Exclusive Interview… कंपनी के गुंडों और पुलिस के बीच से सफलता खींच लाने वाला शख़्स लिंगराज आज़ाद

ओडिशा के नियमगिरी पर्वतों में रहने वाले डोंगरिया और कोंध आदिवासियों के संघर्ष का समर्थन करने वाले प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता लिंगराज आज़ाद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

उन पर लांजीगढ़ थाने में आर्म्स एक्ट समेत दर्जनों मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

ये गिरफ़्तारी 11 मार्च को भुवनेश्वर में आदिवासियों के एक मोर्चा निकाले जाने से पहले की गई है।

जबसे लिंगराज आज़ाद नियमगिरी आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने की शुरुआत की तभी से वो कंपनी के गुंडों और पुलिस के निशाने पर रहे।

गिरफ़्तारियां, जानलेवा हमले

इस संबंध में उनकी पहली गिरफ़्तारी 2003 में हुई थी जिसमें वो एक महीने के लिए जेल में रहे।

उनपर कई दफ़े जानलेवा हमले भी हुए और उनके कई समर्थकों को जान से मार दिया गया या जानलेवा हमले किए गए।

3 साल पहले ओडिशा में उनके घर पर इस आंदोलन के बारे में संदीप राउज़ी ने उनका लंबा साक्षात्कार लिया था।

इसमें ही उन्होंने बताया कि आंदोलन में हथियारबंद संघर्ष को लेकर काफ़ी दबाव था फिर भी अहिंसक तरीके से आंदोलन चलाने को लेकर वो दृढ़ प्रतिज्ञ थे।

पुलिसिया अत्याचार, कंपनी के गुंडों के हमलों और आंदोलन में माओवादियों की सक्रियता के बीच उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन को आगे बढ़ाया।

साक्षात्कारकर्ताः संदीप राउज़ी

कैमरा- नीरा जलक्षत्रि

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