कश्मीरी मज़दूरों पर हमले और युद्ध उन्माद के ख़िलाफ़ ट्रेड यूनियनों ने फूंका बिगुल

देश भर में कश्मीरी मज़दूरों की पिटाई की घटनाओं के ख़िलाफ़ ट्रेड यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया है।

देश भर में भगवा लिबास पहनकर हिंदु कट्टरपंथियों के गिरोहों द्वारा कश्मीरी मज़दूरों की पिटाई की ट्रेड यूनियनों ने निंदा की है।

हरियाणा के मानेसर औद्योगिक इलाके में स्थित ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी बेलसोनिका ऑटो कम्पोनेंट एम्प्लाईज़ यूनियन ने इस बारे में एक सर्कुलर जारी किया है।

सर्कुलर के अनुसार, “पुलवामा की घटना के बाद कश्मीरी मज़दूरों और छात्रों पर हमले हो रहे हैं। हम कश्मीरी जनता के दमन व शोषण का विरोध करते हैं। और कश्मीरी मज़दूरों, छात्रों पर हो रहे दमन की निंदा करते हैं।”

सर्कुलर में कहा गया है कि “भारत और पाकिस्तान की सरकारें युद्धोन्मांद पैदा कर बहुत समय तक अपने देश की मेहनतकश जनता को उनके अधिकारों से वंचित रखने में सफल नहीं होंगी। देर सबेर जनता इस सच्चाई को समझेगा और शाशक वर्ग का मुंहतोड़ जवाब देगी।”

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maruti workers pay tribute @tnlabour
19 फ़रवरी को मारुति सुजुकी के गुड़गांव प्लांट के मज़दूरों ने पुलवामा में मारे गए सीआरपीएफ़ जवानों के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। फ़ोटो साभारः टीएन लेबर
कश्मीरी मज़दूरों से परहेज क्यों?

पुलवामा की घटना के बाद कई ट्रेड यूनियनों ने मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि दी थी।

लेकिन इस घटना के बाद जगह जगह कश्मीरी मज़दूरों, रेहड़ी पटरी पर दुकान लगाने, फेरी लगाने वालों, छात्रों आदि पर हिंदू कट्टरपंथियों के हमले होने लगे।

कश्मीरी मज़दूरों पर हो रहे इन हमलों के ख़िलाफ़ शुरू में विरोध के स्वर मंद थे, क्योंकि माहौल गमगीन था।

ट्रेड यूनियनों के बीच काम करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि अगर ट्रेड यूनियनें ‘दुनिया के मज़दूरों एक हो’ का नारा देती हैं तो उन्हें कश्मीरी मज़दूरों के पक्ष में भी आगे आना चाहिए।

सोशल मीडिया पर कश्मीरियों और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नफ़रत भरी पोस्टों की बाढ़ के बीच कई मज़दूर भी इसी रौ में बहते नज़र आए।

कई प्रतिष्ठित ट्रेड यूनियनों के सदस्य मज़दूर भी कश्मीरियों को सबक सिखाने वाली पोस्टें लिखने लगे थे।

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kashmiri vendor thrashed in lucknow
दो दिन पहले लखनऊ के डालीगंज पुल पर दो कश्मीरी दुकानदारों को गुंडों ने लाठी डंडों से पीटा। वीडियो वायरल होने के बाद इन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। फ़ोटोः स्क्रीन शॉट
युद्ध के प्रति जुनून की यूनियनों ने की निंदा

अभी हाल ही में लखनऊ में ड्राई फ्रूट बेचने वाले फेरी लगाने वाले कश्मीर मज़दूर की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ है।

इससे पहले पटना, दिल्ली, हरियाणा आदि जगहों पर कश्मीरी मज़दूरों पर हमले हुए।

पश्चिमी यूपी के शामली के पास एक चीनी मिल में काम करने वाले 70 कश्मीरी मज़दूरों को बजरंग दल की धमकी के बाद कश्मीर लौटना पड़ा है।

तीन मार्च को मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के बैनर तले ट्रेड यूनियनों की एक बड़ी रैली हुई, जिसमें ‘नो वॉर’ और ‘जंग नहीं अमन चाहिए’ लिखे पोस्ट नज़र आए।

इसमें भी मोदी सरकार के युद्ध के प्रति जुनून की निंदा की गई।

मासा के घटक टीयूसीआई के जनरल सेक्रेटरी संजय सिंघवी ने कहा कि मज़दूर वर्ग युद्ध नहीं चाहता।

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पाकिस्तानी ट्रेड यूनियनों का युद्ध विरोध वायरल

मज़दूरों में एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें पाकिस्तान की ट्रेड यूनियनों के मंच ने युद्ध का तीखा विरोध किया है।

इसमें लिखा है, “भारत और पाकिस्तान में युद्ध का शंखनाद किया जा रहा है। दोनों देशों के मज़दूर इन उकसावों को कड़ाई से ख़ारिज़ करता है। युद्ध पूंजीपतियों के बिजनेस के लिए बड़ा फायदा होता है।”

इसमें आगे लिखा गया है, “मज़दूर ग़रीबी, भुखमरी, बेरोज़गारी और मज़दूरी न बढ़ने से जूझ रहा है। हम सिर्फ वर्ग युद्ध का समर्थन करते हैं, ग़रीबी, बेहाली और बीमारी के ख़िलाफ़ युद्ध!”

इस पोस्ट को भारत और पाकिस्तान दोनों जगह सोशल मीडिया पर खूब साझा किया जा रहा है।

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