बनारस में मौजूद मोदी के ख़िलाफ़ रेलकर्मियों का अर्द्धनग्न प्रदर्शन

जब शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे, उसी दिन रेलवे कर्मचारियों ने उनके ख़िलाफ़ अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया।

शनिवार को मोदी वाराणसी में बीजेपी के सदस्यता अभियान की शुरूआत करने के लिए पहुंचे थे।

ठीक उसी समय डीएलडब्ल्यू रेल मज़दूर यूनियन वाराणसी के आइआरईएफ़ व ऐक्टू के सैकड़ों रेल कर्मचारी अर्धनग्न होकर निगमीकरण/निजीकरण के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन कर करने लगे।

उल्लेखनीय है कि 29 जून को भी बनारस के डीरेका और डीएलडब्लू के हज़ारों रेलवे कर्मचारी नरेंद्र मोदी के स्थानीय पीएमओ कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे लेकिन गेट बंद कर उन्हें प्रशासन ने घंटों रोके रख्खा।

सिर्फ बनारस में ही नहीं बल्कि निगमीकरण के ख़िलाफ़ पूरे देश में रेलवे कर्मचारियों के अंदर गुस्सा है। जबसे ख़बर आई है उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब आदि जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

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बिहार में रेल कर्मचारियों का प्रदर्शनः फ़ोटो साभारः कमल उसरी

पांच जुलाई शुक्रवार को पूर्व मध्य रेलवे में कार्यरत रेल कर्मचारियों ने बिहार के हाजीपुर, समस्तीपुर, धनबाद, दानापुर, मुगलसराय समेत कई जगहों पर काला दिवस मनाया।

इन प्रदर्शनों में आइआरईएफ़/ऐक्टू से संबद्ध पूर्व मध्य रेलवे इम्प्लाइज यूनियन और अन्य रेल एसोसिएशनों ने हिस्सा लिया।

इसी तरह गुरुवार को टीयूसीसी से संबद्ध पूर्वोत्तर रेलवे कार्मिक यूनियन (पीआरकेयू) ने बरेली और काठगोदाम रेलवे स्टेशनों पर निजीकरण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और पर्चे बांटे।

पीआरकेयू के महामंत्री राकेश मिश्रा ने कहा कि ‘अगर सरकार नहीं मानती है तो इस बार भारतीय रेलवे में ऐसा आंदोलन होगा कि लोग 1974 के ऐतिहासिक आंदोलन को भूल जाएंगे।’

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रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला, पंजाब में कर्मचारियों का प्रदर्शन। फ़ोटो साभारः कमल उसरी

गुरुवार को ही पंजाब के कपूरथला रेल कोच फ़ैक्ट्री में इंडियन रेलवे इम्प्लाइज़ फ़ेडरेशन (आईआरईएफ़) के कर्मचारियों प्रदर्शन किया और मार्च निकाला।

आईआरईएफ़ के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड सर्वजीत सिंह ने कहा कि निजीकरण के ख़िलाफ़ रेलवे कर्मचारी करो या मरो का संघर्ष करेंगे।

उन्होंने कहा, “जान दे देंगे लेकिन रेल का निगमीकरण-निजीकरण नहीं होने देंगे.”

बुधवार को लखनऊ डिविज़न में भी पूर्वोत्तर रेलवे वर्कर्स यूनियन ने निगमीकरण के नुकसान को लेकर कर्मचारियों में जागरूकता अभियान चलाया।

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पश्चिम बंगाल के चितरंजन में निगमीकरण का विरोध। फ़ोटो साभारः कमल उसरी

पश्चिम बंगाल में एक जुलाई मंगलवार को सीएलडब्ल्यू चिरंजन में हज़ारों रेलवे कर्मचारियों ने निगमीकरण के ख़िलाफ़ मोर्चा निकाला।

30 मई को प्रधानमंत्री पद की दोबारा शपथ लेने के कुछ दिन बाद ही मोदी ने रेलवे की सात उत्पादन इकाईयों यानी रेलवे कारखानों के निजीकरण का फरमान जारी कर दिया।

मोदी सरकार ने 100 दिन का एक्शन प्लान बनाया है जिसके तहत रेलवे के सात कारखानों को भारतीय रेलवे से अलग कर निगम बनाने का प्रस्ताव है।

अभी इस योजना का पूरा ख़ाका आया भी नहीं है कि रेलवे कर्मचारियों और रेल यूनियनों की ओर से तीख़ा विरोध शुरू हो गया है।

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One thought on “बनारस में मौजूद मोदी के ख़िलाफ़ रेलकर्मियों का अर्द्धनग्न प्रदर्शन

  • July 7, 2019 at 10:06 am
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    Saling out india to foreigners through corporate routes.

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