आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि बेरोजगारी अभी और बढ़ेगी

इस समय के आंकड़े ये संकेत दे रहे है की GFCF में भरी गिरावट के चलते जीडीपी की वर्तमान दशा का पता चलता है बड़े पैमाने निवेश कम हुवा है इसका मतलब युवाओं के लिए नौकरियों भी कम होगी।  

धीमी विकास दर

भारत में पहले ही धीमी विकास दर के साथ-साथ बढ़ती हुई बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा हैं।

लेकिन, जिस रास्ते अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है उसमें नौकरियों का हाल और भी बुरा होने वाला हैं।

द टेलिग्राफ के मुताबिक Gross fixed Capital Formation में लगातार गिरावट, जीएसटी से उम्मीद के मुताबिक टैक्स का नहीं मिलना हैं।

साथ ही  कैपिटल एक्सपेंडिचर में कमी आने का खामियाजा अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ सकता हैं।

पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट 2019 पेश करते हुए दावा किया था कि 2022 तक हम न्यू इंडिया बनाएंगे।

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जीडीपी में लगातार गिरावट

इस दौरान किसानों कि आयो दोगुनी होगी तथा नौजवानों को बेहतर नौकरी अवसर मिलेंगे।

लेकिन सरकार अपने किसी भी वादे को पुरे करने नाकाम हुई हैं।

GFCF आंकड़े ये संकेत दे रहे है की जीडीपी में लगातार गिरावट ये बता रही हैं की, पूँजीपति इस माहौल में निवेश का खतरा नहीं उठा रहे हैं।

इसका अर्थ ये भी है की बेरोजगारी अभी और बढ़ेगी।

दूसरी समस्या ये है की जितना टैक्स कलेक्शन का अनुमान सरकार ने लगाया था।

उससे बहुत कम की आपूर्ति सरकार से हो पाई हैं।

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सरकार अपने वादे पुरे करने में नाकाम

2018-19 में 14,84,406 करोड़ रुपये तय हुआ था।

लेकिन, वास्तिक रूप में यह 13,16,951 रहा। इसका मतलब है कि 1,67,455 करोड़ की टैक्स कलेक्शन में कमी रह गई।

इसका मतलब साफ था कि जीएसटी से जिस मद में टैक्स कलेक्शन की अंदाजा लगाया जा रहा था वह नहीं हो पाया।

जबकि, 2019 में अंतरिम बजट पेश करते हुए गोयल ने कहा था कि जीएसटी के लागू होने से टैक्स कलेक्शन दायरा बढ़ेगा और इसमें इजाफा भी होगा।

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