मैनेजमेंट की मनमानी के ख़िलाफ़ रुद्रपुर में मज़दूरों की प्रतिरोध सभा

उत्तराखंड के रुद्रपुर में 2 अक्टूबर को इंटरार्क मजदूर संगठन और इंकलाबी मज़दूर केंद्र के आह्वान पर स्थानीय अंबेडकर पार्क में मजदूर प्रतिरोध सभा का आयोजन हुआ और छँटनी, बंदी, यूनियनों को मान्यता देने, मांग पत्रों पर सुनवाई करने, ठेका प्रथा खत्म करने आदि मुद्दे उठाए गए।

संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि मज़दूर नेताओं ने कहा कि कहा कि आज मंदी के बहाने पूंजीपतियों द्वारा मजदूरों को नौकरी से निकाल कर बेरोजगार किया जा रहा है।

सिडकुल समेत पूरे देश भर में मालिकों द्वारा गैरकानूनी रूप से कंपनियां बंद कर छँटनी, बंदी, लेऑफ कर मजदूरों को नौकरियों से निकाला जा रहा है।

मंदी का हव्वा खड़ा करके स्थाई मजदूरों पर हमला किया जा रहा है और ट्रेड यूनियनों का दमन किया जा रहा है। मजदूरों के मांग पत्र पर सुनवाई नहीं की जा रही है।

प्रतिदिन रिलायंस, टाटा, बिरला, मारुति, गोदरेज, जिंदल समेत सभी कंपनियों में प्रबंधकों व सीईओ के वेतन भत्ते लगातार बढ़ते जा रहे हैं। नवीन जिंदल का वेतन 74 करोड़ रुपये से ज्यादा है, वहीं मजदूरों का वेतन वृद्धि नहीं के बराबर हो रहा है।

प्रबंधकों व मजदूरों के वेतन में गैप काफी बढ़ गया है। टाटा मोटर्स के सीईओ का वेतन कर्मचारियों के औसत वेतन का 450 गुना हो चुकी है। परंतु मालिकों द्वारा मजदूरों की सम्मानजनक वेतन वृद्धि नहीं की जा रही है।

rudrapur workers resistance meeting

यूनिनों पर दमन चक्र

वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पूँजीपतियों के ऋण माफ किए जा रहे हैं, टैक्सों में निरंतर छूटें दी जा रही हैं, वहीं मजदूरों के खिलाफ कानून बनाए जा रहे हैं। इसे भटकाने के लिए गैर जरूरी मुद्दे उछाले जा रहे हैं।

सभा में मजदूर विरोधी सभी कदमों को वापस लेने की मांग की गई और जीएसटी सहित सभी अप्रत्यक्ष करों को वापस लेने की माँग की गई। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती छँटनी का सर्वाधिक शिकार ठेका मजदूर हो रहे हैं।

सिडकुल पंतनगर में एरा व माइक्रोमैक्स तथा सिडकुल सितारगंज में एमकोर फ्लैक्सिबल समेत कई कंपनियां गैरकानूनी रूप से बंद कर दी गई हैं और मजदूरों व उनके परिजनों का भविष्य बर्बाद कर दिया गया है।

शिरडी, टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड समेत कई कंपनियों में लेऑफ के नाम पर मजदूरों का रोजगार छीना जा रहा है। बजाज मोटर्स, इंटरार्क सहित कई कंपनियों में मालिकों द्वारा यूनियनों पर हमले, नेताओं का उत्पीड़न कर नौकरी से निकाला जा रहा है।

इंटरार्क, गुजरात अंबुजा, पारले, एलजीबी, लुकास टीवीएस समेत कई कंपनियों की यूनियनों के मांग पत्र पर सुनवाई नहीं की जा रही है।

rudrapur workers resistance meeting

25,000 रुपये वेतन की मांग

हर तरफ गैरकानूनी ठेका प्रथा निलंबन बर्खास्तगी का बोलबाला है। शासन-प्रशासन मालिकों का साथ दे रहे हैं। श्रम विभाग मालिकों की भाषा बोलता है।पूरी व्यवस्था मालिकों के साथ खड़ी है।

सभा मे स्थाई काम स्थाई रोजगार, बेरोजगार मज़दूरों को 25,000 रुपए मासिक भत्ता देने, माँगपत्रों पर सुनवाई करने, यूनियनों को मान्यता देने आदि माँग बुलंदी से उठी। एक साथ आकर साझा संघर्ष करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।

