Rail कारखाने जब मुनाफ़े में हैं, सरकार उन्हें बेच रही हैः टीयूसीसी

टीयूसीसी के जनरल सेक्रेटरी एसपी तिवारी का कहना है कि रेलवे कारखाने मुनाफ़े में चल रहे हैं और बहुत किफायती दरों पर भारतीय रेलवे को कोच, इंजन आदि बनाकर दे रहे हैं।

ऐसे में इन कारखानों को निगम बनाने के बहाने निजी हाथों में सौंपने से मोदी सरकार को बाज आना चाहिए।

असल में मोदी सरकार ने जीतने के बाद 100 दिन का एक्शन प्लान बनाया है जिसके तहत 7 रेलवे कारखानों को भारतीय रेलवे से अलग करने का फैसला किया गया है।

रेलवे की अग्रणी ट्रेड यूनियनों ने निजीकरण की इस कोशिश का पुरजोर विरोध किया है। उनका आरोप है कि निगमीकरण के बहाने निजीकरण की कोशिश हो रही है।

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इऩ कारखानों से क़रीब 20,000 कर्मचारी जुड़े हुए हैं। एसपी तिवारी का कहना है कि निगमीकरण से सवा लाख लोगों की आर्थिक दशा पर असर पड़ेगा और इसके ख़िलाफ़ ट्रेन में सफर करने वाली आम जनता को भी आगे आना होगा।

रोज ट्रेन से सफर करने वाले लोगों को भी जागरूक करना होगा। रेलवे कारखाने राष्ट्र की धरोहर हैं, इनसे रेलवे ही नहीं देश को फायदा होगा।

तिवारी का कहना है कि रायबरेली माडर्न रेल कोच फैक्ट्री में निजिकरण के ख़िलाफ़ विशाल धरना हुआ है। धीरे धीरे ये प्रतिरोध राष्ट्रीय स्तर पर फैलेगा।

उन्होंने उदाहरण दिया कि जो कोच चार करोड़ में बनते थे उसे रायबरेली की फ़ैक्ट्री में दो करोड़ में बनाया जाता है, तो फिर क्यों निगम बनाने की कोशिश हो रही है।

टीयूसीसी ने आह्वान किया है कि भारतीय रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ सभी यूनियनें साथ आएं।

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