मोदी का तोहफ़ाः ईएसआई में अंशदान घटा 4% किया, कंपनियों को 5,000 करोड़ की बचत

श्रम मंत्रालय ने ईएसआई स्कीम में अंशदान की दर को 6.5% से घटाकर अब 4% कर दिया है।

कंपनी का अंशदान 4.75 % से घटाकर 3.25% जबकि कर्मचारियों का अंशदान 1.75 % से घटाकर 0.75% कर दिया गया है। नया नियम अगले महीने से ही यानी 1 जुलाई 2019 से लागू होगा।

सरकार के इस फैसले से 12.85 लाख कंपनियों को हर साल 5,000 करोड़ रुपये की बचत होगी।

क़रीब 12.85 लाख कंपनियां और 3.6 करोड़ कर्मचारियों ने मिलकर पिछले साल ईएसआई स्कीम में 22,279 करोड़ रुपये जमा किए थे।

कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) कानून, 1948 के अंतर्गत बीमित कर्मचारियों को इलाज़, आर्थिक मदद, मातृत्व, अपंगता की स्थिति में मदद और आश्रित होने पर मदद मिलती है।

ईएसआई कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अंतर्गत आता है।

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पिछली सरकार में भी श्रम मंत्री रहे संतोष गंगवार इस बार भी श्रम मंत्री हैं। फ़ोटोः संतोष गंगवार/facebook
इसी फंड के बूते होता है मज़दूरों का इलाज़

ईएसआई कानून के अंतर्गत उपलब्ध कराए जाने वाली मदद का सारा दारोमदार कंपनियों और कर्मचारियों द्वारा जमा किए गए फंड पर होता है।

कहा जा रहा है कि इस कदम से सामाजिक सुरक्षा का दायरा असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों तक बढ़ेगा।

ईएसआई क़ानून, 1948 के तहत 10 या अधिक मज़दूरों वाली कंपनी, जहां मज़दूरों को 21,000 रुपये तक वेतन मिलता हो, ये क़ानून लागू होता है।

ईएसआई के तहत मिलने वाली सुविधाओं, जैसे इलाज वगैरह को लेकर पहले से ही मज़दूर शिकायत करते रहे हैं।

इन सवालों का जवाब कौन देगा

बीमार मज़दूरों के परिजनों ने खुद कई बार अस्पतालों की लचर व्यवस्था और सुविधाओं की कमी को लेकर हंगामा किया है।

इसपर ईएसआई की आर्थिक तंगहाली का ज़िक्र किया जाता रहा है।

अब जब सरकार के फैसले से ईएसआई के खाते में आने वाले फंड का एक बड़ा हिस्सा कम हो जाएगा, इसकी स्थिति सुधरेगी या और बदतर होगी।

इस सवाल का जवाब श्रम मंत्रालय के पास नहीं है, जो ये प्रचारित करने में जुटा है कि इस घोषणा से लाखों मज़दूरों को लाभ मिलेगा।

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