वेतन समझौते के बदले शिवम ऑटो के 45 मज़दूर सस्पेंड

गुड़गांव धारूहेड़ा के पास स्थित बिनौला इंडस्ट्रियल बेल्ट में शिवम ऑटो टेक प्रा.लि. के 45 मज़दूरों को मैनेजमेंट ने सस्पेंड कर दिया है। इसमें पांच यूनियन के पदाधिकारी हैं।

पिछले एक साल से वेतन समझौते की मांग कर रहे इन मज़दूरों को मैनेजमेंट पहले से ही दुष्परिणाम झेलने के लिए तैयार रहने की धमकी दी थी।

अब ये मज़दूर 21 अगस्त से बिनौला में धरने-प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं।

मज़दूर यूनियन का दावा है कि कम्पबनी के अंदर काम करने वाले मज़दूर पिछले कई दिनों से कैंटीन के खाने का बहिष्कार कर भूखे ही अपनी शिफ़्ट में काम कर रहे हैं।

आरोप है कि वेतन समझौते को लेकर जब मज़दूरों ने दबाव बढ़ाया तो मैनेजमेंट ने फरवरी-मार्च में प्रशासन ने मज़दूरों को निलम्बित कर दिया।

मैनेंजमेंट बना रहा मज़दूरों पर दबाव

यूनियन नेताओं का कहना है दबाव बनाने के लिए मैनेजमेंट ने सस्पेंड करने की कार्रवाई की और मानेसर, रोहतक, हरिद्वार, बंगलोर मज़दूरों का ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।

मज़दूरों ने मैनेजमेंट के इस उत्पीड़न के रवैये के ख़िलाफ़ प्रशासन को ज्ञापन भी दिया। साथ ही मुख्य्मंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक को चिट्ठी लिखी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

यूनियन के महासचिव मुकेश यादव के अनुसार मज़दूरों की मांग है कि लंबे समय से अधर में लटके वेतन समझौते को तुरंत कराया जाए और निलंबित किए गए मज़दूरों को बहाल किया जाए।

इसके अलावा ट्रांसफ़र किए गए मज़दूरों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।

बिनौला के अलावा भी कंपनी के है 5 प्लांट

शिवम ऑटो में क़रीब 400 परमानेंट और 800 से 1000 के करीब़ टेंपरेरी वर्कर हैं।

यह पिछले 16 साल से तमाम ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स व दूसरे ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स के लिए मुख्य पुर्जे(कम्पोोनेंट) बना रही है।

मारूति, हीरो, याहमा, मित्सुबिशी, एचआईएलटीआई, मिंडा, बोस्चर, डेंसो इसके प्रमुख ग्राहक हैं।

बिनौला के अलावा इस कंपनी के मानेसर (सेक्टलर 5), रोहतक, हरिद्वार (गाँव, सेलमपुर, तहसील महमूदपुर) और कर्नाटक (कोलार) में कुल पाँच प्लाण्ट हैं।

यूनियन नेता मुकेश यादव का कहना है कि सालों से काम कर रहे मज़दूरों के साथ कंपनी सम्मानजनक समझौता नहीं कर रही है।

 मज़दूरों कर रहें कैंटीन के खाने का बहिष्कार

जहां मजदूर अपने जायज वेतन समझौते के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इस महंगाई के जमाने में वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं, और कारखानेदारों को मजदूरों की यह मांग नागवार गुजर रही है।

वहीं हीरो मोटो कार्प के सीएमडी पवन मुंजाल की सालाना सैलरी 80 करोड़ 41 लाख रुपये है।

बढ़ती महँगाई व बढ़ती जरूररतों के अनुसार मज़दूरों की जायज़ माँगे भी इनको ज़्तयादा लगती हैं।

मज़दूरों का कहना है कि जब तक हमारी जायज़ माँगे मान नहीं ली जाती तब तक कंपनी प्रबन्धन को मज़दूरों के रोष का सामना करना पड़ेगा।

मज़दूरों का दावा है कि पिछले 7 महीनों से मज़दूर कैंटीन का खाना तक नहीं खा रहें हैं और भूखे ही अपनी शिफ्ट में काम कर रहें हैं।

प्रबंधन के अड़ियल रवैये से मज़दूर को पड़ा दिल का दौरा

मुकेश यादव ने बताया कि उनकी यूनियन के द्वारा सामूहिक माँग-पत्रक प्रबन्धान के समक्ष 04 मई 2018 को ही दे दिया गया था।

लेकिन कंपनी प्रबंधन अपने अड़ि‍यल रवैये पर अड़ा हुआ है।

उनका आरोप है कि मैनेजमेंट मज़दूरों को डराने से लेकर गेट बंद करने तथा बेईज़्रज़त करने की कार्यवाही कर रहा है।

झूठे मामले दर्ज करके कार्यकारणी के सदस्यों को निलम्बित कर रहा है। उसने ऐसे मज़दूरों को निलम्बित किया है जो सुरिक्षित कामगार की श्रेणी में भी आते हैं।

यूनियन के प्रधान राकेश का कहना है कि शिवम ऑटो प्रबन्ध न के घटिया रवैये की वजह से एक मज़दूर को तो दिल का दौरा भी पड़ गया है। अक्सर मज़दूरों को अमानवीय ढंग से बेईज्ज़त किया जाता है।

कंपनी प्रबंधन की तानाशाही इसी चीज़ से समझी जा सकती है कि वह श्रम विभाग में चल रहे समझौता वार्ता में मज़दूरों से समझौते पर बात करने को तैयार नहीँ है, बल्कि यूनियन कार्यकरणी समेत मज़दूरों को बुरे व्य वहार का आरोप लगाकर बाहर कर रहा है।

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