मोदी की बंपर जीत से मज़दूर यूनियनें क्यों डरी हुई हैं?

लोकसभा 2019 के चुनावों में मोदी और उनके सहयोगियों को मिली भारी जीत का भाजपा-आरएसस से जुड़ा मज़दूर संगठन भारतीय मज़दूर संघ (बीएमएस) ने स्वागत किया है।

एक प्रेस बयान जारी कर बीएमएस ने कहा है, “भारतीय लोकतंत्र के निर्णायक जनों ने देश के विकास का समग्रता के मूल्यांकन किया तथा राजनैतिक दल और नेतृत्व (व्यक्ति) की नीतियां देश के समग्र विकास की ओर केंद्रित हों केवल उन्हीं को शासनतंत्र संचालन का दायित्व दिया यह निश्चित ही लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है।”

लेकिन इन चुनावों में मोदी को हटाने का आह्वान करने वाली सीपीएम से जुड़ी ट्रेड यूनियन सीटू ने इन नतीजों को निराशाजनक बताया है।

वर्कर्स यूनिटी से बात करते हुए सीटू के जनरल सेक्रेटरी तपन सेन ने कहा, “श्रम कानूनों में जिन बदलावों को करने से हमने पिछले पांच साल से रोके रखा, अब मोदी सरकार दोगुने उत्साह से उसे अमल में ले आएगी।”

उन्होंने आशंका जताई कि “अगले पांच साल में श्रम कानूनों पर हमले और तेज़ होंगे, अभी यही कहा जा सकता है।”

बीएमएस ने किया स्वागत तो बाकियों ने जताई आशंका

मारुति उद्योग कामगार यूनियन (एमयूकेयू) के महासचिव कुलदीप जांगू ने कहा कि जिस भारी बहुमत से मोदी सरकार आई है उससे यही लगता है कि श्रम कानूनों पर भारी चोट होगी।

उन्होंने कहा कि ‘पिछले पांच सालों में बीजेपी की जिन जिन प्रदेशों में सरकारें थीं, वहां श्रम कानून बदल दिए गए। अब अगर राज्यसभा में भी इनका बहुमत आता है तो ये 44 श्रम कानूनों को ख़त्म करके उनकी जगह चार श्रम संहिताएं लाएंगे।’

गौरतलब है कि मोदी ने अपने पिछले कार्यकाल में इन चार संहिताओं का प्रस्ताव भी पेश कर दिया है।

कुलदीप जांगू का कहना है कि मोदी सरकार अगर ये कर देती है तो मज़दूर वर्ग को ऐसी चोट पहुंचेगी जिसका असर पीढ़ियों तक बना रहेगा।

लेकिन बीएमएस ने मोदी नेतृत्व के प्रति अपना पूरा समर्थन व्यक्त किया है।

बीएमएस के महामंत्री ब्रिजेश उपाध्याय ने बयान जारी कर कहा है, “भारतीय मज़दूर संघ, भारतीय जनता पार्टी, उसके नेतृत्व तथा सभी कार्यकर्ताओं को चुनाव में मिली ऐतिहासिक सफलता पर अभिनंदन और स्वागत करता है।”

उन्होंने कहा है कि मोदी को कठोर निर्णय लेने की इच्छा शक्ति के लिए जाना जाता है और वो जनमत की इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रशासनिक ढांचे और शासन प्रणाली में सुधार करेंगे।

बीएमएस ने कहा मोदी सरकार को सहयोग करें

भारतीय मज़दूर संघ ने मोदी के मिनिमम गवर्नमेंट व मैक्ज़िमम गवर्नेंस की नीति को पूरी तरह से लागू करने की उम्मीद जताई है।

बीएमएस ने माना है कि देश की दो तिहाई आबादी ग़रीबी, अमीरी ग़रीबी की बढ़ती खाई, बेरोज़गारी, स्तरहीन रोज़गार और अन्य समस्याओं से ग्रस्त है और इस ओर पिछले दो साल में मोदी सरकार ने ध्यान देने का संकेद दिया है।

साथ ही बीएमएस ने कहा है कि शोषित, पीड़ित, वंचित जनों के लिए मोदी सरकार के हर कदम के साथ खड़ा है।

बयान के अंत में सभी सामाजिक संगठनों से अपील की गई है कि वो मोदी सरकार के साथ मिल कर काम करें तभी सबका साथ व सबके विकास का लक्ष्य पूरा होगा।

गुड़गांव में काम करने वाले मज़दूर नेता श्यामबीर ने कहा है कि मोदी सरकार श्रम कानूनों को रद्दी का काग़ज बना देना चाहती है और अब श्रम कानूनों पर हमला बढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है।

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One thought on “मोदी की बंपर जीत से मज़दूर यूनियनें क्यों डरी हुई हैं?

  • May 28, 2019 at 3:41 am
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