मज़दूरों की ख़बर को प्राइम टाइम में जगह देने वाले रवीश कुमार को एशिया का नोबल पुरस्कार

मज़दूरों, कर्मचारियों, छात्रों-नौजवानों की ख़बर को अपने प्राइम टाइम शो में मुखर होकर दिखाने और जनता के मुद्दे उठाने वाले टीवी पत्रकार रवीश कुमार को एशिया का नोबल कहे जाने वाले रेमन मैगसेस पुरस्कार से नवाज़ा गया है।

एनडीटीवी इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार चैनलों की भीड़ में कुछ चंद टीवी पत्रकारों में से एक हैं जिन्होंने मेहनतकश जनता की आवाज़ को देश के सामने लाने में ख़तरे भी मोल लिए।

ऐसे समय में रवीश कुमार को सम्मान मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है जब पूरी मीडिया सरकार परस्त हो चुकी है और जिन्होंने घुटने नहीं टेके उन्हें सरकार ने साम दाम दंड भेद से अपना भोंपू बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

आज सबसे बड़ा संकट ये है कि मज़दूर वर्ग पर हमले अभूतपूर्व रूप से बढ़ गए हैं और उनकी ख़बार न तो अख़बारों में दिखाई देती है न उनकी आवाज़ चैनलों में सुनाई देती है।

बल्कि उल्टे ये हो रहा है कि सरकार मज़दूर विरोधी जो फैसले कर रही है, मीडिया संस्थान न केवल उसका गुणगान कर रहे हैं बल्कि जनता को ही उसके विरोध में किए गए फैसले को जायज ठहरा रहे हैं।

जब मीडिया आंखों में धूल झोंक रही है..

श्रम क़ानून ख़त्म किेए जा रहे हैं और चैनल अख़बार मिलकर ये बता रहे हैं कि इससे रोज़गार बढ़ेगा। कितनी विडंबना है? नौकरियां छीनने वाले क़ानून से कैसे रोज़गार बढ़ेगा?

असल में मौजूदा कारपोरेट मीडिया जनता को उसके घर में घुसकर उनकी आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही है।

ऐसे में रवीश कुमार का पुरस्कृत होना मज़दूर वर्ग के लिए थोड़े संतोष की बात है।

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार एशिया के व्यक्तियों और संस्थाओं को उनके अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय काम करने के लिए दिया जाता है।

रवीश के अलावा ये सम्मान म्यांमार के स्वे विन, थाईलैंड के अंगखाना नीलापाइजित, फ़िलीपीन्स के रेमुन्डो पुजांते और दक्षिण कोरिया के किम जोंग-की को भी मिला है।

रेमन मैग्सेस अवॉर्ड फ़ाउंडेशन ने रवीश कुमार को यह सम्मान ‘बेआवाज़ों की आवाज़’ बनने के लिए दिया है।

फाउंडेशन ने रवीश कुमार की प्रसंशा करते हुए उनके टीवी शो प्राइम टाइम का भी ज़िक्र किया। वैसे बता दें कि रवीश कुमार ने अपने शुरुआती करियर में एक शो करते थे, ‘रवीश की रिपोर्ट’।

मज़दूर बस्तियों में कौन एंकर जाता है?

इस शो में मज़दूर बस्तियों, मज़दूर इलाक़ों, आम जनता के रहन सहन को केंद्रित कर उनकी परेशानियों को जानने की कोशिश होती थी।

ये शो इतना हिट हुआ कि रवीश कुमार को देश स्तर पर इससे पहचान मिली।

यह बहुत ही निराशाजनक बात है कि आज भारत में तमाम न्यूज चैनलों के बावजूद भी कोई मीडिया या पत्रकार ऐसा नहीं जो मज़दूर वर्गों के हित की बात करे या उनसे जुड़े मुद्दों को अपनी आवाज दें।

इन सब के बीच पत्रकार रवीश कुमार ने हमेशा बेज़ुबानों को आवाज़ दी है। उनके इसी योगदान को देखते हुए उन्हें एशिया का नोबेल पुरस्कार दिया गया है।

रेमन मैग्सेस अवॉर्ड फ़ाउंडेशन ने रवीश कुमार की पत्रकारिता को सबसे अच्छा, सत्य के प्रति निष्ठा, ईमानदार एवं निष्पक्ष बताया है। साथ ही उन्हें कई ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से बोलने के लिए जाना जाता है।

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