तेजस एक्सप्रेस पहली प्राइवेट ट्रेन है जो हजारों बेरोजगारों की छाती पर से दौड़ने वाली है

दिल्ली और लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस देश की पहली प्राइवेट ट्रेन होगी। जिसे रेलवे को निजीकरण की तरफ पहला कदम माना जा रहा है।

 रेलवे निजीकरण से कई प्रश्न खड़े होते है

गिरीश मालवीय का कहना है की दिल्ली और लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस वो पहली प्राइवेट ट्रेन है उन हजारों बेरोजगारो की छाती पर से दौड़ने वाली है।

जो सरकारी रेलवे में नोकरी का सपना संजोए बैठे हुए।

वो कहते है की इंडियन रेलवे कोई छोटी मोटी संस्था नही है।

भारतीय रेलवे  12,000 से अधिक ट्रेनों का संचालन करता है।

जिसमें 2 करोड़ 30 लाख यात्री रोज यात्रा करते हैं. भारतीय रेल लगभग एक ‘ऑस्ट्रेलिया’ को रोज़ ढोती है।

रेलवे में करीब 17 लाख कर्मचारी काम करते हैं और इस लिहाज से यह दुनिया का सातवां सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला संस्थान है।

इस लिहाज से इसका निजीकरण किया जाना ऐसे प्रश्न खड़े करता है जिस पर तुरंत ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

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कॉरपोरेटीकरण पर आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रही है सरकार

यदि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में निजीकरण की तरफ बढ़ने की गति 1,2,3,4,5,6,7 थी।

तो अब मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह गति 2,4,8,16,32,64,128,256, की तरह होने वाली है।

केंद्र सरकार ने तमाम विरोधो दरकिनारा करके आखिरकार रेलवे के निजीकरण को दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से आगे बढ़ा रहे है ।

सरकार रेलवे के कॉरपोरेटीकरण और निजीकरण पर ‘आक्रामक तरीके से’ आगे बढ़ना चाहती है।

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रेलवे कर्मचारियों ने पुरजोर तरीके से विरोध

गिरीश मालवीय ने बताया की  जून 2015 को प्रस्तुत बिबेक देबरॉय समिति की रिपोर्ट में रेलवे के निगमीकरण की सिफारिश की गयी थी और कहा गया था, कि रेल मंत्रालय को सिर्फ नीतियां बनाने का काम करना चाहिये।

जबकि निजी खिलाड़ियों को यात्री व माल ढोने आदि की सेवा प्रदान करनी चाहिये।

कमिटी की सिफ़ारिशों में तर्क दिया गया कि ब्रिटेन की तरह ट्रेन संचालन के काम को पटरियों से अलग कर देना चाहिए।

समिति की सिफारिशों का  रेलवे कर्मचारियों ने पुरजोर तरीके से विरोध किया।

सोनिया गांधी ने रेलवे के निजीकरण पर उठाए सवाल, कहा हज़ारों कर्मचारियों का भविष्य ख़तरे में

पीएम मोदी ने अपना वादा तोड़ा

पीएम मोदी ने साल 2015 में वाराणसी के डीजल लोको वर्क्स के मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा था कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा।

लेकिन जैसे ही मोदी सरकार दुबारा चुनकर आयी।

उसने सबसे पहला जो काम किया वह यह था,कि तेज गति से रेलवे के निजीकरण ओर निगमीकरण की ओर आगे बढ़ा जाए।

रेलवे बोर्ड से एक एक्शन प्लान- 100 तैयार करने को कहा गया है।

जिस पर 100 दिन के भीतर ही कार्रवाई करने के आदेश दिए गए है।

इसके तहत आइआरसीटीसी को लखनऊ से दिल्ली सहित दो रूटों पर निजी क्षेत्र की मदद से प्रीमियम ट्रेन चलाने और रेल कोच फैक्ट्री रायबरेली, कपूरथला सहित सभी प्रोडक्शन यूनिटों का निगमीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

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जनता को ये बाते जानना जरुरी

लेकिन रेलवे के निजीकरण करने में जो सबसे महत्वपूर्ण बात है उसकी तरफ किसी का ध्यान नही है।

कोई भी प्राइवेट ऑपरेटर घाटे वाले ट्रेक पर गाड़ियां नही दोड़ाएगा वो उसी ट्रेक पर ऑपरेट करेगा जो जेब भरे पर्यटकों के रूट हो यानी निजी पूंजीपति सिर्फ रेलवे के मुनाफ़ेदार रास्तों में ही रुचि रखेंगे।

जो माल ढोने में या बुलेट रेलगाड़ियों जैसी अमीरों के लिये सेवा में होगा।

भारतीय रेल के पास सिर्फ घाटे में चलने वाले रेलमार्ग बचेंगे।

जिसमें करोड़ों लोग कम भाड़े में अमानवीय परिस्थिति में यात्रा करेंगे।

गिरीश मालवीय आगे कहते है की समझने वाली बात ये है की,यही मोदी सरकार की योजना है।

जिन रेल कोच फैक्टरियों का निगमीकरण किया जा रहा है वह लगातार मुनाफा कमा रही थी ।

यह निगमीकरण और निजीकरण रेलवे को पूरी तरह से बर्बाद कर देगा यह तथ्य हम जितना जल्दी समझ ले उतना अच्छा है।

  (गिरीश मालवीय वाल से आभार के साथ) 

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2 thoughts on “तेजस एक्सप्रेस पहली प्राइवेट ट्रेन है जो हजारों बेरोजगारों की छाती पर से दौड़ने वाली है

  • July 10, 2019 at 1:10 pm
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    इस पूरे लेख में इसके हेडिंग वाली बात कही भी नहीं है। रेलवे का निजी करण बेरोजगारी से कैसे जुड़ता है।

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  • July 12, 2019 at 3:01 am
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    भारत देश निरंतर पूंजीपतियों के हाथ में बढ़ता जा रहा है और निजी करण से मुनाफाखोरी बढ़ेगी और नेताओं को फायदा होगा जो इनके दलाली भत्ता दिया जाएगा हजारों लाखों बेरोजगार नौजवान सड़कों पर पकौड़ा बेचने का काम करेंगे और हिना की डिग्रियां रोटी सेकने के काम आएगी हॉट सरकारी लाल बत्ती ओं में घूमने वाले अफसरों की मनमानी के खिलाफ जनता परेशान होती रहेगी इंकलाबी नौजवान सभा जिला कमेटी भाकपा माले आप से अनुरोध करती है या तमाम छात्र नौजवान एकत्रित होकर इस तेजस ऑपरेशन को पूरे भारत में बंद करने का एकत्रित कर संगठित होकर विश्व के मानचित्र पर अपनी छाप छोड़े इंकलाब जिंदाबाद

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