जेएनयू में 500 सिक्योरिटी गार्ड्स की जगह अब 270 पूर्व सैनिकों की भर्ती

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में 500 सिक्योरिटी गार्ड्स को अचानक हटा दिया गया है।

इनमे कई 10-10 साल से वहां काम कर रहे थे। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि इन प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स की जगह अब रिटायर्ड पूर्व सैनिक भर्ती होगें और कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था उनके हाथ में होगी।

इस फैसले को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों से कुछ भी सुनने से इंकार कर दिया है।

विश्वविघालय ने ये स्पष्ट कर दिया है कि अब कैंपस में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स की जगह 270 पूर्व सैनिकों को कैंपस की सुरक्षा में तैनात किया जाएगा।

इनमें से कई सिक्योरिटी गार्ड्स 10 साल से ज्यादा समय से यहां काम कर रहे थे लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन द्रारा उन्हें 18 सितंबर को ही काम छोड़ने के लिए कह दिया गया।

सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखते हुए किया बदलाव

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बारे में ‘द प्रिंट’ को बताया कि यहां परिवर्तन सिर्फ सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार के अनुसार, उन्होंने एक निजी सुरक्षा फर्म के साथ विश्वविघालय की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड्स को हायर किया था जिसकी समय सीमा समाप्त होने के बाद जेएनयू की सुरक्षा वय्वस्था आर्मी वेलफेयर प्लेसमेंट ऑर्गनाइजेशन (AWPO) देने का फैसला किया है।

AWPO भारतीय सेना का एक कल्याणकारी संगठन है जिसे 1999 में उपयुक्त नौकरी पाने के लिए सेवानिवृत्त या सेवानिवृत्त कर्मियों की सहायता के लिए स्थापित किया गया था। निजी फर्मों के लिए सुरक्षा गार्ड के रूप में सेवानिवृत्त सेना कर्मियों को नियुक्त करना आम है

क्योंकि वे पहले से ही भीड़ नियंत्रण में प्रशिक्षित होते हैं और आपातकालीन स्थितियों पर प्रतिक्रिया करते हैं। कुमार ने कहा, ‘हमने अंतिम कंपनी के साथ अनुबंध के बाद पूर्व सेवा कर्मियों को सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया।’

भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक जेएनयू में छात्रों को मुफ्त भाषण की एक मजबूत संस्कृति के लिए जाना जाता है, हालांकि, डर है कि यह असंतोष और प्रदर्शनों पर अंकुश लगाने का प्रयास हो सकता है।

गोपनीय तरीके से लिया फैसला

जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष आइश घोष ने कहा, “भर्ती बहुत गोपनीय तरीके से हुई। प्रशासन जानता है कि कार्यकर्ताओं, गार्डों और छात्रों के बीच किसी तरह की एकजुटता है, जो प्रशासन को पसंद नहीं है।” जेएनयूएसयू)। “यह सोचता है कि एक गार्ड का काम केवल लोगों को मारना और आवाज़ों को प्रतिबंधित करना है।

घोष ने यह भी सवाल किया कि परिसर के लिए सुरक्षा बल को अचानक क्यों रोक दिया गया था। “गार्ड की एक छोटी संख्या … का मतलब है कि हॉस्टल और लाइब्रेरी जैसी बहुत सी जगहों को मानव रहित किया जाएगा,”

जेएनयू कि एक और छात्रा सलोनी पांडे ने कहा कि वह इस बात को लेकर आशंकित थीं कि पूर्व सेवा कर्मी विश्वविद्यालय के माहौल में कैसे फिट होंगे। “हमने कुछ गार्डों से बात की है और उन्होंने हमें बताया कि यह इस तरह से सेट-अप में उनकी पहली पोस्टिंग थी। उन्हें और हमें इस व्यवस्था के लिए इस्तेमाल होने में समय लगेगा।

इस बीच, श्रम अधिकार कर्यकर्ताओं का कहना को ये आशंका है कि जेएनयू के अन्य कर्मचारियों को भी बदला जा सकता है। इसके साथ ही कैंपस में पूर्व सैनिकों के आने से छात्रों में चिंता का महौल भी है।

प्रशासन के फैसले से छात्रों में डर

उनका कहना है कि पूर्व सैनिक अच्छे गार्ड साबित होते हैं और छात्रों को ये डर है कि अब ये उनके मन में डर पैदा करेंगे और और विरोध प्रदर्शनों को प्रतिबंधित कर सकें, ”अखिल भारतीय केंद्रीय व्यापार संघ (AICCTU) के महासचिव अभिषेक सिंह, जिन्होंने पूर्व सुरक्षा गार्ड फाइल में मदद की है उनकी बर्खास्तगी के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका भी लगाई गई है।

जेएनयू के पूर्व छात्र, सिंह,  का कहना है कि, “लोगों को प्रतिस्थापित करना जेएनयू में कभी नहीं हुआ। ठेके खत्म हो गए हैं लेकिन लोग वही हैं। इस कदम के साथ, विश्वविद्यालय ने एक नया चलन शुरू किया है और हमें डर है कि इससे और अधिक नौकरी का नुकसान होगा। ”

जिन सुरक्षा गार्ड्स को नौकरी से निकाल दिया गया था उन्होंने सितंबर में प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायलय का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद जेएनयू को इन में से 11 गार्ड्स को वापस बहाल करने को कहा गया।

लेकिन इन गार्ड्स का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील गुंजन सिंह का कहना है कि, जो वापस बहाल किए गए उन्हें केवल औपचारिकता के रूप में नियोजित किया गया है।

केवल रजिस्टर पर हस्ताक्षर करते हैं और कोई वास्तविक काम नहीं करते हैं। ऐसा लगता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसा कर रहा है ताकि वे उन्हें बिना काम का हवाला देते हुए फिर से बर्खास्त कर सकें।

उनकी याचिका के अनुसार ये बात भी सामने आती है की जो 500 सुरक्षा गार्ड्स यहां पिछले 5 से 10 सालों से काम कर रहे थें, उन्हें यूनिवर्सिटी प्रशासन द्रारा समाप्ति पत्र भी प्रदान नहीं किया गया। केवल यहां बता कर नौकरी से हटा दिया गया कि अब आने की जरूरत नहीं है।

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