मुंबई दूरदर्शन के ठेका कर्मचारी 7 दिनों से हड़ताल पर

परमानेंट नौकरी और उचित वेतन की मांग को लेकर मुंबई दूरदर्शन के 140 कैजुअल कर्मचारी बीते 7 दिनों से हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस विरोध प्रदर्शन में 9 महीने की एक गर्भवती कर्मचारी गर्भवती भाग्यश्री भी शामिल हैं।

उनका कहना है कि दूरदर्शन में उन्हें अहम काम करना पड़ता है बावजूद उसके उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता है न ही ईपीएफ दिया जाता है।

मुंबई जैसे महानगर में जीवित रहने के लिए 15000 रुपए पर्याप्त नहीं है।

कुछ कर्मचारियों को यातायात में यानी आने-जाने में ही 2,800 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

mumbai doordarshan contrct employee @Anjali Damania
प्लेकार्ड पर मराठी में लिखा है क्या तुम 15000 रुपये में घर चला सकते हो? फ़ोटोः अंजलि दमानिया
20-20 साल से ठेका पर काम

धरने पर बैठे कर्मचारियों में से एक संतोषी पवार का कहना है कि वे सभी कम से कम बीते आठ -दस सालों से काम कर रहे हैं।

कुछ ऐसे भी कर्मचारी हैं जो पिछले 23 वर्षों से काम कर रहे हैं। वे पूरा महीना काम करती हैं किन्तु उन्हें केवल एक सप्ताह का वेतन 15,840 रुपए मिलते हैं।

वर्ली स्थित दूरदर्शन के बाहर धरने पर बैठीं महिला कर्मचारियों को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्त्ता अंजलि दमानिया ने कहा, “उन्हें कोई चिकित्सा या मातृत्व लाभ नहीं मिलता है। वेतन भी कम है।”

उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा, “क्या 15,840 रुपए मुंबई जैसे महानगर में रहने के लिए पर्याप्त है? इतने कम पैसों में ये लोग न अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकते हैं न ही अच्छी सेहत। क्यों उन्हें यह अधिकार नहीं मिल सकते?”

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ये ठेका कर्मचारी कई सालों से समान काम का समान वेतन और स्थाई किए जाने की मांग कर रहे हैं। फ़ोटोः अंजलि दमानिया
सरकारी कंपनियों की हालत खस्ता

विडंबना यह है कि बीते एक सप्ताह से भारत की व्यापारिक राजधानी के नाम से प्रसिद्ध मुंबई के दूरदर्शन कार्यालय के बाहर सात दिन से धरना चल रहा है लेकिन किसी कॉर्पोरेट मीडिया में यह ख़बर नहीं है।

बता दें कि बीएसएनएल सहित तमाम बड़ी सरकारी कम्पनियां आज दिवालिया होने के कगार पर हैं और इनमें कार्यरत लाखों कर्मचारी आज भुखमरी के कगार पर पहुँच चुके हैं।

वहीं बीते दिनों असम स्थित सरकारी पेपर मिल हिन्दुस्तान पेपर कार्पोरेशन के 55 से अधिक कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण आत्महत्या कर चुके हैं।

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