निजीकरण को लेकर सफाई कर्मचारियों का सरकार के खिलाफ ‘हल्ला बोल’

आंदोलन करने वाले कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण के आदेश को वापस नहीं लिया गया तो वह सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव करेंगे।

निजीकरण के आदेश को वापस लेने की मांग

उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में सफाई कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध और दूसरी मांगों को लेकर रैली निकाली है।

अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ और भीम आर्मी के नेतृत्व में निजीकरण के खिलाफ सफाई कर्मचारियों आंदोलन किया।

गौरतलब है कि म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के इस कदम से सैकड़ों की संख्या में सफाई कर्मचारी बेरोज़गार हो गए।

प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मचारियों ने निजीकरण के आदेश को वापस लेने की मांग की।

इस दौरान बड़ी संख्या में लोग बैनर और पोस्टर लेकर नारे लगाते नजर आएं।

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निजीकरण स्थगित न करने पर मंत्रियों के घरों का घेराव

आपको बता दें कि सफाई कर्मचारियों के साथ बीएसएनएल और भारतीय रेलवे के कर्मचारियों ने भी अपने अपने क्षेत्र में निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया।

इस दौरान कर्मचारियों ने उचित वेतन मिलने समेत दूसरे तमाम समस्याओं से निजात दिलाए जाने की मांग की।

आंदोलन करने वाले कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण के आदेश को वापस नहीं लिया गया तो वह सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव करेंगे।

अगर इसके बाद भी उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह विधानसभा भवन का घेराव करेंगे और भवन में सफाई का काम स्थगित कर देंगें।

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बीएसएनएल के कर्मचारियों ने भी किया विरोध प्रदर्शन

सामाजिक कार्यकर्ता सुशील गौतम ने  बताया कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में सफाई कर्मचारियों को ठेके पर रखने का काम कर रही है।

निजीकरण की इस व्यवस्था के खिलाफ सिर्फ सफाई कर्मचारी ही नहीं बल्कि रेलवे और बीएसएनएल के कर्मचारियों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है।

उत्तर प्रदेश में सफाई कर्मचारी 6000 रुपये प्रतिमाह पर रखे जा रहे हैं। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित राशि से बहुत कम है।

केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित राशि 18 हजार रुपये हैं लेकिन राज्य सरकार को सफाई कर्मचारियों की परवाह नहीं है।

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सुरक्षा उपकरण की कमी

सुशील गौतम ने बताया कि हाल ही में मुजफ्फरनगर जिले में एक प्राइवेट कंपनी आरके कांट्रैक्टर द्वारा दलित समुदाय की 310 महिलाएं ठेके पर रखी गईं।

तीन महीने बाद कांट्रैक्टर सभी का पैसा लेकर भाग गया।

जब सफाई कर्मचारी जिले के डीएम से मिलने गए तो उन्होंने कहा कि आपको प्राइवेट कंपनी में काम की सलाह किसने दी। जबकि सफाई का सारा ठेका प्राइवेट कंपनियों को दिया जा रहा है।

गौतम कहते हैं कि ठेके पर रखे गए कर्मचारियों को सुरक्षा के सारे उपकरण भी मुहैया नहीं कराए जाते हैं।

जब सेना का जवान सरहद की सुरक्षा करते हुए मर जाता है तो उसे शहीद का दर्जा मिलता है, लेकिन नाले की सफाई करते वक्त अगर कोई सफाई कर्मचारी मर जाता है तो उसको कोई पूछता तक नहीं है।

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