पंचकूला में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर डॉक्टरों ने किया विरोध प्रदर्शन

हरियाणा स्थित पंचकूला सेक्टर 6 के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ़ जोर शोरो से विरोध प्रदर्शन किया।

खबरों के अनुसार डॉक्टरों द्वारा प्रदर्शन केवल विशेष भत्ते और वेतन वृद्धि देने की मांग की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है।

आपको बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएट की केंद्रीय कार्यकारी समिति ने किया था।

सरकार दे रही केवल झूठे आश्वासन

बीते 21 जुलाई को एचसीएमएस एसोसिएशन ने करनाल में एक बैठक की और अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था।

लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी सरकार ने डॉक्टरों के हित में कोई फैसला नहीं किया गया।

खबरों के मुताबिक 30 अगस्त को डॉक्टरों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा।

लेकिन सरकार अपने वादे से हमेशा की तरह मुकर गई और उनकी मांगों को पूरी तरह अनसुना कर दिया गया।

प्रदर्शनकारियों ने की ओपीडी बंद

वहीं एचसीएमएस एसोसिएशन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य के डॉक्टरों के प्रति असंवेदनशील है और आश्वासन के बावजूद उनकी वास्तविक मांगों को अनदेखा किया जा रहा है।

एचसीएमएस के अध्यक्ष और सिविल सर्जन डॉ जसबीर सिंह पंवार का कहना है कि उनके सामने आने वाली समस्याओं के प्रति सरकार का ये कठोर रवैया गंभीर चिंता का विषय है।

साथ ही एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि सरकार की अनदेखी को मद्देनजर रखते हुए उन्होंने आपातकालीन और पोस्टमार्टम सेवाओं को छोड़कर सभी ओपीडी को पूरी तरह से बंद कर दिया है।

दूसरी तरफ एचसीएमएस के महासचिव डॉ राजेश शोकंद का कहना है कि ये सभी मांगें वास्तविक हैं और सरकार को इन्हें अपने दम पर पूरी करनी चाहिए।

विरोध के चलते मरीज उठा रहें धिक्कत

एचसीएमएस के सदस्यों ने कहा कि अगर उनकी मांगों को 9 सितंबर तक पूरा नहीं किया गया तो अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।

एचसीएमएस के सदस्यों ने कहा कि सेवाएं बंद करने से जनता को होने वाली किसी भी असुविधा के लिए के सरकार की एकमात्र जिम्मेदार होगा।

हालांकि, दूसरी तरफ जो मरीज इलाज के लिए आए थे। उन्हें सेवाओं के बंद होने के कारण वापस भेज दिया गया था।

मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों के विरोध के कारण उन्हें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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