ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्रियों में हड़ताल स्थगित, सरकार और नेताओं से हैरान कर्मचारी

देश भर की 41 आर्डनेंस फ़ैक्ट्रियों (आयुध निर्माणियों) में 20 अगस्त से शुरू हुई हड़ताल को ख़त्म कर दिया गया है।

हड़ताल का नेतृत्व कर रही तीन मान्यता प्राप्त फ़ेडरेशनें- ऑल इंडिया डिफ़ेंस एम्प्लाईज़ फ़ेडरेशन, द इंडियन नेशनल डिफ़ेंस वर्कर्स फ़ेडरेशन और भारतीय प्रतिरक्षा मज़दूर संघ ने संयुक्त बयान जारी कर इस फैसले की सूचना दी है।

भारत सरकार के प्रेस इनफ़ार्मेंशन ब्यूरो (पीआईबी) ने कहा है कि ‘कर्मचारी फ़ेडरेशनों और सरकार के बीच हुई वार्ता में ये सर्वसहमति बनी है कि आगे के रोडमैप के लिए एक हाई लेवल आधिकारिक कमेटी गठित की जाएगी जो नई संरचना (न्यू एंटीटी) पर फ़डेरेशनों की चिंताओं पर विचार करेगी।’

बयान के अनुसार, ‘फ़ेडरेशनों ने इसके बदले अपनी हड़ताल समाप्त करने और वार्ता की मेज पर आने की रज़ामंदी दी है। इसके साथ ही कर्मचारी सोमवार यानी 26 अगस्त की सुबह से अपने काम पर लौटेंगे।’

कर्मचारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में कहा जा रहा है कि ’26 अगस्त 2019 की सुबह 6 बजे तक हड़ताल रहेगी, इसके बाद सभी अपनी ड्यूटी पर जा सकते हैं।’

साथ में ये भी कहा जा रहा है कि ’24 अगस्त को रात्रि पाली में किसी को भी हड़ताल होने के कारण ड्यूटी पर नहीं जाना चाहिए।’

हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि उनकी हड़ताल ख़त्म नहीं हुई है बल्कि स्थगित हुई है।

सरकार फैला रही है भ्रम?

कर्मचारियों ने पीआईबी के प्रेसनोट को एक चालाकी भरा दांव कहा है, क्योंकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फ़ेडरेशनों से न्यू एंटीटी यानी कार्पोरेटाइज्ड ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड (ओएफ़बी) पर ही बात होगी।

कर्मचारियों की ये भी आपत्ति की है कि प्रेसनोट में कहा गया है कि फ़ेडरेशनों ने हड़ताल ख़त्म कर दी है जबकि हड़ताल स्थगित हुई है।

इसके अनुसार सेक्रेटरी/डीपी ने फ़ेडरेशनों की चिंताओं को ध्यान पूर्वक सुना और कहा कि ओएफ़बी के निगमीकरण का फैसले अभी सरकार के विचारविमर्श स्तर पर है।

बीएसएनएल से सबक लेकर कर्मचारी कह रहे हैं कि अगर सरकार कोई दांवपेच करे तो फ़ेडरेशनों को शार्ट नोटिस पर हड़ताल घोषित करने के लिए तैयार रहना होगा।

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लिखित आश्वासन चाहते थे नेता

असल में पहले कर्मचारी नेता लिखित आश्वासन चाहते थे लेकिन अचानक उन्होंने एक हफ़्ते की हड़ताल के बाद इसे स्थगित करने का फैसला कर लिया।

हालांकि कुछ लोग फ़ेडरेशनों के इस फैसले से आक्रोशित भी हैं।

सोशल मीडिया पर एक बयान वायरल हो रहा है जिसमें कहा गया है, “हड़ताल दो से चार दिन जारी रहती तो परिणाम कुछ और हो सकता था। सही मायने में आग तो धधकना चालू हुआ था और अब दूसरे संस्थान के लोग हमलोग का साथ में आ रहे थे,  मीडिया भी दिखाने लगी थी तबतक हमारे नेताओं ने बिना किसी नतीजे के सरेंडर हो गए।”

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