2267 करोड़ PF घोटाले से आक्रोशित बिजली विभाग के कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार

पीएफ घोटाले से आक्रोशित विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश में 18 और 19 नवम्बर यानि आज से 48 घंटे तक कार्य बहिष्कार के अपने फैसले पर अडिग हैं।

इसके तहत संघर्ष समिति ने सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं से पूरी तरह एकजुट होकर 48 घंटे तक कार्य बहिष्कार को सफल बनाने को कहा है।

दरअसल पीएफ घोटाले और अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित बिजली विभाग के हाजारों कर्मचारियों ने 14 नवम्बर को लखनऊ में प्रर्दशन मार्च निकालकार सड़के जाम कर दी थी।

संघर्ष समिति द्रारा ये कहा गया था कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी तो 18 और 19 नवम्बर को वो कार्य बहिष्कार करने के लिए बाध्य हो जाएंगें।

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संघर्ष समिति की ये मांग है कि पीएफ के भुगतान की पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार लें और इसे लेकर एक गजट नोटिफिकेशन जारी करें।

इसके साथ ही घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व चेयरमैन और अन्य जिम्मेदार आईएस अधिकारियों पर एफआईआर कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

संघर्ष समिति ने संविदा कर्मचारियों के ईपीएफ की धनराशि ठेकेदारों द्रारा जमा न किए जाने पर रोष व्यक्त करते हुए मांग की है कि जिम्मेदार ठेकेदारों पर कड़ी कार्यवाही की जाए और कार्मचारियों की ईपीएफ की धनराशि खाते में जमा की जाए।

पंरतु समिति की मांगों को लेकर अभी तक किसी भी तरह का जवाब नहीं दिया गया लिहाजा 18 और 19 नवम्बर को कार्य बहिष्कार अभियान के तहत आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के समस्त जनपदों एवं परियोजना मुख्यालयों पर विरोध सभाओं का दौर आज बारहवें दिन भी जारी रहा।

अनपरा, ओबरा, पारीक्षा, हरदुआगंज, पनकी, वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, नोएडा, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, बांदा, झांसी, कानपुर, मुरादाबाद, बरेली, फैजाबाद, अयोध्या, गोण्डा, प्रयागराज में बिजली कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं ने बड़ी सभाएं करके रोष व्यक्त किया।

इतना ही नहीं 17 नवम्बर को अवकाश के दिन भी विरोध सभाओं का क्रम जारी रखा गया, और 18 एंव 10 नवम्बर तक शान्तिपूर्ण कार्य बहिष्कार कर सभी कर्मचारी अपनी एकजुटता का प्रर्दशन कर रहे हैं।

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उल्लेखनीय है कि 99 प्रतिशत से अधिक धनराशि जिन तीनों हाउसिंग कम्पनियों में निवेशित की गयी हैं वे सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की श्रेणी में नहीं आती हैं और पूरी तरह असुरक्षित हैं।

संघर्ष समिति ने कहा है कि उप्र स्टेट पॉवर सेक्टर इम्प्लाइज ट्रस्ट एवं उप्र पावर कारपोरेशन अंशदायी भविष्य निधि ट्रस्ट की जीपीएफ व सीपीएफ की धनराशि के भुगतान का उत्तरदायित्व लेकर उप्र सरकार एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर विद्युत कर्मचारियों के प्राविडेन्ट फण्ड का भुगतान सुनिश्चित करे।

एक श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की गई है कि बिजली कर्मचारियों की जीपीएफ व सीपीएफ की कितनी-कितनी धनराशि का किस-किस संस्था में कितनी-कितनी अवधि के लिए किस-किस स्कीम में निवेश किया गया है। श्वेत पत्र से कर्मचारियों की पीएफ धनराशि की सही तस्वीर सामने आ सकेगी।

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