अमरीकी कार कंपनी फ़ोर्ड 7,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी

दुनिया की अग्रणी अमेरिकी कार निर्माता कंपनी फ़ोर्ड पूरी दुनिया में 7,000 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है।

तमाम देशों में इस कंपनी में करने वालों की संख्या क़रीब 70,000 है और इसमें अगस्त तक 10% की छंटनी होगी।

कंपनी ने सोमवार को कहा कि वह बड़े पैमाने पर पुनर्गठन कर रही है और अगस्त तक हजारों कर्मचारियों की नौकरियां समाप्त हो जाएंगी।

फ़ोर्ड के अनुसार, इस छंटनी से उसे सालाना 60 करोड़ ड़ॉलर की बचत होगी। कंपनी के इस कदम से सबसे अधिक जर्मनी और अमरीका के मज़दूर प्रभावित होंगे।

अमेरिका में करीब 2,300 कर्मचारी बेरोज़गार हो जाएंगे। यहां 1,500 कर्मचारियों की छंटनी पहले ही की जा चुकी है। करीब 500 कर्मचारियों की छंटनी इसी सप्ताह होगी।

कर्मचारियों को दिये नोटिस में सीईओ जिम हैकेट ने कहा कि पुनर्गठन का चौथा चरण मंगलवार को शुरू होगा। कुछ लोग इसे वैश्विक मंदी का शुरुआती संकेत भी कह रहे हैं।

ford michigan @Bill McGuire

जर्मनी होगा सबसे अधिक प्रभावित

कंपनी इस संबंध में 24 मई तक प्रक्रिया को पूरा करने को कहा है। इससे ब्रिटेन में 550 कर्मचारियों की नौकरी जाएगी।

इस साल की शुरुआत में कंपनी ने यूरोप में काफ़ी काम समेट लिया है।

माना जा रहा है कि इलेक्ट्रिक कार बनाने की ओर कंपनी अपना ध्यान केंद्रित करना चाहती है।

इस साल की शुरुआत में कंपनी ने यूरोप के प्लांटों में अपनी कम बिकने वाली कारों की असेंबली लाइन बंद करने की घोषणा की थी।

रूस से पहले ही कंपनी अपना बोरिया बिस्तर बांधने का मन बना लिया है।

इस छंटनी से सबसे अधिक जर्मनी प्रभावित होने जा रहा है जहां कैजुअल, टेंपरेरी और परमानेंट वर्करों की संख्या 5,000 है।

ford car maker plant @BBC

अंतरराष्ट्रीय श्रम कानूनों की अनदेखी

कंपनी ने कहा है कि इस छंटनी से ब्रेक्सिट (यूरोपीय संघ और ब्रिटेन का अलग होना) से कोई संबंध नहीं है।

लेकिन इतना ज़रूर कहा है कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के बीच कोई समझौता न होने से स्थितियां बदतर हो सकती हैं।

कंपनी ने अभी ये नहीं बताया है कि छंटनी के दौरान वो वर्करों को उनका बकाया राशि, मुआवज़ा, अन्य सामाजिक सुरक्षा के मद में हर्ज़ाना देगी या नहीं।

पूरी दुनिया के स्तर पर एक नामी अमरीकी कंपनी का इस तरह दो दिन पहले नोटिस जारी कर छंटनी की घोषणा करना अंतरराष्ट्रीय श्रम क़ानूनों का उल्लंघन है।

लेकिन उड़ंतू पूंजी के दौर में अब मज़दूरों के हायर एंड फ़ायर के लिए कंपनियां आज़ाद हो गई हैं।

कमज़ोर मज़दूर आंदोलन का फ़ायदा उठा रही है कंपनी

पूंजी की अकूत ताक़त के सामने सिर्फ़ मज़दूर वर्ग की एकता ही वो ताक़त है जो मुकाबला करने का दम रखती है।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो छोड़ दिया जाए, राष्ट्रीय या एक इलाक़े में मज़दूर वर्ग में एकता का पूरा अभाव दिखता है।

पूंजी के मनमाना रवैये पर एक तगड़ा मज़दू आंदोलन ही अंकुश डाल सकता है।

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