कंपनी के बॉस पर 35 कर्मचारियों को आत्महत्या में धकेलने के लिए फ्रांस में ऐतिहासिक सुनवाई

करीने से ब्लेज़र पहने और ठीक से बाल में कँघी किये एक उम्रदराज़ आदमी कटघरे में दोनों हाथो को गोद में लिए बड़ी सभ्यता से बैठा है, इस पर इल्ज़ाम है कि इसने अपने कर्मचारियों  के जीवन को इतना असहनीय बना दिया कि कर्मचारियों ने खुद को मरना बेहतर समझा। 

फ्रांस की विशाल दूरसंचार कंपनी अपने 1,30,000 कर्मचारियों में से 22,000 कर्मचारियों को निकालना चाहती थी। ज़ाहिर सी बात है की इतनी अधिक संख्या में मजदूरों को निकाल पाना आसान काम नहीं था।

अगर मान लिया जाए कि कर्मचारी समझौते के लिए तैयार हो भी जाते तो भी कम्पनी को इसके एवज में अच्छा खासा मुआवज़ा कर्मचारी को देना पड़ता।

जिसके चलते प्रबंधन ने ऐसी कूटनीति अपनाई जिसमें अधिकारियों ने कर्मचारियों को इतना ज़्यादा परेशान करने का फैसला किया की कर्मचारी खुद ही अपनी नौकरी छोड़ने पर मज़बूर हो जाएं।

इसमें शामिल थे- मुख्य कार्यकारी अधिकारी डिडिएर लोम्बार्ड, लुइस-पियरे वेनेज, ओलिवियर बारबेरोट, मानव संसाधन यानी एचआर के पूर्व प्रमुख और चार अन्य।

और इस तरह फ्रांस की विशाल दूरसंचार कंपनी में प्रबंधन के उत्पीड़न से परेशान होकर 35 कर्मचारियों ने आत्महत्या कर ली।

यह पहली बार है कि फ्रांस में कोई कंपनी मालिक इस तरह के आरोपों के दायरे में आया है, जिस पर मज़दूर उत्पीड़न के लिए मुकदमा चलाया गया है, जिसके कारण मज़दूरों की मृत्यु हुई।

इस मुकदमे ने पूंजीवाद और कॉर्पोरेट का घिनौना चेहरा लोगो के सामने लाकर रख दिया।

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एमैनुएल मैक्रों अमीरों के राष्ट्रपति

लेकिन 12 जुलाई को ट्रॉयल शुरू होने से पहले सरकार के एक फैसले ने साथ ही कम्पनी और मज़दूरों को आमने सामने ला खड़ा किया।

जैसा कि राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस को और अधिक व्यापार-अनुकूल बनाने की मांग की है और मज़दूरों के अधिकार छीनने की कोशिश की तो उन्हें येलो वेस्ट के प्रदर्शनकारियों से विद्रोह का सामना करना पड़ा।

जैसा कि राष्ट्रपति मैक्रों ने फ्रांस को और अधिक व्यापार-अनुकूल बनाने की मांग की है, उन पर अमीरों के राष्ट्रपति होने का आरोप लग रहा है।

मज़दूरों की शिकायत है कि वे हमेशा संघर्ष को तोड़ने करने के लिए ही आगे आते हैं, मज़दूरों के लिए नहीं।

मज़दूरों के वकीलों में से एक मिशेल लेडौक्स ने घटना के बारे में बताते हुए कहा कि,“वे फंस गए थे घबरा गए थे, उनके पास एक ही संभावना थी, एक ही रास्ता था या कोई और नहीं।”

निराशा में डूबे कर्मचारयों ने खुद को पूल में गिरा दिया, या खुद को खिड़कियों से बाहर फेंक दिया, ट्रेनों और बंद पुलों और राजमार्गों पर कूद पड़े।

यहाँ तक कि कर्मचारियों के बारे में गवाही देने वाले कर्मचारियों ने खुद को रस्सी से फांसी पर लटका लिया।

ट्रायल में गवाही से पता चलता है कि कंपनी ने बेरोज़ग़ारी की दहशत को लोगों के दिल में बिठा कर, कर्मचारियों को हाशिए डाल देना, उसके आत्मविश्वास को पूरी तरह कुचल देना और ग़लत तरीके़ से अलग अलग विभाग में डाल देना जहाँ कर्मचारियों कोई अनुभव नहीं था इस तरह से व्यवस्थित उत्पीड़न की नींव डाली गई।

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28 साल का निकोलस सबसे छोटा पीड़ित

कंपनी के कर्मचारी मिस्टर लेडोक्स ने गवाही देते हुए कहा कि, उन पीड़ितों में सबसे छोटा 28 साल का निकोलस ग्रेनोविले था। ग्रेनोविले एक आत्मनिरीक्षण तकनीशियन फ़ोन लाइनों पर अकेले रहकर काम करता था। उसकी सफाई के लिए प्रशंसा की जाती थी।

