गुड़गाँव मानेसर में 50,000 मज़दूरों की नौकरियां गईं

देशभर में तमाम ऑटो सेक्टर में लंबे समय से चल रही मंदी के कारण लाखों मज़दूर सड़को पर आ गए हैं।

आखिर यह किस तरह का विकास है? देश का विकास करने के लिए सरकार को और कितना बहुमत चाहिए?

हालांकि ऑटो सेक्टर पर सुस्ती की यह मार चुनावों से पहले ही शुरू हो गई थी।

लेकिन, आमतौर पर डीलरों में यह विश्वास था कि नई सरकार के आने के साथ ही यह समाप्त हो जाएगी।

लेकिन ऑटो सेक्टर में दिन पर दिन संकट बढ़ता ही जा रहा है जिसके चलते देश के सबसे बड़े ऑटोमोटिव हब गुड़गाँव मानेसर में करीब 50,000 से ज़्यादा मज़दूरों की नौकरियां चली गयी हैं।

दरअसल मोदी सरकार ने श्रम कानून खत्म कर मालिकों को छंटनी करने की खुली छूट दे दी है।

जिससे कंपनी मालिकों ने मज़दूरों की भारी संख्या में छंटनी कर दी है। जिससे सारा मुनाफा मालिकों को होगा और नुकसान की भरपाई मज़दूर के सर पड़ रही है।

मंदी की मार झेल रहे केवल मज़दूर

गौरतलब है कि गुड़गाँव मानेसर में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड की दो फैक्ट्रियां और होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड और हीरो मोटोकॉर्प स्थित हैं।

इन कंपनियों में बिक्री में कमी आने से प्रंबधन ने 50000 मज़दूरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

आपको बता दें कि पिछले दो दशकों से वाहन उद्योग ने अपना सबसे खराब प्रदर्शन दर्ज किया है, जो लगभग पिछले एक साल से नीचे की ओर जारी है।

देश में लगभग 15 हजार ऑटो डीलर के 26 हजार के लगभग शोरूम है। और इसमें लगभग 25 लाख लोग सीधे और 25 लाख लोग परोक्ष रूप से रोजगार पाते हैं।

जिसमें से 18 महीने में देश के 271 शहरों में वाहनों के 286 शोरूम बंद हुए हैं और यहां से 32 हजार से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है।

लेकिन साफ तौर पर देखा जाए तो मंदी की मार केवल मज़दूर वर्ग पर ही पड़ रही है। निकाले गए मज़दूरों की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

हताश मजदूर आत्महत्याएं करने को है बेबस

लगातार छंटनी के कारण मज़दूर इतने हताश हो गए है कि आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए हैं।

बीते वीरवार को टाटा मोटर्स की एंसिलरी इंपीरियर ऑटो इंडस्ट्री में जूनियर इंजीनियर के पद पर काम करने वाले प्रभात कुमार ने नौकरी से निकाले जाने पर आत्मदाह कर लिया है।

एचएमएसआई के मानेसर संयंत्र में एक कार्यकर्ता का कहना है कि ऑटो सेक्टर की यह सुस्ती आने वाले महिनों में कई गुना बढ़ने वाली है। जिसके चलते कई और मज़दूरों की छंटनी की जाएगी।

वहीं एक कर्मचारी का कहना है कि वाहनों के उत्पादन में काफी गिरावट आई है, कंपनी में प्रतिदिन लगभग 6,000 इकाइयों का निर्माण करने के लिए उपयोग करते हैं, लेकिन अब इसे घटाकर 5,500 यूनिट कर दिया गया है।

लेकिन इन सब के चलते भी छंटनी जारी है। और आने वाले कुछ समय तक इस स्थिति में कोई बदलाव की गुंजाइश नज़र नहीं आ रही है।

मोदी सरकार विकास के नाम पर मज़दूर वर्ग को आंखे मुंदे बैठी हुई है।

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