैसों से. ब्रेख्त की यह कविता कैसे लोगों के लिये सन्दर्भित है नहीं मालूम . लेकिन दुनिया में बहुत अच्छे और दयालू dr. भी हैं . तो मैं इस कविता की पंक्तियों से सहमत नहीं हूँ.

    Reply
  • June 17, 2019 at 11:31 am
    Permalink

    निःसंदेह महान कवि/लेखक/नाटककार ब्रेख्त की कविता बेहतरीन है। डॉक्टर तो प्रतिकात्मक है। किसी डॉक्टर से यह बातें कहने का मतलब किसी खास वर्ग नहीं वरन पूरे समाज के धनी वर्ग से है। जो सम्भवतः पुरातन काल से लेकर आज भी बना हुआ है, वरन और भी भयावह रुप धारण कर चुका है। ब्रेख्त तो हमेशा से साधुवाद के पात्र हैं। ध्रुपदी नूर का अंतिम चित्र के अलावा बाकी चित्र मुझे बिल्कुल भी प्रभावित नहीं कर सके।

    Reply
  • June 18, 2019 at 1:35 am
    Permalink

    My son is a doctor and fully dedicated to the noble profession. He never mind giving extra time for the wellness of patients. It is a different matter that he is a doctor with Government hospital but he never ever charge any fees from the patients whom he treat. He never mind to spend from his pocket for the well being of needy patients. I understand that a few doctors have polluted the profession but still the zeal to serve the humanity is fully live in the doctors’ community

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *