हरियाणा में चुनाव के बीच होंडा कंपनी में तनाव

हरियाणा में चुनावों के बीच होंडा कंपनी में जोरो-शोरो से तनाव की स्थिति शुरू हो गई है।

होंडा के एक अस्थाई मज़दूर ने नाम ज़ाहिर न होने की शर्त पर वर्कर्स यूनिटी को फ़ोन कंपनी के हालात के विषय में बताया।

उनका कहना है कि गुरुग्राम प्लांट के दोपहिया वहन प्रदाता कंपनी होंडा के आईएमटी मानेसर स्थित स्कूटर प्लांट में प्रबंधन की और से मज़दूरों को निकाले जाने के विरोध में बीते शुक्रवार को यूनियन और प्रबंधन आमने-सामने हो गए।

मज़दूरों ने प्रबंधन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए काम रोक दिया। इसके बाद भारी संख्या में प्लांट के बाहर गोरखा रेजिमेंट को तैनात किया गया।

लेकिन इसके अगले ही दिन गोरखा रेजिमेंट को हटा कर पुलिसबल को तैनात किया गया।

श्रम विभाग ने हस्तक्षेप करते हुए मामले को शांत करने की कोशिश की लेकिन बैठक का कोई नतीजा नहीं निकल पाया।

होंडा यूनियन के प्रधान सुरेश गौड़ के मुताबिक, यूनियन पूरी तरह से मज़दूरों के साथ हैं, और आगे की रणनीति के लिए अभी बातचीत की जा रही है।

दरअसल होंडा कंपनी में काम करने वाले स्थाई मज़दूर होशियार सिंह को बृहस्पतिवार को काम पूरा होने के बाद ये सूचना मिली कि कंपनी प्रबंधन की और से उसे निलंबित कर दिया गया है।

शुक्रवार की सुबह शिफ्ट शुरू होने से पहले व्हीकल क्वालिटी विभाग के मज़दूर पहुंचे तो उन्होंने डिवीजन प्रमुख से साथी मज़दूर के निलंबन संबंधी बात करने की मांग की।

पर डिवीजन प्रमुख के न आने पर मज़दूरों में तनाव और बढ़ गया और उन्होंने कंपनी प्रबंधन पर बिना वजह मज़दूरो को निकाले जाने का विरोध शुरू कर दिया।

कंपनी प्लांट के अंदर करीब 35-40 मज़दूरों ने एक यूनिट का वर्क सस्पेंड करते हुए धरने पर बैठ गए।

कंपनी प्लांट में मज़दूरों की हड़ताल की सूचना मिलने के बाद चुनाव के मद्देनज़र एहतियात बरतते हुए प्लांट के आस-पास भारी संख्या में पुलिसबल को तैनात किया गया।

जिसके बाद मज़दूर यूनियन के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने कंपनी प्रबंधन पर मनमानी का आरोप लगाया।

श्रम विभाग के अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन और श्रमिको के बीच मसला सुलझाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बन सकी।

इस मामले में कंपनी प्रबंधन के अधिकारियों से बातचीत करने की कोशिश की गई पर किसी से कोई संपर्क नहीं हो पाया।

वहीं इस पूरे मामले को लेकर आईएमटी एसएचओ का कहना है कि होंडा में किसी भी तरह का तनाव नहीं है और सब कुछ शांत है।

तो वहीं बेल सोनिका यूनियन के प्रतिनिधि का कहना है कि कंपनी में काफी समय से लाइन चेज को लेकर भी बदलाव चल रहे थे।

और मज़दूर लाइन चेंज के खिलाफ थे मज़दूरों को अलग-अलग लाइन में डिप्यूट करने और कई लाइने बंद होने से मज़दूरों में तनाव की स्थिति थी। इसके साथ ही मज़दूरों का मांग पत्र भी 2 सालो से रूका हुआ है।

इतना ही नहीं होंडा कंपनी में पिछले काफी समय से तनाव की खबरें आती रही हैं, पिछले अगस्त में ही होंडा प्रबंधन ने मानेसर प्लांट से 700 कांट्रैक्ट वर्करों को ग़ैरक़ानूनी रूप से निकाल दिया था।

इसके बाद 10 अक्टूबर की सुबह 7 बजे करीब 50 ठेका मज़दूरों को दीवाली का उपहार देकर उसी समय नौकरी से निकाल दिया गया।

इसके विरोध में सभी मज़दूरों ने काम करते हुए भूख हड़ताल की जो कि 3 दिनों तक जारी रही।

और अब जहां पहले नौकरी खोने का डर केवल अस्थाई मज़दूरों में था अब स्थाई मज़दूर भी इसकी चपेट में आ गए हैं।

वर्कर्स यूनिटी इस पूरे मामले को लेकर होंडा प्रबंधन से भी बात करने की कोशिश कर रहा है, संपर्क होते ही कंपनी प्रबंधन का पक्ष भी आपके सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

 

One thought on “हरियाणा में चुनाव के बीच होंडा कंपनी में तनाव

  • October 28, 2019 at 4:53 am
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    Modi sale india

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