सभा को इंकलाबी मजदूर केंद्र के कैलाश भट्ट, ठेका मजदूर कल्याण समिति के अभिलाख, श्रमिक संयुक्त मोर्चा के महामंत्री वह ब्रिटानिया श्रमिक संघ के अध्यक्ष गणेश मेहरा, इंट्रार्क मजदूर संगठन पंतनगर के अध्यक्ष दलजीत सिंह, इंट्रार्क मजदूर संगठन किच्छा के अध्यक्ष राकेश कुमार, पारले मजदूर संघ पंतनगर के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी, सिडकुल संयुक्त मोर्चा सितारगंज के अध्यक्ष व रैकेट इंप्लाइज संघ सितारगंज के सुरेंद्र सिंह देउपा, गुजरात अंबुजा यूनियन सितारगंज के अध्यक्ष कैलाश पांडे, श्रमिक संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष व राने मद्रास यूनियन के महामंत्री दिनेश तिवारी, बजाज मोटर्स कर्मकार यूनियन के महामंत्री कृपाल सिंह, शिरडी श्रमिक संगठन के महामंत्री आनंद सिंह नेगी, यजाकी वर्कर्स यूनियन के महामंत्री राजेंद्र सिंह, देना इंडिया मजदूर संघ के विशाल, एडिएंट कर्मकार यूनियन के अध्यक्ष गंगा सिंह, पारले मज़दूर संघ सितारगंज के मोनू, डेल्टा पावर, एमकोर, नेस्ले कर्मचारी संगठन, भगवती श्रमिक संगठन, एलजीबी वर्कर्स यूनियन, मज़दूर सहयोग केंद्र आदि के प्रतिनिधि सहित भारी संख्या में मज़दूर शामिल थे।

प्रमुख मांगें

1- बंद और घाटे में चल रहे सभी उद्योगों का राष्ट्रीयकरण हो।

2- मंदी के नाम पर मज़दूरों पर जुल्म और शोषण बंद हो।

3- बंदी, छंटनी और ले ऑफ़ पर रोक लगे।

4-ठेका प्रथा ख़त्म करो, स्थाई काम और स्थाई रोज़गार दो।

5-बेरोज़गार व सेवानिवृत्त मज़दूरों को 25000 रुपये वेतन, बेरोज़गारी भत्ता पेंशन दो।

6-मंदी के बहाने ले ऑफ़ कर ठेका मज़दूरों की छंटनी करना बंद करो।

7-छंटनी के शिकार हुए समस्त ठेका मज़दूरों को तत्काल बेरोज़गारी भत्ता दो

8-मज़दूरों और प्रबधकों के वेतन अंतर को कम करो। सीईओ समेत किसी भी प्रबंधन या मज़दूर का वेतन न्यूनतम वेतन से पांच गुना अधिक न हो।

9-पूंजीपतियों की कर्जमाफ़ी करना व उन्हें टैक्स में छूट देना बंद करो।

10-मज़दूरों व आम जनता के समस्त कर्ज माफ़ करो।

11-कृषि को बाज़ार के हवाले करना बंद करो। खेती की लागत कम करो।

12-जीएसटी सहित सभी अप्रत्यक्ष करों पर रोक लगाओ।

13-सार्वजनिक वितरण प्रणाली को दुरुस्त कर मज़दूरों व आम जन को सस्ता राशन आदि सुनिश्चित कराओ।

14-मज़दूरों व आम नजता के लिए निःशुल्क चिकित्सा, आवास, परिवहन व शिक्षा की व्यवस्था करो।

15-मंदी के बहाने बजाज मोटर्स, इंटरार्क, वोल्टास, एडविक, महिंदा सीआईई ओटोमोबाइल समेत अन्य यूनियनों पर हमले करना बंद करो।

16-यूनियनों को मान्यता प्रदान करो।

17-गुजरात अम्बुजा, इंटरार्क, वोल्टास, ऑटोहाईव, पारले समेत समस्त यूनियनों के मांगपत्रो पर सुनवाई करो।

18-एरा, माइक्रोमैक्स, एमकौर समेत समस्त बंद कंपनियों का सरकार द्वारा अधिग्रहण कर समस्त मज़दूरों की कार्यबहाली की जाए।

19- शिरडी,टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड समेत अन्य सभी कंपनियों में ले ऑफ़ पर रोक लगाई जाए।

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