मंदी की आड़ में उबर ने की अपने 435 कर्मचारियों की छंटनी

जहां एक तरफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ये कह रही हों कि कारों में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह लोगों का ओला उबर जैसी टैक्सी सर्विस का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना है।

लेकिन हकीकत कुछ और ही है। वहीं उबर मंदी का हवाला देकर अपने कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं।

आर्थिक मंदी के इस दौर में टैक्सी सर्विस भी अछूती नहीं है। उन पर भी इसकी मार पड़ी है।

यही वजह है कि अमेरिकी मुख्यालय वाले टैक्सी एग्रीगेटर कंपनी उबर ने एक बार फिर अपने स्टाफ में कटौती की है।

मंदी के चलते उबर ने अपनी प्रोडक्ट और इंजीनियरिंग टीम से 435 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है।

 

पिछले दो महिने में 2 बार छंटनी

आपको बता दें कि कंपनी का आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं चल रही है।

अमेरिका में कंपनी का घाटा बढ़ते ही जा रहा है। जिसके चलते उबर ने पिछले दो महिने के अन्दर दूसरी बार छंटनी की है।

इससे पहले जुलाई में उबर ने मार्केटिंग की करीब 400 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।

उबर की इस बार की छंटनी में उसके अमेरिकी दफ्तरों से करीब 8 फीसदी कर्मचारी बाहर हो गए हैं।

170 लोग प्रोडक्ट टीम से और 265 लोगों को इंजीनियरिंग टीम से बाहर निकाला गया है।

कंपनी की तरफ से एक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि भी की गई है।

कंपनी को 5.2 अरब डॉलर का घाटा

उबर की प्रवक्ता ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आगे हालात सुधरेंगे, हम अपनी प्राथमिकता के हिसाब से काम कर रहे हैं और अच्छे प्रदर्शन के आधार पर अपने को जवाबदेह बनाए हुए हैं।

आपको बता दें कि उबर को इसी साल न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया है।

हालांकि अब तक इसके IPO को अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है। बावजूद यह अमेरिका के पिछले पांच साल के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ था।

इससे कंपनी ने 8.1 अरब डॉलर रकम जुटाई थी। जून तिमाही में कंपनी को एक तिमाही का सबसे बड़ा 5.2 अरब डॉलर का घाटा हुआ था।

इकोनॉमिक्स टाइम्स के रिपोर्ट के अनुसार भारत में ओला और उबर की रफ्तार सुस्त पड़ गई है।

दोनों की कंपनियों के डेली राइड्स में में पिछले 6 महीनों में सिर्फ 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पहले डेली राइड्स 35 लाख थी जो अब करीब 36.5 लाख पर है।

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