इंकलाबी मजदूर केंद्र का पांचवा सम्मेलन संपन्न

इंकलाबी मजदूर केंद्र का पांचवा सम्मेलन 31 अगस्त व 1 सितंबर 2019 को गुड़गांव स्थित अग्रवाल धर्मशाला में संपन्न हुआ।

सम्मेलन में राजनैतिक सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत हुआ जिस पर चर्चा हुई। साथ ही समसामयिक मुद्दों पर कई प्रस्ताव पारित हुए।

मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों को चार नियमावालियों में समेट कर मजदूर अधिकारों पर हो रहे हमले की मुखालफत हुई। मोदी सरकार के कार्यकाल में राज्य और राज्य समर्थित बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच, गौ रक्षा आदि द्वारा हो रहे हमलों की निंदा की गई।

जम्मू कश्मीर की जनता के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात और गैर जनवादी तरीके से धारा 370 को निष्प्रभावी बनाने की भर्त्सना हुई।

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कार्यक्रम की शुरुआत 31 अगस्त को इंकलाबी मज़दूर केंद्र के अध्यक्ष कैलास भट्ट के द्वारा झंडारोहण से हुई।

कैलास भट्ट ने कहा कि आज देश का मज़दूर वर्ग विकट स्थिति से गुजर रहा है. डेढ़ सौ सालों के संघर्षों से अर्जित मज़दूरों के श्रम अधिकारों को देशी विदेशी पूंजी के हित में पूर्णतः निष्प्रभावी बनाने के प्रयास तेज़ हो गए हैं। देश में साम्प्रदायिक ताकतों ने मोदी सरकार के दौर  में दलितों, अल्पसंख्यकों और न्यायप्रिय जनवादी लोगों के खिलाफ़ हमले तेज़ कर दिए हैं। देश में फासीवाद का ख़तरा पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। संकटग्रस्त पूंजीवाद फासीवादी तत्वों को आगे बढ़ा रहा है। मज़दूरों के आअधिकारों की रक्षा और फासीवादी ख़तरे के खिलाफ़ मज़दूर मेहनतशों की व्यापक गोलबंदी आज के दौर की प्रमुख चुनौतियां हैं।

उन्होंने कहा कि मज़दूरों की मुक्ति पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था को ख़त्म कर समाजवाद की स्थापना में ही निहित है और इस ऐतिहासिक मिशन को आगे बढ़ाने के लिए मज़दूर वर्ग को आगे आना होगा।

हिंदू फासीवाद के आसन्न खतरे के प्रति सम्मेलन में आगाह किया गया। महिलाओं के प्रति बढ़ते यौन हिंसा निजीकरण आदि के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुए।

सम्मेलन ने देश-विदेश में मज़दूर संघर्षों को आगे बढ़ाने को मजबूती देने पर बल दिया। मजदूर मेहनतकश जनता के न्यायपूर्ण संघर्षों को आगे बढ़ाते हुए शहीद हुए मजदूर साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

साथ ही मजदूर आंदोलन में क्रांतिकारी व सशक्त विकल्प खड़ा करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की बात हुई।

श्रम कानूनों में संशोधन, निजीकरण, सांप्रदायिक फासीवाद व धारा 370 खत्म करने के विरोध सहित कई प्रस्ताव पारित किए गए।

सम्मेलन के दूसरे दिन केंद्रीय परिषद का चुनाव हुआ जिसमें 10 सदस्यों की केंद्रीय कमेटी गठित हुई।

(संघर्षरत मेहनतकश के इनपुट के साथ।)

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