भारत में सबसे ज्यादा बाल मज़दूर और उनमे सबसे ज्यादा sc/st वर्ग के बच्चे

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया सबसे अधिक बाल मज़दूर भारत में ही है और उसमे सबसे ज्यादा संख्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बाल मज़दूरों की है ।

भारत में सबसे ज्यादा बाल मज़दूरी

इस रिपोर्ट के अनुसार,भारत में बाल मज़दूरों की संख्या लगभग सवा दो करोड़ है। पर योजना आयोग (अब नीति आयोग) का मानना है कि देश में करीब तीन करोड़ बाल मज़दूर हैं।

देश में बाल मज़दूरों के शोषण की समस्या बहुत गंभीर है।

यूनिसेफ के अनुसार  भारत में दस मज़दूरों में एक बाल मज़दूर है।

बाल मज़दूरों देश की पूरी श्रम शक्ति का 13 प्रतिशत हैं।

ज्यादातर बाल मज़दूर 14 साल या इससे भी  कम उम्र के हैं।

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अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सँख्या सबसे ज्यादा

तेलंगाना श्रम विभाग द्वारा एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि राज्य में 80 से 90 प्रतिशत बाल मज़दूर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आते है

द न्यूज मिनट के अनुसार, 56 मंडलों में 10 जिलों में सर्वेक्षण के पहले चरण में 9,724 बाल श्रमिकों की पहचान की गई।

इनमें से ज्यादातर बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं और  ये बच्चे  मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से सम्बन्ध रखते है

श्रम विभाग के एक अधिकारी ने द न्यूज मिनट को बताया कि तथ्य यह है कि 80-90% बाल श्रमिक SC / ST समुदायों से हैं

सर्वेक्षण किए गए 10 जिलों में, विकाराबाद में बाल मज़दूरकी संख्या सबसे अधिक थी।

जिले में 9 से 14 वर्ष के बीच के 644 से अधिक बाल मजदूर पाए गए।

बाल मज़दूर के रूप में 3,077 से अधिक किशोर (14-18 वर्ष) कार्यरत हैं।

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 2016 में बाल मज़दूर अधिनियम में संशोधन से स्थिति और बिगड़ने के आसार

2016 में बाल मज़दूर अधिनियम में संशोधन करके 14 वर्ष  से ऊपर से  18 वर्ष तक के बच्चो को किशोर के वर्ग में डाल  दिया गया था।

इस संशोधन ने किशोर बच्चों को गैर-खतरनाक उद्योगों में बाल मज़दूरी को लीगल कर दिया था।

संशोधन से  15 से 18 वर्ष के बीच के किशोर बाल मज़दूर स्कूल से वंचित रह गए।

इसका सबसे बुरा असर आदिवासी और निम्न  जाति के बच्चो पर पड़ा।

ये संशोधन राज्यसभा पारित होने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने कहा था की इससे आदिवासी और निम्न जाति के बच्चों को नुकसान होगा।

यूनिसेफ ने कहा कि बाल मज़दूरों दर आदिवासी और निम्न जाति समुदायों में क्रमशः 7 से 4 प्रतिशत  के बीच उच्चतम  स्तर पर है।

संशोधन हाशिए पर और कमजोर समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

नए बाल श्रम अधिनियम के तहत बहुत से बाल मज़दूरी के स्वरूप  आपकी नजरो से अदृश्य हो सकते हैं।

और सबसे कमजोर और हाशिए पर चल रहे बच्चे स्कूल से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

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सरकारी और विदेशी अनुदान पाई एनजीओ सिर्फ करती है दिखावा

बहुत सी सरकारी और विदेशी अनुदान पाने के लिए ये संस्थाएं बाल मज़दूरी रोकने के नाम पर झूठा दिखावा करती हुई पायी गई है

कुछ साल पहले एक पत्रकार ने लिखा था कि दिल्ली में बाल श्रम पर एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ।

जिसमें संस्थाओं ने कुछ ऐसे बच्चों को पेश किया, जिनके बारे में बताया गया कि उन्हें बाल मज़दूरी से मुक्त करवाया गया है

लेकिन बाद में एक अखबार ने यह भंडाफोड़ किया कि दरअसल जिन बच्चों को मुक्त कराए गए बाल मज़दूर के रूप में पेश किया गया था,दरसल वे बाल मज़दूर थे ही नहीं।

इससे पता चलता है कि बाल मज़दूर  की मुक्ति के नाम पर कितनी लूट मची है।

देश में बाल श्रम के शोषण की समस्या बहुत गंभीर है। और सरकार इसको लेकर उदासीन दिखाई देती है  इतने बड़े पैमाने पर बाल श्रमिकों के शोषण के कारण भारत सरकार को कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय कल्याणकारी संस्थाओं की झाड़ सुननी पड़ जाती है।

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