Zomato ने की 540 कर्मचारियों की छंटनी

तमाम सेक्टर में छंटनी के बाद अब ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी ज़ोमेटो ने अपने 540 कर्मचारियों की छंटनी कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

दरअसल ये छंटनी ज़ोमेटो के गुडगांव कंपनी में हुई है, जिनमें मुख्य रूप से कस्टमर सपोर्ट और डिलीवरी पार्टनर के कर्मचारी शामिल हैं।

कंपनी के इस फैसले का असर ज़ोमेटो में काम करने वाले लगभग 10 फीसदी कर्मचारियों पर पड़ा है। छंटनी के बाद अब कर्मचारियों की संख्या लगभग 5,000 रह गई है।

वहीं खबरों के मुताबिक कंपनी ने कस्टमर सपोर्ट स्टाफ में कमी करने के बहाने से कर्मचारियों की छंटनी की है।

जबकि कंपनी का कहना है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान सपोर्ट फंक्शन्स में बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन हुआ है। जिसके चलते कंपनी ने ये कदम उठाया है।

चार करोड़ ऑर्डर डिलीवरी करने का दावा

कंपनी के अनुसार ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल कर रही है जोकि ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे, पूछताछ समेत तमाम कार्यों में मददगार साबित हो रहा है।

आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब ज़ोमेटो ने अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला बल्कि कंपनी ने इससे पहले भी 60 कर्मचारियों को यह कहकर निकाल दिया था कि वो अपनी सेवा की गुणवत्ता में सुधार कर रही हैं।

इससे पहले 2015 में कंपनी ने खर्चे में कटौती के नाम पर 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था।

जबकि ज़ोमेटो कंपनी भारत में हर माहिने चार करोड़ ऑर्डर डिलीवरी करने का दावा करती है।

कर्मचारियों की इस छंटनी को लेकर ऑनलाइन फूड डेलीवरी फर्म ने कहा है कि छंटनी में निकाले गए कर्मचारियो को 2-4 महीने का वेतन दिया गया है।

साथ ही कर्मचारियों की इंश्योरेंस मदद को भी जनवरी 2020 तक बढ़ाया जायेगा।

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कस्टमर सपोर्ट टीम में की गई छंटनी

गौरतलब है कि कंपनी ने कुछ दिन पहले अपने गुड़गांव ऑफिस के कस्टमर सपोर्ट टीम में छंटनी की थी।

मीडिया के मुताबिक कंपनी ने ये फैसला खर्चों में कटौती करने की वजह से किया था। वहीं ज़ोमेटो की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि ये छंटनी कस्मटमर सपोर्ट वर्कफोर्स में काम की अपेक्षा लोग ज्यादा होने के चलते की गई।

देखा जाए तो इस वक़्त देश का लगभग प्रत्येक क्षेत्र आर्थिक मंदी की चपेट में आने लगा है। जिसके चलते जीडीपी वृद्धि दर पांच फीसदी रह गई है।

धीरे-धीरे मंदी का भयानक दौर ऑटोमोबाइल, गारमेंट, हीरा कारोबार, रियल स्टेट से लेकर ज़ोमेटो तक पहुंच चुका है।

भारी मात्रा में उत्पादित वस्तुओं की मांग में कमी के कारण कंपनियों का करोबार ठप्प हो गया है। जिसके चलते हजारो की संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है।

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