रेल पार्सल अमेज़ॉन के हवाले, पार्सल कर्मी आज से दो दिन की हड़ताल पर

मोदी सरकार के रेल मंत्रालय का निजिकरण की दिशा में एक और नया फरमान जारी हो गया है।

अब दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़ॉन इंडिया को रेलवे में पार्सल ढुलाई के लिए अधिकार दे दिया गया है।

बगैर किसी टेंडर के दिल्ली मुंबई-राजधानी और सियालदह-दिल्ली राजधानी में पार्सल का जिम्मा अमेजॉन कंपनी को देने का मोदी सरकार ने फैसला किया है।

इसके साथ ही पूरे रेलवे की पार्सल सेवाएं निजी कंपनियों के हाथ देने की सरकार योजना बना चुकी है।

एसएलआर कोच वाली ट्रेनों, जिसमें दो पार्सल बोगी में से एक कोच पहले ही ठेकेदारी में दी जा चुकी है, अब दूसरा पार्सल कोच भी निजी कंपनी के हवाले किया जा रहा है।

इस मनमाने क़दम के विरोध में भारतीय रेलवे लोडिंग-अनलोडिंग वर्कर्स यूनियन ने 31 जुलाई और 1 अगस्त को हड़ताल की घोषणा की है।

इस दौरान नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों के लोडिंग अनलोडिंग श्रमिक किसी भी प्रकार का कार्य नहीं करेंगे।

इस हड़ताल को रेलवे के फ़ारवर्ड एजेंटों के संगठन ने भी समर्थन दिया है।

बिना टेंडर अमेजॉन के हवाले

बगैर टेंडर अमेज़ॉन को पार्सल का कार्य सौंपने के लिए रेल महकमे का कुतर्क है कि टेंडर नहीं होने के बावजूद इससे राजस्व ज्यादा मिलेगा। यानी सब कुछ सरकार की मनमर्जी पर।

रेलवे के कोच, वैगन, इंजन कारखानों आदि को निगमीकरण के ज़रिए निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, दो ट्रेनों को निजी कंपनियों द्वारा चलाने के लिए देने और अब रेल पार्सल को भी बगैर टेंडर निजी हाथों में सौंपने की घोषणा तथा इन योजनाओं के समांतर वरिष्ठ रेलकर्मियों, जिन्होंने 30 साल से अधिक कार्य किया है अथवा 55 साल से अधिक उम्र हो गई, की जबरिया छँटनी की योजना इमर्जेंसी जैसे हालात की बानगी है।

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि मोदी सरकार जिस गति से देश की संपत्तियां और सरकारी सेवाएं देसी विदेशी पूंजीपतियों को सौंप रही है, उससे आने वाले समय में सब कुछ मुनाफ़ाखोरों के हवाले हो जाएगा।

रेलवे में इतने बड़े पैमाने पर निगमीकरण और निजीकरण के कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन रेलवे ट्रेड यूनियनें इसपर भी अपनी चुनावी राजनीति की रोटियां सेंक रही हैं।

कर्मचारियों के स्तर पर निर्णायक लड़ाई का दबाव बढ़ रहा है लेकिन ट्रेड यूनियन नेतृत्व असमंजस में है और राष्ट्रीय स्तर पर किसी कोआर्डिनेशन को स्थापित करने में अभी तक अक्षम साबित हुई हैं।

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