ऑटो बाजार में मंदी की मार से बेकार बैठने पर मज़बूर ट्रक ड्राईवर

तमाम ऑटो सेक्टर के बुरे हालात किसी से छुपे नहीं हैं। पिछले लंबे समय से लगातार ऑटो सेक्टर में वाहनों की बिक्री में कमी आने से उत्पादन कम हुआ है।

जिसके चलते लाखों मज़दूर छंटनी के शिकार हुए वहीं मारूति कारों की ढुलाई करने वाले ट्रक ड्राइवर भी बेरोजगारी से जूझ रहे हैं ।

दरअसल मंदी का प्रभाव कारों को ढोने वाले ट्रक ड्राइवरों पर भी पड़ा है। बिक्री कम होने के बाद से हजारों की संख्या में ये ट्रक महीनों से यू हीं खड़े हैं। जिस कारण उन्हें चलाने वाले ड्राइवर बेरोज़गारी का सामना कर रहे हैं।

ऐसे में मारुति की गाड़ियां ढोने वाले ट्रकों के ड्राइवरों से वर्कर्स यूनिटी ने बात की।

पिछले 6 महिने से पार्किंग पर खड़े हैं ट्रक

ट्रक ड्राइवर बब्लू कुमार यादव का कहना है कि मंदी के बाद से सभी ट्रक पार्किंग में खड़े है क्योंकि पहले हफ्ते में दो या तीन बार ढुलाई का काम मिल जाया करता था अब महीने में एक बार काम मिल रहा है।

महीने में एक बार मिलने से जितना कमाते है उसी से गुजारा करना पड़ता है। वहीं श्याम लाल पाण्डेय का कहना है कि कार ढुलाई के लिए 6 महीने पहले शुरू की गई ट्रेन को बंद किया जाए.

उनका कहना है कि एक ट्रेन में 50 ट्रेलर के बराबर गाड़ियां लोड होती हैं, जिससे ट्रालर को काम नहीं मिल पा रहा है।

इन ट्रक ड्राइवरों का दावा है कि मालिक कोई तनख्वहा नहीं देते बल्कि किलोमीटर के हिसाब से पेमेंट किया जाता है। जिसके चलते ट्रकों के ढुलाई के चक्कर न लगने पर उनकी आमदनी नहीं हो पा रही है।

ढुलाई वाली ट्रेनों को बंद किया जाए

गुड़गांव में मारुति कंपनी की पार्किंग के पास सैकड़ों की संख्या में ट्रालर खड़े हैं। एक दिन की खुराक 200 रुपये दी जाती है और उन्हें एक महीने तक कार लदाई का इंतज़ार करना पड़ रहा  है।

चूंकि वो इंतज़ार कर रहे हैं इसलिए वहीं पर रहना, खाना हो रहा है। स्टोप पर वे खाना बनाते हैं.

उनका कहना है कि कंपनी द्वारा उन्हें परेशान किया जाता है। ये सभी मज़दूर ट्रकों में रहकर ही अपना गुजारा कर रहे हैं, स्टोप पर खाना बनाते हैं। कंपनी के गार्ड आकर स्टोप पर खाना बनाने से मना करते हैं और उनका सारा सामान बाहर फेंक देते हैं।

मंदी के दौर से जहां पूंजीपति वर्ग भी बेहाल है लेकिन सबसे ज्यादा मज़दूर वर्ग इससे जूझ रहा है क्योंकि मज़दूरों के लिए बेरोजगारी के चलते दो वक्त की रोटी कमा पाना भी बहुत मुश्किल हो गया है।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *