विज्ञान की बुनियाद पर समझें, कोरोना महामारी से मजदूरों को कितना डरना चाहिए- अंतिम भाग

विज्ञान की बुनियाद पर समझें, कोरोना महामारी से मजदूरों को कितना डरना चाहिए- अंतिम भाग

By आशीष सक्सेना

महामारी विशेषज्ञ जेन हैल्टन कहती हैं कि फिलहाल हमारे पर क्या उपाय हैं और उनमें से क्या बेहतर है, इसको चुनना चाहिए। ये तो साफ है कि संक्रमित लोग छूत की तरह जोखिम पैदा कर सकते हैं। प्रत्येक वाहक से संक्रमित लोगों की संख्या एक से ज्यादा है तो प्रकोप बढ़ता जाएगा।

इसको रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के उपाय पर जोर है। जिसमें सामूहिक सभाओं को रोकना, सीमाओं को बंद करना, लोगों को डेढ़ मीटर दूरी बनाए रखने की सलाह, घरों में रहना आदि है।

इस तरीके में ये समस्या है कि जनता बड़ी संख्या में प्रतिरक्षा हासिल नहीं करती है और जैसे ही नियंत्रण हटा लिया जाता है तो वायरस तेजी से संक्रमित करता है।

दूसरा तरीका है सामूहिक प्रतिरोधकता। इसका मतलब है, कोविड-19 से उबरने वाले लोग एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा विकसित करते हैं। जैसे-जैसे वायरस आबादी में फैलता है, उससे और अधिक लोग प्रतिरक्षा विकसित करते हैं। फिर कम लोग बचते हैं जो वायरस संक्रमण कर सकते हैं। यदि पर्याप्त लोगों को प्रतिरक्षा है तो प्रकोप दूर हो जाएगा।

यह अनुमान है कि वायरस की चपेट में आने वाले लगभग 30 प्रतिशत लोगों में लक्षण नहीं दिखेंगे और कई अन्य के लक्षण गंभीर नहीं होंगे। इस विधि से कई बार स्वास्थ्य प्रणाली लोड हो जाता है, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में मौतें हो जाती है।

तीसरा चारा टीका है। ये प्रकोप को नियंत्रित करने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है। फिलहाल तक टीका नहीं है, जिसको लेकर कोई निश्चित बात ही नहीं की जा सकती। उचित परीक्षण से गुजारे बगैर टीका लगने से दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

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ashish saxena