ठीक होली के दिन घड़ी बनाने वाली कंपनी एचएमटी में तालाबंदी

उत्तराखंड के हल्द्वानी में रानीबाग स्थित घड़ी बनाने वाली कंपनी एचएमटी  (हिंदुस्तान मशीन टूल्स) पर होली की आधी रात ताला लग गया।

होली मनाने के बाद शनिवार सुबह ड्यूटी के लिए पहुंचे कर्मचारी गेट पर सील लगे ताले देख दंग रह गए।

गेट पर फैक्ट्री क्लोजर का नोटिस चस्पा लगा मिला। कर्मचारियों ने फैक्ट्री बंदी को नियम विरुद्ध व अव्यवहारिक करार दिया है।

1985 में शुरू हुई इस फैक्ट्री में पिछले दो दशक में छंटनी और वीआरएस के बाद 146 कर्मचारी बच गए थे।

कर्मचारी नेता भगवान सिंह के मुताबिक, 146 में से 3 मज़दूरों की इलाज़ के अभाव में पहले ही मौत हो चुकी है।

उत्तराखंडः माइक्रोमैक्स में छंटनी, 303 परमानेंट वर्करों को मैनेजमेंट ने निकाला, यूनियन बनाने की कोशिश में थे मज़दूर

hmt ranibagh workersunity
तालाबंदी से आक्रोशित मज़दूर फैक्ट्री गेट पर ही बैठे। फ़ोटो साभारः दैनिक जागरण
मोदी सरकार ने 2016 में की थी बंदी की घोषणा

नोटिस में कहा गया है कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय 17 नंवबर 2016 को फैक्ट्री बंदी का आदेश दे चुका है।

उस समय फैक्ट्री में 512 कर्मचारी कार्यरत थे। और ये फैक्ट्री 91 एकड़ में फैली है, जिसमें आवासीय कालोनी भी है।

कुछ कर्मचारियों ने वीआरएस नहीं लिया और फैक्ट्री बंदी को नियम विरुद्ध बता हाईकोर्ट चले गए।

हाईकोर्ट ने 8 दिसंबर 2016 के लॉक आउट पर स्टे लगा दिया था।

18 मार्च 2019 को जस्टिस लोकपाल सिंह की एकल पीठ ने स्टे के आदेश को निरस्त कर दिया।

प्रबंधन ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए फैक्ट्री क्लोजर की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है।

इस घटना से मज़दूरों में भारी गुस्सा है।

ये भी पढ़ेंः ‘पेंशन हमारे बुढ़ापे की दवाई, बच्चों की पढ़ाई और हमारी बहनों के लिए रक्षाबंधन की बधाई है मोदी जी!’

hmt notice workersunity
143 कर्मचारियों की सेवाएं ख़त्म किए जाने का नोटिस में ज़िक्र है। फ़ोटो साभारः दैनिक जागरण
बंद करने की साजिश!

उत्तराखंड में मज़दूरों के बीच काम करने वाले ट्रेड यूनियन एक्टिविस्ट बताते हैं कि इसे बंद करने की साजिश पुरानी है।

उनके अनुसार, सन् 2000 के बाद फैक्ट्री की घड़ियों की सरकारी ख़रीद को बंद कर दिया गया।

दूसरा झटका तब लगा जब कच्चा माल बैंगलोर यूनिट से मंगाया जाने लगा, जिसमें देरी होती थी।

मुकुल के अनुसार, धीरे धीरे फैक्ट्री घाटे में जाने लगी और पिछले दो दशक में वीआरएस दे दे कर मज़दूरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

मज़दूरों की संख्या कम होने के साथ ही आंदोलन भी मंद पड़ गया।

हाईकोर्ट में जाना मज़दूरों की आखिरी कोशिश थी, वो भी उम्मीद जाती रही।

ये भी पढ़ेंः इएसआई घोटालाः पहली बार किसी उद्योगपति पर एफ़आईआर दर्ज, कपिल गुप्ता की मुसीबतें बढ़ीं

लॉक आउट की मार

ये पहली घटना नहीं है कि ऐन त्योहार पर मैनेजमेंट ने बंदी का नोटिस चिपकाया है।

हरियाणा के गुड़गांव में भी कई फैक्ट्रियों को त्योहार के मौके का फायदा उठाकर लॉक आउट कर दिया गया।

अभी हाल ही में सरकार द्वारा तैयार किए गए रोज़गार के आंकड़े मीडिया में प्रकाशित हुए।

इसमें कहा गया है कि पिछले छह सालों में देश भर में क़रीब दो करोड़ रोज़गार कम हुए हैं।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *