बनारस में मोदी के कार्यालय को घेरने पहुंचे रेल कर्मचारी, निगमीकरण का हो रहा विरोध

देशभर में रेलवे कारखानों के निगमीकरण के ख़िलाफ़ वाराणसी में डीरेका और डीएलडब्लू कर्मचारियों ने वाराणसी में स्थित नरेंद्र मोदी के कार्यालय का घेराव किया।

इसके अलावा पंजाब के कपूरथाला रेल कोच फैक्ट्री के कर्मचारियों ने भी सरकार को निगमीकरण के बहाने निजीकरण करने से बाज आने की चेतावनी दी।

कर्मचारी भारतीय रेलवे की सभी उत्पादन इकाइयों को 100 दिनों में निगमीकरण किए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।

कपूरथाला में कर्मचारियों ने डीएमडब्ल्यू इंप्लाइज यूनियन के बैनर तले प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन दिया।

बनारस में भी डीएलडब्लू के कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय जाकर ज्ञापन देने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक लिया।

यह खबर भले नेशनल मीडिया से गायब हो लेकिन स्थानीय मीडिया ने इस खबर को कवर किया है।

dlw employee @ pankaj verma

पीएम मोदी पर ‘वादा ख़िलाफ़ी’ का आरोप

अमर उजाला ने तस्वीरें लगाते हुए शीर्ष लगाया है- पीएम के संसदीय कार्यालय जा रहे डीरेका कर्मियों को पुलिस ने रोका।

अधिकारियों के समझाने पर कर्मचारियों ने इस बारे में ठोस कदम उठाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।

निगमीकरण की बात सामने आने के बाद डीएलडब्लू बनारस के कर्मचारियों ने अस्थाई पीएमओ ऑफिस जो बनारस में बना है उसके घेराव की चेतावनी दी थी।

राष्ट्रीय महासचिव इंडियन रेलवे एम्पलाइज फ़ेडरेशन सर्वजीत सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि ‘प्रधानमंत्री के रेलवे के निजीकरण ना करने के बयानों के बावजूद पिछले दरवाजे से उत्पादन इकाइयों के निगमीकरण करने के आदेश जारी करना बहुत ही निराशाजनक और निंदनीय है भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयों का राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।’

सर्वजीत सिंह ने भारत सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने में उत्पादन इकाइयों की अहम भूमिका रही है उत्पादन इकाइयों के निगमीकरण से रेलवे के वजूद को ख़तरा पैदा हो जाएगा। भारतीय रेल में इस्तेमाल होने वाले रोलिंग स्टॉक की कीमतें बढ़ जाएंगी।

जनता की मिल्कियत

इंडियन रेलवे एंप्लाइज़ फ़ेडरेशन (आईआरईएफ़) की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय रेल जनता की मिल्कियत है जिसे पूंजीपतियों के हाथों बिकने नहीं दिया जाएगा।

रेलवे यूनियन ने सरकार से पूछा है कि जितनी उत्पादन इकाइयां हैं वह सभी अपने काम को बखूबी अंजाम दे रही हैं तो फिर क्यों उन्हें निगम बनाकर कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है?

यूनियनों ने मोदी का वो वादा याद दिलाया जिसमें उन्होंने भरोसा दिया था कि मैं सबका भविष्य संवारने का काम करूंगा तो रेल कारखानों के लोगों के भविष्य को बर्बाद करने का क्यों फैसला लिया गया?

ऐसा लगता है कि उत्पादन इकाइयों में शामिल भारतीय रेल के मजदूर यूनियनों में गुस्सा बढ़ रहा है। कई यूनियनों ने उस भाषण को साझा करना शुरू किया है जिसमें नरेंद्र मोदी ने बनारस में रेल के निजीकरण न करने की कसम खाई थी।

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