बीएसएनएल में छंटनी की पहली मार ठेका कर्मियों पर, 30% कटौती का फरमान जारी

बीते मार्च में नकदी की कमी से जूझ रही कंपनी बीएसएनएल ने बड़े पैमाने पर छंटनी की अपनी योजना को लोकसभा चुनाव तक के लिए रोक रखा था।

लेकिन चुनाव निबटते ही कंपनी ने अपने सभी सर्किल में ठेका पर काम करने वाले कर्मचारियों में 30% की कटौती का फरमान जारी कर दिया है।

बीएसएनएल कैजुअल एंड कांट्रैक्ट वर्कर्स फ़ेडरेशन के अध्यक्ष वीएएन नम्बूदरी ने कहा कि छंटनी होने वाले वर्करों के बकाया वेतन के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।

समाचार वेबसाइट न्यूज़ क्लिक के अनुसार, कारपोरेट ऑफिस से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि नकदी के संकट से जूझ रही कंपनी अपने ख़र्चों में कटौती करेगी जिसमें आउटसोर्स किये जाने वाले लेबर जॉब भी है।

ट्रेड यूनियन नेता नंबूदरी ने कहा कि कुछ मामलों में प्रबंधन ने पहले ही इस नए फैसले को लागू कर दिया है। केरल के कुछ जिलों में कर्मचारियों को हटा दिया गया था। जबकि अन्य बाकी जगह ठेका कर्मचारियों ने विरोध प्रर्दशन किए।

पहले से ही हटाए जा चुके संविदा कर्मियों को उनका बकाया वेतन तक नहीं मिला है। वहीं पिछले पाँच महीनों से पूरे देश में ठेका कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं दिया गया है।

महीनों से नहीं मिला वेतन

जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे कुछ सर्किल में कर्मचारियों को पिछले 10-11 महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है।

नंबूदरी के अनुसार, ठेका कर्मियों के लिए अधिकत आयु सीमा को भी 60 से घटाकर 58 कर दिया गया है।

इन ठेका कर्मचारियों को आमतौर पर विभिन्न ठेकेदारों के माध्यम से काम पर लगाया जाता है।

हालांकि वे सभी बीएसएनएल से ही मजदूरी और अन्य सेवा लाभ प्राप्त करते हैं, लेकिन जब कंपनी संकट में है पहली मार उन पर पड़ रही है।

जब ठेकेदारों ने बीएसएनल प्रंबधक से बकाया राशि की मांग की तो उन्होंने कहा कि वित्तीय संकट के कारण उनके पास पैसा नहीं है।

प्रबंधन ने लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड एक्सचेंजों पर की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

बीएसएनएल को केंद्र सरकार की मदद के बिना अन्य निजी दूरसंचार कंपनियों के मुकाबले चलाना मुश्किल है।

4 जी स्पेक्ट्रम का छलावा

आपको बता दें कि इस साल मार्च में बीएसएनएल लगभग 1.68 लाख नियमित कर्मचारियों का वेतन नहीं दे पाई थी।

हांलाकि एक महीने बाद सरकार के हस्तक्षेप के बाद इस समस्या का हल किया गया था।

हाल ही में संचार और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बीएसएनएल और एमटीएनएल को अधिक पेशेवर होना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ ट्रेड यूनियनों और मजदूरों का आरोप है कि पिछले दस सालों में बीएसएनएल को विकसित करने की अनुमति नहीं थी।

जनवरी 2018 में संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने सभी ट्रेड यूनियनों और भारत संचार निगम लिमिटेड की एसोसिएशनों को आश्वासन देते हुए कहा था कि बीएसएनएल को 4 जी स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा।

हालांकि कंपनी को अभी भी 4 जी स्पेक्ट्रम आवंटित नहीं किया गया है और अब तो इसके बेचे जाने की तैयारी भी शुरू हो गई है।

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