अचानक ग्रेनोविले को ग्राहकों के साथ काम करने के लिए सेल्स विभाग में लगा दिया जाता है। उन्होंने उसे बिना किसी प्रशिक्षण के बिक्री मैदान में फेंक दिया था जहाँ उसका कोई अनुभव नहीं था।

वो तो हमेशा अकेले काम काम करता था, वो यहां लाचार हताश हो गया। उसने गले में एक इंटरनेट केबल डालकर फांसी लगा ली और उसने उस समय कंपनी की टी-शर्ट पहनी हुई थी।

ग्रेनेउली अगस्त 2009 में अपनी मौत से कुछ समय पहले लिखता है,“मैं यह काम अब और फ्रांस टेलेकॉम के लिए नहीं कर सकता। “

अपनी आत्महत्या से एक दिन पहले उसने 12 घंटे के काम को 30 मिनट के ब्रेक के साथ किया था।

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आपने मेरे पिता को मार डाला

वकील, जूलियट मेंडेस-रिबेरोको ने अदालत में बताया कि रेमी 48 साल के कंपनी में एक प्लानर थे। जब अचानक उनका नौकरी के काम का माहौल बदलने लगा तो वो 2009 में ब्रिटनी में एक पुल से कूद गए। 

मुकदमे में नोवेमी लौवरडौक्स ने पिछले सप्ताह पूछा, “आपने मेरे पिता को मार डाला – क्यों?”

उसके पिता रेमी ने 2011 में बॉरदॉ के पास एक फ्रांस टेलीकॉम कार्यालय के सामने खुद को आग के हवाले कर दिया, वो लगातार पुनर्मूल्यांकन को लेकर निराशा में थे।

लेडौक्स ने अदालत को बताया कि, “एक व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार किया जाना बेहद अपमानजनक है।”

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कम्पनी को परिवार की]तरह मानते थे मज़दूर

गवाही से संकेत मिलते हैं कि अधिकांश कर्मचारी अपने काम के लिए गहराई से समर्पित थे। फ्रांस की टेलीकॉम कंपनी, जो फ्रांसीसी जीवन का सालों से हिस्सा थी।

इसमें कर्मचारी आजीवन सुरक्षा महसूस करते थे, वो कम्पनी  को परिवार की तरह मानते थे।

फ्रांस में श्रम बाज़ार स्थिर है और यहाँ मज़दूरों में बार बार नौकरी को बदलने की बहुत कम चलन है।

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छोटे आदमी के लिए करुणा का कोई शब्द नहीं

इस मामले में अधिकारियों, उच्च वर्ग में, कंपनी के मालिकों को लेकर सरकार विशेष रूप से चुप रही है, जबकि फ्रांस के मज़दूरों ने विशेष उल्लास के साथ कार्यवाही को देखा है।

कोर्टरूम मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों से भरा हुआ रहता है, जो कोर्ट में प्रतिवादियों की मूक अस्वीकृति को देख रहे हैं।

श्री रिच ने कहा कि,”ये वे लोग हैं जो मंत्रियों के साथ घूमने के आदी हैं, छोटे आदमी के लिए करुणा का कोई शब्द नहीं हैं।”

दोषी पाए जाने पर पूर्व अधिकारियों को एक साल की जेल और 16,800 डॉलर का जुर्माना लग सकता है ।

फ्रांस के टेलीकॉम के एक कर्मचारी नोएल रिच ने कहा, “भले ही दंड कम हो, लेकिन यह उनके कोट पर एक ऐसा दाग होगा, जो भुलाए नहीं भूलेगा।”

आत्मघाती लहर के दौरान कर्मचारियों के साथ काम करने वाले और परीक्षण में गवाही देने वाले समाजशास्त्री नोएल बर्गी ने एक साक्षात्कार में कहा कि यह “अपमान की प्रक्रिया” थी।

आप को लग सकता है कि ये 1000 किलोमीटर दूर एक दूसरे देश की बात है, पर आपको अपने आसपास देखना होगा।

किस तरह से पूँजीवाद का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है और कौन सा मज़दूर साथी कब और किस दबाव में खुद को मार दे रहा है ये जाने के लिए आपके पास न समय है न चिंता ।

(29 जुलाई द यॉर्क टाइम में अंगेजी में छपी खबर का सम्पदन खालिद ए खान ने किया है )

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2 thoughts on “कंपनी के बॉस पर 35 कर्मचारियों को आत्महत्या में धकेलने के लिए फ्रांस में ऐतिहासिक सुनवाई

  • September 26, 2019 at 7:41 am
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    An all India workers mass political organisation is the need of the hour .

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    • September 26, 2019 at 7:52 am
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      ji aapki baat samjhme nahi aayi aap thoda saaf saaf kahege bhai

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