नीमरानाः ट्योडा गोसाई यूनियन पर लगा 6 साल पुराना स्टे ख़ारिज़, डाईकिन मज़दूर रिहा

बुधवार को राजस्थान के नीमराना औद्योगिक बेल्ट के मज़दूरों ने दोहरी जीत की खुशी मनाई।

बीती फ़रवरी से ही जेल में बंद डाईकिन एयर कंडिशनिंग यूनियन के प्रतिनिधियों समेत 18 मज़दूर बुधवार ज़मानत पर रिहा हो गए।

दूसरी तरफ़ ट्योडा गोसाई के मज़दूरों को यूनियन बनाने पर छह साल से लगा स्टे बुधवार को ख़ारिज हो गया।

2012 से ही यूनियन बनाने की मांग को लेकर ट्योडा गोसाई के मज़दूर संघर्ष कर रहे थे।

डाईकिन यूनियन के संघर्ष में साथ देने वाले ट्योडा गोसाई के श्रमिक नेता अनिल राव ने इसकी पुष्टि की है।

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ट्योडा गोसाई को भारत के मिंडा समूह ने खरीद लिया था। फ़ोटोः ट्योगा गोसाई
2012 से चल रही है यूनियन बनाने लड़ाई

अनिल राव ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि 2012 में यूनियन का रजिस्ट्रेशन आने के बावजूद मैनेजमेंट इसे कोर्ट से ख़ारिज कराने में सफल हो गया था।

उस समय अनिल राव यूनियन के प्रधान थे और यूनियन बॉडी में 7 अन्य मज़दूर थे।

वो कहते हैं कि उन्हें छोड़ बॉडी के अन्य सभी सदस्य मैनेजमेंट की साजिशों के शिकार हो गए और रजिस्ट्रेशन भी खारिज हो गया।

यूनियन ने कंपनी के गेट पर झंडा लगाने की कोशिश भी की थी।

उस समय कंपनी में करीब 650 मज़दूर काम कर रहे थे जिन्हें धीरे धीरे निकाल दिया गया।

2013 में मज़दूरों ने फिर से कमेटी बनाई और नरेश कुमार सैनी को अध्यक्ष बनाया और यूनियन बनाने की अपील दायर की।

मैनेजमेंट यूनियन बनाए जाने के ख़िलाफ़ कोर्ट चला गया और उसे स्टे मिल गया।

neemrana protests @workersunity

छह साल तक लगा रहा स्टे

छह साल तक यूनियन पर स्टे लगा रहा और निकाले गए मज़दूर बेरोज़गार होकर भी लड़ाई लड़ते रहे।

अनिल बताते हैं कि इस संघर्ष के दौरान सभी मज़दूरों को निकाल दिया गया और अभी जो 450 मज़दूर काम करते हैं, वो सभी नए हैं।

वो कहते हैं कि ये मज़दूरों के धैर्य और लगातार लड़ाई के मैदान में बने रहने का फल है।

कोर्ट के आदेश के बाद यूनियन रजिस्ट्रेशन का रास्ता साफ हो गया है और मज़दूर अगली रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

इसी तरह डाईकिन एयर कंडिशनिंग में भी 2013 से ही यूनियन बनाए जाने की लड़ाई चल रही है।

जिसका नतीजा रहा कि जिस जिस ने यूनियन की अगुवाई करने की कोशिश की उसे कंपनी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया।

डाईकिन में मिली सफलता

फिर मज़दूर डटे रहे और पिछले सितम्बर में तीन बार की कोशिश के बाद यूनियन पंजीकृत करवाने में सफल रहे।

लेकिन मैनेजमेंट इसे मान्यता देने से कतरा रहा है। गेट पर झंडा लगाने को लेकर कई बार संघर्ष की स्थिति पैदा हुई।

8 जनवरी को आम हड़ताल के समर्थन में निकाली गई रैली में डाईकिन गेट पर झंडा लगाने की कोशिश होने पर लाठी चार्ज हुआ था।

सैकड़ों मज़दूर घायल हुए और सैकड़ों पर एफ़आईआर दर्ज किया गया, जिनमें 17 पहले और बाद में 18 मज़दूरों को जेल भेजा गया था।

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