ईरान में मज़दूरों की ख़बर छापने वाले पत्रकारों को 18 साल की सज़ा

ट्रेड यूनियन कार्रवाईयों में शामिल सात सामाजिक कार्यकर्ताओं को ईरान ने अधिकतम 18 साल क़ैद की सज़ा दी है।

ये सामाजिक कार्यकर्ता ट्रेड यूनियन संघर्षों को रिपोर्ट करते थे और उनकी आवाज़ बने हुए थे।

जेल भेजे गए इन कार्यकर्ताओं में तीन मानवाधिकार के लिए काम करते थे जबकि चार श्रमिक मुद्दों की रिपोर्टिंग के लिए एक ऑनलाइन वेबसाइट चलाते थे।

सात सितंबर को ईरान की कोर्ट ने अपने फैसले में हरेक सामाजिक कार्यकर्ता को छह से 18 साल तक जेल की सज़ा दी है।

मज़दूरों के प्रति दमनात्मक रवैया

असल में ईरान में पिछले साल एक चीनी मिल में एक महीने तक चली हड़ताल को इन कार्यकर्ताओं ने अपना समर्थन दिया था और इस संघर्ष को मीडिया में लाने में काफ़ी बड़ी भूमिका निभाई थी।

इन कार्यकर्ताओं को जेल भेजने पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी ने ईरान की कड़ी आलोचना की है।

क़ैद के अलावा एक कार्यकर्ता को राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में 74 कोड़े मारने की सज़ा दी गई है।

संस्था के एडवोकेसी डायरेक्टर फ़िलिप लूथर ने कहा है कि ये सज़ाएं ईरान के क्रूर न्यायिक व्यवस्था का कारगुज़ारियों का ताज़ा उदाहरण है।

और पत्रकारों और वर्कर्स के अधिकारों के प्रति प्रशासन की अवहेलना वाली मानसिकता को पूरी तरह उजागर करता है।

चाहे घोर दक्षिणपंथी हों जैसे भारत या ईरान के सत्ताधारी या नव उदारवादी हों जैसे अमरीका और यूरोप के शासक, मज़दूरों के प्रति दमनात्मक रवैये में शायद ही कोई फर्क हो।

पृष्ठभूमि

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सात सितम्बर को तेहरान की एक अदालत ने सात लोगों के ख़िलाफ़ फैसला दिया था।

इन लोगों को पिछले साल मज़दूरों के एक शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने और प्रदर्शन की ख़बर प्रकाशित करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।

इन सात लोगों में से श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता इस्माइल बख्शी और सेपिडेह घोलियान भी शामिल थे जिन्हें हाफ्त तापेह चीनी मिल में पगार न पाने वाले वर्करों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए पहले भी कई बार गिरफ़्तार किया गया था।

ये मिल देश के पूर्वी राज्य खुज़ेस्तान में स्थित है।

सजा के नाम पर पत्रकारों पर टॉर्चर

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पहली बार गिरफ़्तारी के बाद इन दोनों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को टॉर्चर भी किया गया।

इस्माइल बख़्शी को कोर्ट ने साढ़े 13 साल की सज़ा और 74 कोड़े मारने के आदेश दिए।

उनपर झूठ फैलाने, सबसे बड़े नेता को अपमानित करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के ख़िलाफ़ साजिशें रचने के आरोप लगाए गए थे।

बाकी सेपिडेह घोलियान और पत्रकार अमीरहुसैन मोहम्मदीफर्द, सानाज़ अलाहयारी, असाल मोहम्मदी और आमिर अमिरघोली को वेबसाइट GAM में रिपोर्टें प्रकाशित करने के लिए 18-18 साल की सज़ा दी गई।

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